उन्नाव रेप पीड़िता के चाचा को सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ शिफ़्ट करने का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली शिफ़्ट किए जाने के आदेश देने के एक दिन बाद पीड़िता के चाचा को तिहाड़ जेल शिफ़्ट करने का आदेश दिया है. सुरक्षा कारणों से यह आदेश दिया गया है.

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हालांकि, परिवार की मांग के बाद भी पीड़िता का इलाज लखनऊ में ही किया जाएगा, उन्हें दिल्ली शिफ़्ट नहीं किया जाएगा.

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया, "पीड़िता के परिवार को दिल्ली शिफ़्ट किए जाने के बारे में बताना था और उन्होंने बताया है कि पीड़िता पूरी तरह बेहोश अवस्था में हैं. परिवार ने उन्हें लखनऊ में ही रहने देने के लिए कहा है. परिवार के वकील ने कहा कि उनकी स्थिति बेहतर होने पर शिफ़्ट किया जा सकता है."

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उधर समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ उन्नाव रेप पीड़िता के माखी गाँव स्थिति घर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) पहुंच गई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पीड़िता के परिवार को सीआरपीएफ़ की सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया था.

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गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के परिवार की लिखी चिट्ठी पर सुनवाई करते हुए कहा था कि मामले की सुनवाई रोज़ाना हो और इसे 45 दिनों में पूरा किया जाए.

अभियुक्त विधायक कुलदीप सेंगर पर पांच मामले चल रहे हैं, जिनमें से बलात्कार वाले मामले की ही रोज़ सुनवाई होगी.

अदालत ने सीबीआई से सात दिन के भीतर ट्रक हादसे की जांच पूरी करने को कहा है. हालांकि, सीबीआई ज़रूरत पड़ने पर एक और हफ़्ता ले सकती है.

इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वो शुक्रवार तक पीड़िता को 25 लाख रुपए का मुआवज़ा दे.

सुरक्षा बढ़ाने का आदेश

अदालत ने ये भी कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को सीआरपीएफ़ सुरक्षा मुहैया कराई जाए. अदालत ने पीड़िता के वकील को भी सुरक्षा दिए जाने के आदेश दिए.

उन्नाव मामला

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई को केस की स्टेटस रिपोर्ट के साथ पेश होने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट को भी पेश करने को कहा है.

डॉक्टरों का कहना है कि आईसीयू में रखी गई पीड़िता और उनके वकील को एयरलिफ़्ट करने की ज़रूरत नहीं है.

पीड़िता के परिवार के वकील ने अदालत से मांग की कि वह घायलों को दिल्ली लाए जाने के संबंध में निर्देश चाहते हैं.

न्यायमित्र वी. गिरी ने भरोसा दिलाया कि ज़रूरत पड़ने पर बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली शिफ़्ट कर दिया जाएगा.

जांच की निगरानी कर रहीं महिला सीबीआई आईपीएस अधिकारी संपत मीणा सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थीं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश

इस मामले में अभियुक्त बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. वह पहले पार्टी से निलंबित चल रहे थे.

गुरुवार को ही उत्तर प्रदेश सरकार ने पीड़िता की सुरक्षा में लगे तीन पुलिकर्मियों को निलंबित कर दिया जिनमें से दो महिला पुलिसकर्मी हैं.

दुर्घटना मामले की जांच सात दिनों में करने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि पीड़िता की दुर्घटना मामले की तहक़ीक़ात पूरा करने के लिए कितना समय चाहिए तो उन्होंने कहा, "एक महीना." इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा, "एक महीना? नहीं, 7 दिनों में जांच पूरी करें."

बाद में चीफ़ जस्टिस ने रियायत देते हुए कहा कि किसी भी सूरत में दुर्घटना की जांच के लिए एक पखवाड़े से अधिक समय न लिया जाए.

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इसके साथ ही चीफ़ जस्टिस ने पीड़िता की हालत के बारे में भी पूछा. सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि वो वेंटिलेटर पर हैं.

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अगर एक्सपर्ट डॉक्टरों की मंज़ूरी होगी कि पीड़िता को एयरलिफ़्ट कर दिल्ली लाया जा सकता है तो सुप्रीम कोर्ट उन्हें एम्स में लाने का आदेश जारी कर सकता है.

