यशवंत सिन्हा: व्हील चेयर पर बैठाकर श्रीनगर एयरपोर्ट से दिल्ली वापस भेजा

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भारत सरकार लगातार दावा कर रही है कि भारत प्रशासित कश्मीर में सबकुछ सामान्य है.
लेकिन मंगलवार को जब भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कश्मीर में जाकर कुछ लोगों से मिलने का कार्यक्रम बनाया तो उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट से ही ज़बरन वापस दिल्ली भेज दिया गया.
दिल्ली लौटने पर बीबीसी संवाददाता संदीप राय ने यशवंत सिन्हा से बातचीत की. बातचीत में यशवंत सिन्हा ने अपने साथ हुए घटनाक्रम का ब्योरा दिया. यशवंत सिन्हा के शब्दों में पढ़िए उनके अनुभव.
साल 2016 में हम लोगों ने जम्मू कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए चिंतित नागरिकों का एक समूह बनाया था.
हम लोग पांच छह बार गए हैं, अब तक किसी ने भी हमें रोका नहीं है.
इस बार भी हमने तय किया कि भारत सरकार दावा कर रही है कि वहां सबकुछ सामान्य है तो 44 दिन बीत गए हैं, चलकर देखना चाहिए.
हमने 36 घंटे का एक कार्यक्रम बनाया कि आज जाएंगे और कल शाम तक कुछ मित्रों से मिलकर लौट आएंगे.
वज़ाहत हबीबुल्ला पहले जा चुके थे. इसके बाद हम चार लोग सुशेवा भार्वे, भारत भूषण, एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) कपिल काक और मैं, पौने 12 बजे फ्लाइट से श्रीनगर पहुंचे.
वहां हमें डिप्टी कमिश्नर, बडगाम मिले. उन्होंने कहा कि बाकी लोगों को कश्मीर जाने की इजाजत है लेकिन आप वापस लौट जाइए.
हमने उनसे पूछा किस क़ानून के तहत, तब वे ढाई घंटों के लिए ग़ायब हो गए. उसके बाद वे आए और बोले धारा 144 के तहत. कहा कि मेरी वजह से शहर में शांति के लिए ख़तरा है.
तब मैंने कहा कि आपने अपने लिखित आदेश में नहीं कहा है कि मैं दिल्ली जाऊं तो मैं एयरपोर्ट पर रहूंगा. तब उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट बंद हो जाएगा, ये-वो. बहस चलती रही.
इसके दो-तीन घंटे बाद वहां के एसपी आए लिखित आदेश लेकर कि आपको दिल्ली जाना होगा. मैंने कहा कि आपका आदेश क़ानून सम्मत, नैतिकता के दृष्टिकोण से भी सही नहीं है, लिहाजा मैं इसे नहीं मानूंगा, आपका जो क़ानून है उसके मुताबिक मेरे ख़िलाफ़ कार्रवाई करिए.
तब उन्होंने कहा कि चलिए आपको बाहर ले चलते हैं. मैंने कहा कि कहां, तो उन्होंने कहा गाड़ी में बिठाते हैं तो आपको पता चल जाएगा.
मेरे घुटने में चोट है तो मैं व्हील चेयर पर था. वो व्हील चेयर पर बैठाकर ले जाने लगे. एक जगह एग्जिट था और दूसरी तरफ बोर्डिंग गेट. उन्होंने वहां से उसे बोर्डिंग गेट की तरफ मोड़ दिया. अंतिम फ्लाइट 5.45 वाली निकलने वाली थी. मैंने खड़ा होकर विरोध करने की कोशिश की, तो पांच छह लोगों ने मुझे दबाकर व्हील चेयर पर बिठा दिया और कहा कि आपको हमारे आदेश का पालन करना होगा, वहां एयरक्राफ्ट लगा है वहां तक लेकर जाएंगे.
दबाकर मुझे वहां तक ले गए. लिफ्ट काम नहीं कर रहा थी तो एस्कलेटर में पकड़कर खड़े रहे. फिर जबरदस्ती हमको हवाई जहाज़ में बिठा दिया. इसके बाद मैं दिल्ली आ गया.

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मैंने कश्मीरी अधिकारियों से कहा कि सबकुछ ठीक है, हर कोई खुश है यहां. आप लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सब खुश हैं तो मुझे लोगों से मिलने दीजिए. रोक क्यों रहे हैं. हम लोगों के बीच इस चर्चा को आगे लेकर जाएंगे कि सरकार का दावा झूठा है.
मैं जब कश्मीर एयरपोर्ट पर उतरा तो वहां जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग का दफ्तर था, जिनकी छाती पर सांप लोट रहा था. जब पूछा कि कोई आता है तो लोगों ने बताया कि कोई नहीं आता. टूरिज्म और टैक्सी के कई दफ्तर थे, सब बंद थे.
जब वहां पहुंचे तो मोबाइल फ़ोन भी काम नहीं कर रहा था. उन्होंने दावा किया कि लैंडलाइन काम कर रही हैं एक दो जगह और कहीं बात नहीं हो पाई. इंटरनेट काम नहीं कर रहा है, मोबाइल फ़ोन काम नहीं कर रहा है, लैंडलाइन भी बंद है.
दरअसल केंद्र सरकार का फ़ैसला जबरन उठाया गया क़दम है. इसे घाटी सहित कश्मीर में कोई पसंद नहीं कर रहा है. सरकार के क़दम से वहां का अवाम हमसे और भी दूर हुआ है.
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