क्या कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का लाभ आम लोगों को मिलेगा?

निर्मला सीतारमण

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    • Author, जगदीप चीमा
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी बिज़नेस संवाददाता

भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में भारी कटौती की घोषणा करते हुए इसे 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत कर दिया है. पहले भारतीय कंपनियों को 30 फ़ीसदी टैक्स के अलावा सरचार्ज देना पड़ता था जबकि विदेशी कंपनियों को 40 फ़ीसदी टैक्स देना पड़ता था.

हालांकि ये नई दर सिर्फ़ उन्हीं कंपनियों के लिए लागू होगा जो किसी तरह के प्रोत्साहन या लाभ का दावा नहीं करती हैं.

हालांकि प्रोत्साहन या छूट पाने वाली घरेलू कंपनियां के लिए टैक्स दरों में 35% से 25% की कटौती होगी.

सैद्धांतिक रूप से कम कॉरपोरेट टैक्स के कारण औसत भारतीय उपभोक्ता को फ़ायदा मिलना चाहिए. सरकार को उम्मीद होगी कि कंपनियां अपने वस्तुओं और सेवाओं को सस्ती कर अपने बचत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं के साथ साझा करेंगी.

सरकार मानती है कि इस कटौती से टैक्स राजस्व में 20.5 अरब डॉलर कमी आएगी लेकिन साथ ही वो ये भी मानती हैं कि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ये ज़रूरी है.

ये क़दम ऐसे समय उठाए गए हैं जब वित्तीय जगत के कई लोग भारत सरकार के टैक्स में कटौती की मांग करते रहे हैं.

शुक्रवार शाम गोवा में जीएसटी काउंसिल की बैठक होने वाली है और कई व्यापारिक संस्थान टैक्स में कटौती की और उम्मीद लगाए हुए थे.

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'साहसिक क़दम'

मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी प्रोत्साहन दिया गया है. निर्मला सीतारण ने घोषणा की है कि वे मैन्युफ़ैक्चरिंग कंपनियां जो एक अक्तूबर 2019 के बाद पंजीकृत हुई हैं और मार्च 2023 से पहले अपना उत्पादन शुरू कर देती हैं उनके लिए कॉरपोरेट टैक्स को 25% से 15% कर दिया गया है.

भारत के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार कहते हैं, "सभी क्षेत्रों में कॉरपोरेट टैक्स में भारी कमी पिछले 28 सालों में सबसे साहसिक सुधार का क़दम है! टैक्स में इस तरह की कटौती उत्पादों की क़ीमतों में कमी लाएगी."

"इसके अलावा, भारत में नई मैन्युफ़ैक्चरिंग इकाईयों को लगाने के लिए प्रोत्साहन देने का क़दम, उन विदेशी कंपनियों के लिए बहुत सही समय पर उठाया गया है जो निवेश के लिए विश्व में बेहतर अवसर की तलाश में हैं."

वो कहते हैं, "इस क़दम से भारत प्रभावी रूप से विश्व सप्लाई चेन के साथ जुड़ सकता है और इससे मेक इन इंडिया अभियान को भी ताक़त मिल सकती है."

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अकाउंटिंग की मल्टिनेशनल कंपनी अर्न्सट एंड यंग के पार्टनर परेश पारेख कहते हैं, "ये बहुत बड़ा क़दम है, अमरीका, ब्रिटेन, सिंगापुर आदि की तरह ही कॉरपोरेट टैक्स में कमी के वैश्विक ट्रेंड के अनुसार ये है. इसके साथ ही ये भारत में मैन्युफ़ैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने की भारत सरकार की नीति के अनुकूल है और ऐसी स्थिति का फ़ायदा उठाने के लिए सही समय पर ये क़दम उठाया गया है जहां अमरीकी कंपनियां चीन के साथ ट्रेड वॉर के कारण कहीं और जगह तलाश रही हैं."

अर्थव्यवस्था

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सरकार से और क़दम उठाने की मांग

इस अचानक कटौती ने निवेशकों और बाज़ार के दिग्गजों का ध्यान आकर्षित किया है जिन्होंने शेयर बाज़ार को 5% ऊपर लाकर इस समाचार का स्वागत किया.

पिछले सप्ताह के आख़िर में सऊदी अरब की दो बड़ी तेल रिफ़ाइनरी पर हमले के कारण भारत के शेयर बाज़ार का ये सप्ताह शुरू में भारी नुकसान के साथ मुश्किलों भरा रहा है.

बजाज कैपिटल के सीईओ राहुल पारिख कहते हैं, "विकास और शेयर बाज़ार के भरोसे को पुख़्ता करने के लिए वित्त मंत्री द्वारा 20.5 अरब डॉलर का राजस्व प्रोत्साहन देना एक बड़ा और एक साहसिक क़दम है. अप्रैल 2019 से लागू होने वाली टैक्स में ये कटौती भारतीय उद्योगों को उन कंपनियों से प्रतियोगिता करने में सक्षम बनाएगा जहां टैक्स की दरें बहुत कम हैं जैसे अमरीका में. साथ ही यह अपने एशियाई समकक्षों के बराबर ला खड़ा करेगा. एक तरफ़ जहां शेयर बाज़ार के लिए ये सकारात्मक है, वहीं भारी राजस्व घाटे के डर से ये कटौती बांड मुनाफ़े पर नकारात्मक असर डालेगी."

हालांकि अमेरिकन एंटरप्राइज़ इंस्टीट्यूट के सदानंद धुमे चाहते हैं कि सरकार और क़दम उठाए.

उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "उद्योग जगत को भरोसा देने के लिए भारत की ओर से ये बड़ा क़दम उठाया गया है कि मोदी सरकार उनके हितों के ख़िलाफ़ नहीं है. लेकिन निवेश को लेकर जो माहौल बना है उसमें जान नहीं फूंकने लिए यही पर्याप्त नहीं है."

अर्थव्यवस्था

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क्या ये सही समय था?

उनके अनुसार, "सरकार को अन्य उपाय करने की ज़रूरत होगी ताकि ये दिखाया जा सके कि एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था को भंवर से बाहर निकाला जा सकता है. जैसे कि घाटे वाली सरकारी कंपनियों का निजीकरण करना, बहुत ज़्यादा जटिल वैल्यू एडेड टैक्स को सरल बनाना और श्रम क़ानूनों में सुधार करना."

भारत की विकास दर छह सालों के सबसे निम्नतर स्तर पर है और सरकार ने अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए कई क़दम उठाए हैं.

अभी तक इस साल भारत के केंद्रीय बैंक ने चार बार व्याज दरों में कटौती की है और मौजूदा दरें क़रीब एक दशक के सबसे निम्नतम स्तर पर हैं.

देश की अर्थव्यवस्था घरेलू उपभोग पर निर्भर रही है लेकिन सार्वजनिक ख़र्च में काफ़ी तेज़ गिरावट देखने को मिली है.

वित्त मंत्री ये उम्मीद कर रही होंगी कि कॉरपोरेट टैक्स में ताज़ा कटौती अर्थव्यवस्था में सही समय पर प्रोत्साहन देगा, जिसकी उसे बहुत ज़रूरत थी.

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