आख़िर पुल से क्यों उतारा गया दलित का शव?

वीडियो ग्रैब

इमेज स्रोत, Youtube

    • Author, मुरलीधरन कासि विश्वनाथन
    • पदनाम, बीबीसी तमिल

सोशल मीडिया पर पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कहा गया कि एक दलित व्यक्ति के शव को अंतिम संस्कार के लिए नदी पर बने एक पुल से रस्सियों के सहारे नीचे उतारा गया. मीडिया में इसे जातिगत भेदभाव के एक मामले के तौर पर पेश किया गया.

लेकिन बीबीसी ने इस घटना की तह में जाकर पता लगाया कि क्या वाक़ई ऐसा हुआ था और क्या ये जाति के नाम पर भेदभाव का मामला था?

ये मामला तमिलनाडु के वेल्लोर ज़िले के नारायणपुरम गाँव का है जहां कुप्पन (एससी) नाम के एक बुज़ुर्ग के शव को कथित रूप से अंतिम संस्कार के लिए निजी ज़मीन से ले जाए जाने का विरोध किया गया.

बीबीसी तमिल की टीम पड़ताल के लिए नारायणपुरम गाँव पहुँची.

वेल्लोर ज़िले से 20 किलोमीटर दूर तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश की सीमा पर स्थित इस गांव में आदि द्रविणाड़ दलित जाति से जुड़े चालीस परिवारों के 200 लोग रहते हैं.

कुप्पन

कौन थे कुप्पन?

55 साल के कुप्पन कुछ साल पहले तक नारायणपुरम में रहते थे. अपनी शादी के कुछ सालों बाद वह नारायणपुरम छोड़कर अपनी पत्नी के गांव पुथुकोविल में रहने चले गए. आगे चलकर कुप्पन को यहीं काम मिल गया. इसके बाद वे अपनी पत्नी, दो बेटों और एक बेटी के साथ इसी गांव में रहने लगे.

बीती 16 अगस्त की रात साढ़े दस बजे जब कुप्पन अपने काम से वापस आ रहे थे तो एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई.

इसके बाद वानियामपडी सरकारी अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम किया गया जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को घरवालों के सुपुर्द कर दिया गया.

आम तौर पर इस समुदाय में मृतकों को दफ़नाया जाता है मगर चूँकि शव का पोस्टमॉर्टम हुआ था इसलिए घरवालों ने चिता जलाकर अंत्येष्टि करने का फ़ैसला किया.

वीडियो कैप्शन, वेल्लोर में दलित का शव लटकाए जाने का सच

अंतिम संस्कार का फ़ैसला

घरवाले कुप्पन के अंतिम संस्कार के लिए नारायणपुरम गए जहाँ आदि द्रविणाड़ समुदाय के लिए एक क़ब्रगाह बनी हुई है.

लेकिन क़ब्रगाह में अंत्येष्टि के लिए पर्याप्त इंतज़ाम नहीं थे जिसके बाद उनके परिवार ने कुप्पन का अंतिम संस्कार क़ब्रगाह से कुछ किलोमीटर दूर एक नदी के पास करने का फ़ैसला किया.

लेकिन नदी के दोनों किनारे दूसरे लोगों के पट्टे की ज़मीनें हैं जिनके निजी ज़मीन होने की वजह से उस रास्ते नदी तक जाना मुमकिन नहीं हो पा रहा था.

ऐसे में कुप्पन के परिवारवालों ने अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियों और दूसरी चीज़ों को पुल से नीचे गिराया.

ये देखकर खेत में मौजूद एक महिला गार्ड गीता ने पूछा कि ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं.

गीता बताती हैं, "मैंने इनसे पूछा कि ये लोग नदी किनारे लकड़ी क्यों गिरा रहे हैं. इस पर इन लोगों ने कहा कि वे अंतिम संस्कार करने जा रहे हैं. मेरे पति ने कहा कि इन लोगों को वहाँ ऐसा नहीं करना चाहिए. और ज़मीन के मालिक को बुला लिया. इसके बाद ज़मीन मालिक ने क्या कहा, वो मुझे नहीं मालूम."

श्मशान भूमि

गीता के पति नारायणन ने बीबीसी तमिल से इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया.

कुप्पन के 27 वर्षीय बेटे कन्नडसन कहते हैं, "चूंकि इन्होंने विरोध किया तो हमने रस्सियों के सहारे शव को नीचे उतारा और इसके बाद अंतिम संस्कार किया."

