अमित शाह, स्मृति ईरानी की जगह राज्यसभा में कौन: पांच बड़ी ख़बरें

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राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के लिए शुक्रवार को वोटिंग होनी है.
ये दो सीटें लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के लोकसभा के लिए चुने जाने पर खाली हो चुकी हैं.
दोनों ही सीटें गुजरात की हैं.
हाल ही में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के 4 सांसदों और इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) के 1 सांसद के बीजेपी में शामिल होने के बाद राज्यसभा में एनडीए का दबदबा बढ़ा है.
बीजेपी के पास अपने 76 राज्यसभा सांसद हो गए हैं जबकि अन्य सहयोगी दलों के सांसदों को मिलाकर एनडीए के पास अब 116 राज्यसभा सांसद हैं.
गौरतलब है कि राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 250 निर्धारित है. यानी एनडीए राज्यसभा में बहुमत के आंकड़े के क़रीब पहुंच गया है.

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आज पेश होगा मोदी 2.0 का पहला बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगी. इस बजट में आर्थिक वृद्धि, राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण, कृषि और रोज़गार सृजन पर जोर हो सकता है.
वहीं, लोगों की नज़र आयकर की स्लैब पर भी रहेगी. 2019-20 के अंतरिम बजट में 5 लाख रुपये तक की आय पर कर छूट देने की घोषणा की गयी थी. हालांकि, ये मोदी सरकार का पहला बजट है तो लोकलुभावन घोषणाएं कम हो सकती हैं.
बजट में राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के साथ आर्थिक वृद्धि तथा रोज़गार सृजन को गति देने पर सरकार का जोर रह सकता है.
बजट से एक दिन पहले गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया था. इसमें वर्ष 2019-20 के लिए वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर सात फ़ीसदी रहने का अनुमान लगाया गया और राजकोषीय स्थिति की मजबूती पर जोर देते हुये निवेश और मांग के साथ साथ श्रम जैसे क्षेत्रों में सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है.
इस आर्थिक सर्वे में अर्थव्यवस्था के आठ फ़ीसदी विकास दर पाने के लिए सुझाव दिए गए हैं जिससे 2025 में यह पांच ट्रिलियन डॉलर को पार कर सकती है.
यह सर्वे मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने तैयार किया है.

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आधार कार्ड नहीं होगा अनिवार्य
लोकसभा में गुरुवार को 'आधार और अन्य विधियां (संशोधन) 2019' पास कर दिया गया है. इस विधेयक के मुताबिक बैंक में खाता खोलने, मोबाइल फ़ोन के लिए सिम लेने के लिए आधार कार्ड स्वैच्छिक होगा.
फिलहाल खाता खोलने और सिम लेने के लिए आधार कार्ड देना अनिवार्य है. यह नियम बहुत विवादित रहा है और लोगों की निजी जानकारी को ख़तरे को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं.
लोकसभा में एक चर्चा में जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार को सुरक्षित बताया और आश्वासन दिया कि सरकार जल्द ही डेटा संरक्षण विधेयक लायेगी और इसकी प्रक्रिया जारी है.
उन्होंने कहा कि आधार संशोधन विधेयक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए लाया गया है. किसी के पास आधार नहीं होने पर उसे किसी सरकारी योजना से वंचित नहीं किया जा सकता है. वहीं, आधार से जुड़ी कोई सूचना जाहिर करने के लिये धारक से अनुमति लेनी होगी.

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विवादित ट्वीट पर किरण बेदी ने मांगी माफ़ी
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में गुरुवार को पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी के चेन्नई में जलसंकट पर किए गए विवादास्पद ट्वीट पर बेहद खेद जताया है. उन्होंने सदन से इस मामले को ख़त्म करने का आग्रह किया है.
बेदी ने चेन्नई में पड़ रहे सूखे पर एक ट्वीट करते हुए राज्य की स्थिति के लिए खराब शासन, भ्रष्ट राजनीति, उदासीन नौकरशाही और स्वॉर्थी और कमज़ोर लोगों, को जिम्मेदार ठहराया था. इस ट्वीट पर विवाद खड़ा हो गया और डीएमके इसका विरोध करने लगी.
डीएमके नेताओं ने इसे चेन्नई की जनता के लिए अपमानजनक बताते हुए किरण बेदी के आधिकारिक आवास पर प्रदर्शन भी किया.
इसके बाद किरण बेदी ने अपने ट्वीट पर माफ़ी मांगी है. राजनाथ सिंह ने सदन में उनका बयान पढ़ते हुए कहा कि जो भी लिखा गया, वह लोगों के नजरिए से था और इसे उन्होंने निजी तौर पर साझा किया.
उन्होंने बेदी के हवाले से कहा, ''मैं स्वीकार करती हूं कि इससे बचा जा सकता था और मुझे इस तरह सार्वजनिक रूप से इसे साझा नहीं करना चाहिए था. मैंने भी इसे महसूस किया. इसलिए मैंने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया.''

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लकवे के इलाज में एक बड़ी कामयाबी
ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने नर्व ट्रांसफर सर्जरी में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है जिससे लकवा मारे गए लोग फिर से अपने हाथ चला सकते हैं.
सर्जनों ने लकवा मारे गए लोगों के हाथों और बांहों की नसों को फिर से जोड़ने में कामयाबी हासिल की है और इसके नतीजे में मरीज़ अब अपने हाथ से खाना खा सकते हैं, मेक अप लगा सकते हैं, गाड़ी की चाबी घुमा सकते हैं और कंप्यूटर से लिखने जैसे काम कर सकते हैं.
माना जा रहा है कि इस अग्रणी सर्जरी से लकवा मारे गए लोगों का जीवन बदला जा सकेगा.
हालांकि, न ही इस सर्जरी से मरीज़ पूरी तरह ठीक होते हैं और न ही ये सभी मरीज़ों पर कारगर होती है. बावजूद इसके इसे मेडिकल क्षेत्र में बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
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