नरेंद्र मोदी चीन में शी जिनपिंग से क्या बात करेंगे?

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, Getty Images

लगभग ढाई महीने तक भारत और चीन के बीच में चला डोकलाम विवाद अब समाप्त हो चुका है. दोनों देशों की सेनाएं अब सीमा पर पुरानी स्थिति को बरक़रार रखने पर सहमत हो चुकी हैं. इसका स्वागत भूटान ने भी किया है.

भूटान ने कहा है कि वह तीनों देशों के बीच स्थित सीमा पर शांति में सहयोग देगा और उसे आशा है कि संबंधित देशों के बीच मौजूदा समझौतों को ध्यान में रखा जाएगा.

वहीं, भारत ने भी घोषणा कर दी है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3-5 सितंबर तक चीन के फ़ुजियान प्रांत में होने वाले 9वें ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेंगे. सोमवार को डोकलाम विवाद पर दोनों देशों के बीच शांति बहाली की घोषणा हो गई. वहीं, मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा की घोषणा हो गई. यह बहुत तेज़ी में हुआ.

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, Getty Images

ब्रिक्स का हाथ

आगे भारत और चीन की राह क्या रहने वाली है और ब्रिक्स सम्मेलन में दोनों देशों के बीच क्या चर्चा हो सकती है यह बड़ा सवाल है.

एशिया-प्रशांत मामलों के विशेषज्ञ राहुल मिश्रा कहते हैं कि 'इसमें कोई शक़ नहीं है कि डोकलाम विवाद को सुलझाने में ब्रिक्स का बड़ा हाथ है. वह कहते हैं कि ब्रिक्स को खड़ा करने में चीन का बड़ा रोल है और वह इसे खुद के द्वारा बनाए गए विकसित देशों के समूह के रूप में पेश करता है.'

भारत-चीन के बीच क्या बातचीत हो सकती है. इस सवाल पर राहुल कहते हैं कि 'दोनों देशों ने झगड़ा कुटनीति के दम पर ज़रूर सुलझा लिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसकी जड़ों में जो कारण है वे ख़त्म हो गए.'

भारतीय और चीनी सेना

इमेज स्रोत, Getty Images

मोदी के रहेंगे ये मुद्दे?

वह कहते हैं कि इस बार बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा यह हो सकता है कि डोकलाम जैसी स्थिति आगे उत्पन्न न हो क्योंकि पूरे विश्व की निगाहें इस मुद्दे पर थीं.

राहुल मिश्रा भारत-चीन के बीच कूटनीति की कमी पर भी बल देते हैं. वह बताते हैं कि बड़ी से बड़ी अजीबोग़रीब स्थिति को अमरीका और रूस सुलझाने में सक्षम रहते हैं क्योंकि उनके पास कूटनीति के कई रास्ते हैं.

चीन में भारत के राजदूत रहे लखनलाल मेहरोत्रा कहते हैं, ''ब्रिक्स में भारत की ओर से आतंकवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जा सकती है क्योंकि सभी देश इससे पीड़ित हैं और पांचों देश इस बात के पक्ष में हैं. वहीं, भारत चीन के सबसे भरोसेमंद देश पाकिस्तान पर अपने देश में आतंक फ़ैलाने की बात भी कहता रहा है.''

वह कहते हैं कि पहले ब्रिक्स की ओपन स्काई पॉलिसी थी जिसे फ़िर से लागू किया जा सकता है और वैश्विक आपदाओं पर कैसे निगाह रखी जाए, इसके अलावा भूमंडलीकरण जैसे बड़े मुद्दे इस बार ब्रिक्स में हो सकते हैं.

मसूद अज़हर

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, मसूद अज़हर पर चीन ने रोका है भारत का रास्ता

फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट का मामला

ब्रिक्स में सीमा और सुरक्षा मामलों के अलावा व्यापार घाटे पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है. राहुल कहते हैं कि भारत-चीन के बीच फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट का मुद्दा दोनों देशों को पूरा करना है, इसके अलावा रीज़नल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक प्रोग्राम (आरसीईपी) की समयसीमा ख़त्म होने वाली है जिसे लेकर दोनों देशों को बात करनी है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच सहमति बनने पर भी उम्मीद की जा रही है. हमेशा देखा गया है कि न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप का मुद्दा हो या मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाना हो या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का मुद्दा हो. हर बार चीन ने इन सभी मामलों में अड़ंगा लगाया है.

राहुल और मेहरोत्रा का मानना है कि 'इस बात की उम्मीद है कि चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन मुद्दों पर भारत को लेकर सकारात्मकता दिखा सकता है.'

डोकलाम विवाद को सुलझाने में ब्रिक्स के योगदान पर जहां राहुल बल देते हैं. वहीं, मेहरोत्रा कहते हैं कि इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी बड़ी भूमिका है.

शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, जिनपिंग का कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला है

जिनपिंग का कार्यकाल

वह कहते हैं कि जल्द ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस होने वाली है और वहां नया राष्ट्रपति बनाया जाना है. शी जिनपिंग का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इस पर मेहरोत्रा कहते हैं कि इस विवाद को सुलझाकर जिनपिंग अपना स्टैंड भी साफ़ करना चाह रहे थे.

डोकलाम विवाद को भारत-चीन संबंधों के लिए मेहरोत्रा बेहतर बताते हुए कहते हैं कि इससे भारत की तरफ़ से चीन को संदेश गया है कि वह किसी को डरा-धमकाकर अपने संबंध बेहतर नहीं रख सकता है.

वह कहते हैं, "अच्छे रिश्ते बनाने के लिए पंचशील की यात्रा को पूरा करना होगा क्योंकि चीन पंचशील का गीत तो गाता है, लेकिन उस पर करता कुछ नहीं है. बुनियादी समझौतों पर चीन चलता रहेगा तो संबंध अच्छे रहेंगे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)