पांच दिन कर्फ़्यू के बाद अब जम्मू और कश्मीर के क्या हैं हालात

कश्मीर

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भारत सरकार की ओर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने से पहले सोमवार को जम्मू में लगाई गई धारा 144 को हटा दिया गया है.

उधर भारत प्रशासित कश्मीर में पांचवें दिन भी कर्फ़्यू जारी रहा और इसे कब हटाया जाएगा, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है.

जम्मू की डीएम सुषमा चौहान की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जम्मू ज़िले की शहरी सीमाओं के तहत पांच अगस्त को लगाई गई धारा 144 को वापस लिया जाता है.

आगे कहा गया है कि अब तक बंद रहे स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान 10 अगस्त यानी शनिवार से सामान्य रूप से खुल सकते हैं.

सरकारी आदेश की प्रति

घाटी में कर्फ़्यू जारी

यह व्यवस्था सिर्फ़ जम्मू के लिए ही है. उधर कश्मीर घाटी में कई जगहों से झड़पों और पथराव की जानकारी मिली है.

श्रीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता आमिर पीरज़ादा ने गुरुवार और शुक्रवार को अस्पतालों का दौरा किया, जहां उन्हें पता चला कि पैलेट गन और आंसू गैस से ज़ख्मी हुए कुछ लोगों को भर्ती करवाया गया है.

इन्हें कश्मीर के कुछ हिस्सों में पथराव और सुरक्षाबलों से झड़पों की कुछ घटनाओं के बाद यहां लाया गया था.

पीरज़ादा ने बताया, "कल हम शेर-ए-कश्मीर अस्पताल गए जहां हमें पता चला कि यहां पैलेट गन्स से घायल क़रीब 10 लोगों को लाया गया था जिनमें से तीन की हालत गंभीर है. इसके बाद हम जेबीसी अस्पताल बेमिना गए थे जहां पर हमें यह पता चला कि पैलेट गन्स से घायल छह लोगों को लाया गया था. एक रिपोर्ट से हमें यह भी पता चला कि बेमिना से एक बस कुछ लोगों को लेकर जा रही थी उस पर पथराव हुआ था और वह पलट गई."

"इस घटना में तीन लोगों के मौत होने और 27 से अधिक लोगों के घायल होने की ख़बर है."

आमिर पीरज़ादा ने आज जीएमसी अस्पताल का दौरा किया. यह आंखों का अस्पताल है, यहां पहले भी पैलेट गन्स से घायल लोगों को लाया जाता रहा है.

उन्होंने बताया कि कि जीएमसी अस्पताल में अब तक 26 ऐसे लोगों को लाया गया है जो पैलेट गन्स से मामूली रूप से घायल थे.

भारत प्रशासित कश्मीर में पाबंदियां वैसे ही बरक़रार है. सड़कों पर सुरक्षाबल मजबूर लोगों को आने-जाने दे रहे हैं लेकिन संचार के सभी साधन बंद हैं.

कारगिल की स्थिति

लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है. लद्दाख का कारगिल एक मुस्लिम बहुल इलाक़ा है. कारगिल में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने शुक्रवार को कारगिल का दौरा किया और पाया कि वहां का माहौल तनावपूर्ण है.

जु़बैर अहमद बताते हैं कि लोग कारगिल को जम्मू-कश्मीर से अलग कर लद्दाख से जोड़ देने से ख़ुश नहीं हैं. लोग इसलिए भी नाराज़ हैं क्योंकि लद्दाख को विधानसभा नहीं दी गई है.

कारगिल में बीते एक-दो दिनों में पुलिस और आम लोगों के बीच मुठभेड़ भी हुई है. पुलिस के ऊपर पथराव भी किया गया है.

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