जामयांग सेरिंग नामग्याल- लद्दाख का वो सांसद जिसकी मोदी और शाह ने की तारीफ़

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जामयांग सेरिंग नामग्याल- यह वह नाम है जिसकी चर्चा मंगलवार को संसद से लेकर सोशल मीडिया तक होती रही.
नामग्याल लद्दाख से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं. 34 साल के युवा सांसद भौगोलिक आधार पर भारत के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.
पहली बार चुनकर संसद में पहुंचे जामयांग सेरिंग नामग्याल ने अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा के दौरान इस अंदाज़ में अपनी बात रखी कि गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक उनके मुरीद हो गए.
पीएम मोदी ने नामग्याल के भाषण को ट्वीट किया है और लिखा है- लद्दाख के भाई-बहनों की अपेक्षाओं को उन्होंने सामने रखा है, ज़रूर सुनें.
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अपने चुनाव क्षेत्र को जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का स्वागत करते हुए नामग्याल ने कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ़्रेंस पर जमकर निशाना साधा.
उन्होंने कहा कि इन तीनों पार्टियों ने न सिर्फ़ लद्दाख बल्कि जम्मू और कश्मीर के लोगों के हितों को भी नज़रअंदाज़ किया है.
भूरे रंग के लद्दाख के पारंपरिक परिधान में आए नामग्याल जब बोलने के लिए उठे तो आख़िर तक उन्होंने सभी को बांधे रखा. कभी वह तीखे अंदाज़ में किसी पर निशाना साधते तो कभी कविता के अंदाज़ में कुछ कहने लगते.
इस बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद मेज़ थपथपाते रहे और विपक्षी सांसद भी मंद-मंद मुस्कुराते दिखे.

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तीखा भाषण
छात्र राजनीति में सक्रिय रह चुके नामग्याल का अंदाज़ भले ही थोड़ा चुटीला हो मगर सरकार की ओर से पेश किए गए प्रस्तावों के पक्ष में उन्होंने पूरी गंभीरता से बात कही.
नामग्याल ने कहा कि असली कश्मीर भारत के साथ रहना चाहता है. उन्होंने पीडीपी और नेशनल पर कुछ यूं निशाना, "इस फ़ैसले पर नेशनल कॉन्फ़्रेंस और पीडीपी के विरोध पर ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि उन्होंने जम्मू कश्मीर को अपने खानदानी क़ारोबार की तरह इस्तेमाल किया है. इस फ़ैसले से सिर्फ़ दो परिवारों की रोज़ी-रोटी बंद होगी."
उनसे कुछ देर पहले अनंतनाग से नेशनल कॉन्फ़्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी ने लद्दाख का भी ज़िक्र किया था और कहा कि लद्दाख को यूटी बनाए जाने से कारगिल के लोग ख़ुश नहीं हैं.
इसके जवाब में नामग्याल ने कहा, "आज जो यहां लद्दाख का ज़िक्र कर रहे हैं, उन्होंने कभी लद्दाख को नहीं अपनाया. कुछ कह रहे हैं कि कारगिल में इसे लेकर ख़ुशी नहीं है. मैं कारगिल से आता हूं, वहां के लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए वोट दिया है क्योंकि यह शुरू से हमारा मुद्दा रहा है."

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इसके बाद नामग्याल की सूई कांग्रेस की ओर घूम गई. उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने 2011 में कश्मीर और जम्मू को सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ दीं. जम्मू में तो हमने लड़कर ली, तब मैं वहां छात्र राजनीति में था. मगर लद्दाख में एक भी हायर एजुकेशन का संस्थान नहीं दिया कांग्रेस ने."
उन्होंने जम्मू कश्मीर के दलों पर लद्दाख के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए पूछा -जम्मू में और कश्मीर में लद्दाख के कितने सरकारी मुलाज़िम हैं?

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जब किया तिरंगे का गुणगान
उस समय सदन में ख़ूब तालियां बजीं जब जामयांग सेरिंग ने कहा, "कुछ लोग चिंतित हैं कि उनका झंडा चला गया. उन्हें बता दूं कि लद्दाख के लोगों ने 2011 में ही वह झंडा हटा दिया था. लद्दाख ऑटोनोमस हिल डिवलपमेंट काउन्सिल ने उसी समय प्रस्ताव पारित करके उसे हटा दिया था क्योंकि हम भारत का अटूट अंग बनना चाहते थे."
लद्दाख ऑटोनोमस हिल डिवलपमेंट काउन्सिल के सदस्य रह चुके नामग्याल ने कुछ पंक्तियां पढ़ीं- ''तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी यह पहचान."
अपने भाषण के आख़िर में उन्होंने विपक्षी सांसदों की ओर देखते हुए कहा, "देश के लिए प्यार है तो जताया करो, किसी का इंतज़ार मत करो."
"गर्व से बोलो जय हिंद, अभिमान से कहो भारतीय हैं हम, स्वाभिमान से कहो- भारत माता की जय और वर्तमान में करो इस बिल का समर्थन."

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इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि सदन को नामग्याल जैसे नए सदस्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए. बाद में क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी चर्चा में हिस्सा लेने के दौरान नामग्याल का ज़िक्र किया.
आख़िर में जब गृह मंत्री अमित शाह बोलने के लिए उठे तो उन्होंने युवा सांसद के दिए तर्कों और आरोपों का हवाला देते हुए प्रस्ताव का विरोध कर रहे सांसदों को घेरने की कोशिश की.

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इस बीच तेज़-तर्रार अंदाज़ में दिए गए भाषण को लेकर नामग्याल सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे थे.
बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत कई बीजेपी नेताओं ने उनके भाषण को ट्विटर पर शेयर किया.
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