मुंबईः आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई का विरोध, 50 से अधिक गिरफ़्तार

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बॉम्बे हाई कोर्ट में मुंबई के आरे कॉलोनी के पेड़ों की कटाई के ख़िलाफ़ सभी याचिकाएं ख़ारिज होने के बाद मुंबई मेट्रो कॉर्पोरेशन ने शुक्रवार से ही यहां पेड़ों को काटना शुरू कर दिया.
इस इलाके में पेड़ों की कटाई को लेकर कर पहले से चल रहा विरोध शुक्रवार को शुरू हुई कटाई के बाद और बड़ा हो गया. शनिवार को यहां बड़ी संख्या में पर्यावरण समर्थक विरोध प्रदर्शन करने उतर गए.

विरोध कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ हाथापाई हुई और इलाक़े में तनाव को देखते हुए तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई और साथ ही पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई.
इस बीच पुलिस ने विरोध कर रहे 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया और अन्य कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया.

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बृहण मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की ट्री अथॉरिटी ने 29 अगस्त 2019 को आरे कॉलोनी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कार शेड बनाने की मंजूरी दी थी. इसके लिए क़रीब 2,185 पेड़ काटे जाने हैं. इसके अलावा 461 पेड़ों को यहां से दूसरी जगहों पर शिफ्ट भी किया जाना है. शहर में किसी भी जगह पर एक साथ 20 से अधिक पेड़ों की कटाई के लिए प्राधिकरण की मंजूरी अनिवार्य है.
मेट्रो 3 परियोजना के तहत प्रस्तावित मेट्रो कारशेड के लिए आरे कॉलोनी के दक्षिणी भाग में 33 हेक्टेयर ज़मीन का इस्तेमाल किया जाना है.

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मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कार शेड बनाने की मंजूरी दिए जाने के बाद से ही इसका विरोध हो रहा है. इसे लेकर हाई कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गईं लेकिन कोर्ट ने सभी याचिकाएं ख़ारिज कर दीं.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को आरे कॉलोनी को जंगल नहीं मानते हुए बीएमसी से यहां के 2,600 से अधिक पेड़ों की कटाई की मंजूरी के फ़ैसले को रद्द करने से इनकार कर दिया. इसके बाद पेड़ों की कटाई का काम शुरू हुआ है.

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दिल्ली मेट्रो के लिए भी काटे गए थे पेड़ः जावड़ेकर
उधर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर कहा कि "बॉम्बे हाई कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि यह जंगल नहीं है."
उन्होंने कहा, "जब दिल्ली में पहले मेट्रो स्टेशन बना तो 20-25 पेड़ काटे जाने की ज़रूरत थी. तब भी लोगों ने विरोध किया था, लेकिन काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए गए. दिल्ली में कुल 271 मेट्रो स्टेशन बने, साथ ही जंगल भी बढ़ा और 30 लाख लोगों की पर्यावरण पूरक सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था हुई. यही मंत्र है, विकास भी और पर्यावरण की रक्षा भी, दोनों साथ-साथ."