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सुप्रीम कोर्ट से रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती के मुताबिक़ चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने उन्नाव रेप केस में जांच की वर्तमान स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है.

चीफ़ जस्टिस की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, "हम चाहते हैं कि सीबीआई का एक ज़िम्मेदार अधिकारी प्रोगेस रिपोर्ट के साथ यहां आए और अब तक जो सामने आया है उसे बताएँ."

चीफ़ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उन्नाव रेप केस और सड़क दुर्घटना मामले में सीबीआई निदेशक से बात करने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ज़रूरी हो तो इस मामले में चेंबर हियरिंग हो सकती है.

शीर्ष अदालत चीफ़ जस्टिस के नाम उन्नाव रेप केस पीड़िता के परिवार की लिखी चिट्ठी को संज्ञान लेते हुए यह सुनवाई कर रहा है.

एक दिन पहले ही चीफ़ जस्टिस ने पीड़ित परिवार की तरफ से लिखी गई चिट्ठी नहीं मिलने पर अपनी नाराज़गी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से पूछा था कि इस मामले में शीर्ष अदालत के नाम लिखी गई चिट्ठी उनके सामने अब तक क्यों नहीं पेश की गई.

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई

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चीफ़ जस्टिस को चिट्ठी की ख़बर मीडिया से मिली

इस ख़बर को मीडिया में पढ़ने के बाद बुधवार को चीफ़ जस्टिस ने खुद कहा था कि वो इस विनाशकारी माहौल में कुछ रचनात्मक करने की कोशिश करेंगे.

रविवार को रायबरेली जाते वक़्त उन्नाव रेप पीड़िता की कार को एक ट्रक ने टक्कर मारी थी. जिसमें पीड़िता के दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी जबकि कार में सवार उनके वकील और पीड़िता की हालत गंभीर बताई गई है.

रविवार को हुए कार हादसे की जांच सीबीआई को सौंप दी गई जिसके बाद सीबीआई ने मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर समेत 10 लोगों पर हत्या का मामला दर्ज किया.

पीड़िता के परिवार ने कुछ दिन पहले ही चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई को चिट्ठी लिख कर उनके जान को ख़तरे की आशंका जताई थी.

चीफ़ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के साथ साथ पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी थी.

पीड़ित परिवार ने चीफ़ जस्टिस को क्या लिखा?

12 जुलाई 2019 को लिखी यह चिट्ठी 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. इसमें पीड़िता के परिवार ने उन्हें बार-बार दी जा रही धमकी के बारे में लिखा है.

चिट्ठी के मुताबिक पीड़ित परिवार को सेंगर के मामले में सुलह कराने को कहा गया था. ऐसा नहीं करने की स्थिति में फर्जी मुक़दमा लगाकर जेल में सड़ा कर मारने की धमकी भी दी गई थी.

वीडियो कैप्शन, उन्नाव रेप केस: पीड़िता की बहन लगाए गंभीर आरोप

उन्नाव रेप केस में अब तक क्या-क्या हुआ?

4 जून 2017: पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर के घर रेप का आरोप लगाया.

11 जून 2017: पीड़िता लापता हुई, गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज़.

22 जून 2017: पीड़िता की कोर्ट में पेशी, बयान दर्ज़.

04 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता आर्म्स एक्ट में गिरफ़्तार.

09 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत.

11 अप्रैल 2018: यूपी सरकार ने केस सीबीआई को सौंपा.

13 अप्रैल 2018: विधायक गिरफ़्तार, सीबीआई ने की पूछताछ.

11 जुलाई 2018: सेंगर अभियुक्त करार, सीबीआई की पहली चार्जशीट.

28 जुलाई 2019: पीड़िता की कार को ट्रक ने टक्कर मारी.

31 जुलाई, 2019: सीबीआई को सौंपी गई जांच.

1 अगस्त, 2019: सुप्रीम कोर्ट का आदेश- सभी केस दिल्ली ट्रांसफ़र.

2 अगस्त, 2019:सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा को सुरक्षा कारणों से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ़्ट करने का आदेश दिया.

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