इस दौरान कुप्पन के कुछ रिश्तेदारों ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर अपने जानने वालों को भेजा जिससे धीरे-धीरे ये वीडियो वायरल हो गया.

हालाँकि ज़मीन के मालिक ने इसके बाद कुप्पन के रिश्तेदारों से संपर्क करके कहा कि अगर उन्हें इस मामले की जानकारी होती तो वे उन्हें अपनी ज़मीन से जाने देते.

क्या कहते हैं ज़मीन मालिक?

कुप्पन का अंतिम संस्कार मुन्नार के पास हुआ जिस ज़मीन पर हुआ उसका नियंत्रण सुंदरम नाम के व्यक्ति के हाथों में है. ये एक खेत है जिसके एक ओर मंदिर और मंदिर में आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की जगह है.

सिक्योरिटी गार्ड नारायणन के बात करने से इनकार करने पर ज़मीन मालिक के दामाद देवकुमारन ने बीबीसी तमिल से बात की.

उन्होंने कहा, "हमारी ज़मीन की रखवाली में लगे लोगों ने इन लोगों को इजाज़त नहीं दी. अगर हमसे संपर्क किया जाता तो हम इसकी इजाज़त दे देते."

श्मशान भूमि

कई साल पहले आदि द्राविणाड़र समुदाय के एक शख़्स का अंतिम संस्कार भी इसी तरह किया गया था. लेकिन वह अंतिम संस्कार कहां हुआ था, और क्या इसमें कोई विवाद हुआ था. इस पर किसी की एक राय नहीं है.

क्या कहती है सरकार?

सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल होने के बाद वानियाम्पदी तहसीलदार ने बीते गुरुवार मामले की समीक्षा की.

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक़, ''नारायणपुरम पंचायत क्षेत्र में 3.16 एकड़ ज़मीन सरकार के हिस्से में आती है. 21780 वर्ग फीट ज़मीन क़ब्रगाह के लिए दी गई थी. जल्द ही इस जगह पर अंतिम संस्कार के लिए उचित व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी."

मीडिया में ये वीडियो वायरल होने के बाद भारत सरकार के एडीशनल सॉलिसिटर जनरल कार्तिकेयन ने ये मामला जज मनि कुमार और सुब्रमण्यम प्रसाद के संज्ञान में लाया. इसके बाद वेल्लोर कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए वेल्लोर के ज़िला प्रशासन को अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है."

जब बीबीसी तमिल ने इस क्षेत्र की उप-ज़िलाधिकारी प्रियंका से बात की तो उन्होंने कहा, "शनिवार को ये मामला सामने आया था. हम सभी लोग दफ़्तर में थे. लेकिन किसी ने भी न तो मुझसे और न ही पुलिस को सूचित किया. जब हमने मामले की तहक़ीक़ात की तो पट्टे वाली ज़मीन के मालिकों ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई इजाज़त देने से इनकार नहीं किया है. वहीं आदि द्राविणाड़ समुदाय कहता है कि उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली. ऐसे में किसी भी तरह की क़ानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकी. अब क़ब्रगाह के लिए एक ज़मीन आवंटित कर दी गई है.''

जब कुप्पन के परिवारवालों से पूछा गया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया तो उन्होंने कहा कि वे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में व्यस्त थे, ऐसे में उन्होंने ख़ुद ही शव को पुल से उतारने का फ़ैसला किया.

आदि द्राविणाड़ समुदाय की ये भी मांग है कि अंतिम संस्कार की जगह में बदलाव किया जाए क्योंकि उन्हें वन्नियार समुदाय से होकर श्मशान घाट नहीं पहुंचना पड़े.

श्मशान भूमि

प्रियंका बताती हैं, "इस तरह के मामलों के बचाव के लिए इन्हें एक नए श्मशान के लिए ज़मीन दी गई है. वन्नियार समुदाय के लोग रोड के दोनों ओर रहते हैं और ये एक लंबी रोड है. इस रोड से सभी लोग जाते रहते हैं. ऐसे में अंतिम यात्रा के लिए इस रोड से होकर जाने में कोई दिक़्क़त नहीं होगी. इन लोगों को अपने घर के पास एक श्मशान भूमि चाहिए थी. लेकिन वहां पर सरकार के पास कोई ज़मीन नहीं है."

आदि द्राविणाड़ समुदाय को आने वाले समय में ऐसी स्थिति पैदा होने पर पुलिस और ज़िला प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया है.

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