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विरोध करने वालों में शिवसेना सबसे आगे
पेड़ों की कटाई का विरोध करने में आम जनता, पर्यावरण समर्थक से लेकर बॉलीवुड के कई सितारे भी आगे आए हैं. लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को खुद अपनी सहयोगी शिवसेना से सबसे बड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के विरोध में उतर आए हैं.
उद्धव ने यह कहते हुए पेड़ों की कटाई का विरोध किया कि भारी विरोध के कारण मेट्रो कारशेड का हश्र नाणार ग्रीन रिफायनरी जैसा ही होगा. उन्होंने वादा किया कि अगर सत्ता में दोबारा वापसी की तो इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा, "मेरे लिए आरे फिलहास सबसे बड़ा मुद्दा है. जो कुछ आज हो रहा है, जो कल हुआ और जो भविष्य में होगा मैं समूची स्थिति की विस्तृत सूचना लूंगा और मजबूती से इस मुद्दे पर सीधे बोलूंगा. आने वाली सरकार हमारी होगी और जैसे ही हम एक बार फिर सत्ता में आते हैं हम आरे के जंगलों के हत्यारों से हर संभव तरीके से निपटेंगे."
उद्धव के बेटे और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. आदित्य ने कहा कि केंद्र सरकार को अगर आरे कॉलोनी के जंगल की चिंता नहीं है तो उन्हें पर्यावरण बचाने को लेकर भी नहीं बोलना चाहिए.
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आदित्य ठाकरे ने ट्वीट किया, "पेड़ों को जिस तेज़ी से काटा गया, उसे देखते हुए मुंबई मेट्रो के अधिकारियों को पीओके में क्यों नहीं तैनात किया जाना चाहिए? उन्हें पेड़ों को नष्ट करने की जगह आतंकवादी अड्डों को नष्ट करने भेज देना चाहिए."
उन्होंने ट्वीट किया, "कई पर्यावरणविद और यहां तक कि आस पास के कई स्थानीय शिवसेना कार्यकर्ताओं ने इसे रोकने की कोशिश की. लेकिन पुलिस की भारी तैनाती के बीच जिस तरह से इन जंगलों की कटाई हो रही है, उससे मुंबईमेट्रो3 वो सब कुछ नष्ट कर रहा है जिसे भारत ने पर्यावरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र में कहा था."
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बॉलीवुड से भी विरोध के स्वर
ठाकरे से पहले कांग्रेस, एनसीपी और एमएनएस समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और फ़िल्मी जगत की कई जानी मानी हस्तियों ने भी इसका विरोध किया है.
बॉलीवुड अभिनेत्री और कांग्रेस की टिकट पर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ चुकी उर्मिला मातोंडकर ने पेड़ों की कटाई को निराशाजनक बताया. उन्होंने ट्वीट किया कि पेड़ों की कटाई रात में ही शुरू करने से यह स्पष्ट होता है कि उन्हें भी पता है कि यह भयानक ग़लती है.
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अभिनेत्री दीया मिर्जा ने भी इस बारे में ट्वीट कर लिखा है, "नोटिस अदालत की अनुमति के 15 दिन बाद तक होना चाहिए. नोटिस को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है."
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पर्यावरण कार्यकर्ता ज़ोरू भठेना ने आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड के निर्माण के लिए 2,646 पेड़ों को काटने के मुंबई महानगरपालिका के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी थी.
कार्यकर्ताओं का दावा है कि याचिका निरस्त होने के कुछ ही घंटों के भीतर 300 से ज़्यादा पेड़ों को गिरा दिया गया.

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इलाके में रहने वाले एक कार्यकर्ता, प्रकाश भोईर ने बीबीसी को बताया, "रात लगभग 9:30 बजे, प्रशासन अंदर आया, उन्होंने कारशेड स्थल पर पेड़ों को काटना शुरू कर दिया."
यहाँ के स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी इस कारशेड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं.
उन्होंने आशंका जताई है कि इस कार शेड से इलाक़े की जैव-विविधता नष्ट होगी और इलाक़े में और निर्माण के लिए ज़मीन पर क़ब्ज़े का रास्ता खुलेगा.
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि अदालत की अनुमति के बाद पेड़ को काटने के लिए पंद्रह दिनों का समय दिया जाना चाहिए.
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हालाँकि मुंबई मेट्रो के प्रबंध निदेशक अश्विनी भिडे ने ट्वीट कर इसका जवाब देते हुए लिखा है, "अदालत की अनुमति के बाद, झूठी जानकारी फैलाई जा रही है कि पेड़ों को काटने के लिए 15 दिन का नोटिस देना होगा. इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. "
मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है और इस इलाक़े में लोकल ट्रेन की यात्रा के दौरान हर दिन 10 लोगों की मौत होती है.
मुंबई मेट्रो के एक प्रवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने अदालत को बताया कि इस परियोजना के पूरा होने से इस स्थिति पर नियंत्रण पाई जा सकेगी.
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