अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को नहीं सुलझा पाई मध्यस्थता समिति: प्रेस रिव्यू

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अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में मध्यस्थता समिति ने अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट है कि समिति ने विवाद को सुलझा पाने में अपनी असमर्थता जताई है. समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पैनल के सभी सदस्य मसले के हल के लिए सर्वसम्मति पर नहीं पहुंच पाए.
अख़बार लिखता है कि इस तरह मध्यस्थता के लिए दिए गए 155 दिन बेकार हो गई.
इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस खलीफ़ुल्ला, वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर शामिल थे.
अख़बार के मुताबिक़ अब आज यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले की रोज़ सुनवाई पर विचार कर सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई वाली बेंच में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर कर रहे हैं.
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SC का आदेश दरकिनार, जारी हुई NRC लिस्ट
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देते हुए असम सरकार ने एनआरसी की लिस्ट जारी कर दी है, ये लिस्ट 'डिस्ट्रिक्ट वाइज़' है यानी लिस्ट में बताया गया है कि राज्य के किस ज़िले के कितने लोग लिस्ट से बाहर हैं.
असम सरकार ने कहा है कि जो ज़िले बांग्लादेश से सटे हैं उनमें एनआरसी लिस्ट से बाहर होने वाले लोगों की संख्या बाकी ज़िलों में लिस्ट से बाहर होने वालों की संख्या से कम है.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 16 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि असम सरकार सीलबंद लिफ़ाफ़े में हर ज़िले में एनआरसी लिस्ट से बाहर होने वाले लोगों का प्रतिशत बताए. लेकिन राज्य सरकार ने सीलबंद लिफ़ाफ़े के बजाय ये आंकड़े विधानसभा में पेश कर दिए.
अख़बार लिखता है कि संसदीय मामलों के मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने शून्य काल में पूछे गए एक सवाल के जवाब में असम विधानसभा में एक लिखित बयान में ये जानकारी दी.
उन्होंने कहा, ''आंकड़ों के मुताबिक़ अंतिम ड्राफ़्ट में 12.15 फ़ीसदी लोगों के नाम लिस्ट से बाहर हैं.''

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समुद्री रास्ते से अचानक भारत आए मालदीव के पूर्व उप राष्ट्रपति
हिंदुस्तान टाइम्स में ख़बर है कि मालदीव के पूर्व उप राष्ट्रपति अहमद अदीब अब्दुल गफ़ूर बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक ही गुरुवार को समुद्री मार्ग से भारत पहुंच गए.
अख़बार पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखता है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां गफ़ूर से तूतीकोरन में पूछताछ कर रही हैं.
तूतीकोरन के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार गफ़ूर एक जहाज़ पर बैठकर यहां पहुंचे. पुलिस अधिकारी का कहना है कि चूंकि उनके भारत आने की जानकारी पहले से किसी के पास नहीं थी इसलिए उनसे पूछताछ की जा रही है.
पुलिस ये पता करने की कोशिश भी कर रही है क्या जहाज़ को भारत में लंगर डालने की अनुमति थी.
गफ़ूर को जहाज़ से उतरने नहीं दिया गया है और जहाज़ में उनके अलावा चालक दल के नौ सदस्य भी हैं.
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किताब चोर कहलाना सम्मान: आज़म ख़ान
नवभारत टाइम्स में समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान का एक साक्षात्कार छपा है. इस इंटरव्यू में आज़म ख़ान ने कहा है कि उनका लोकसभा चुनाव लड़ना और जीतना सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था इसलिए रामपुर को 'दूसरा कश्मीर' बनाने की कोशिश हो रही है.
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद और किताब चोरी के आरोपों के बारे में पूछने पर आज़म ने कहा, ''अगर किताब चोर हूं तो बहुत बड़े-बड़े लोगों ने किताबें चुराई हैं. किताब चोरी का लंबा इतिहास रहा है. नरेंद्र मोदी को 'चौकीदार चोर है' कहा गया तो वो दोबारा प्रधानमंत्री बन गए. मुझे किताब चोर कहा जा रहा है. इस शब्द को अपने लिए बेहद सम्मान की बात मानता हूं.''
आज़म ने कहा कि उन्होंने किताब चुराकर अगर यूनिवर्सिटी बनाई है तो वो अपने मालिक से दुआ करेंगे कि यह आरोप उनके साथ उनकी क़ब्र में जाए.
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