आर्थिक सर्वेक्षण में 2025 तक देश को 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में देश की आर्थिक स्थिति की दशा और दिशा को बताने वाला आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया.
आर्थिक सर्वेक्षण में वर्तमान वित्त वर्ष यानी 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर के 7 फ़ीसदी रहने का अनुमान जताया गया है. इसमें बताया गया है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बेहतर स्थिति में बना हुआ है. चालू खाता घाटा नियंत्रित है और विदेशी बकाया कर्ज़ में लगातार कमी आई है.
इसमें बताया गया है कि ग़ैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात में कमी आने से बैंकिंग प्रणाली के कार्य प्रदर्शन में सुधार हुआ है और बैंकों से दिये जाने वाले क़र्ज़ में वृद्धि हुई है.
इस आर्थिक सर्वे को मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने तैयार किया है.
सर्वे में भारतीय अर्थव्यवस्था के मज़बूत रहने का अनुमान ज़ाहिर किया गया और संभावित चुनौतियों के विषय में बताया गया है.
इस सर्वे में देश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के हालात की रूपरेखा और इसमें सुधार के उपायों के बारे में बताया जाता है.
यह सर्वे भविष्य में बनाई जाने वाली नीतियों के लिए एक दृष्टिकोण का काम करता है. इसमें इस बात पर भी ज़ोर दिया जाता है कि किन क्षेत्रों पर सरकार को अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए.
यह सर्वे केवल सिफ़ारिश है जिसे लागू करने की कोई क़ानूनी बाध्यता नहीं होती, यही वजह है कि सरकार इसे केवल निर्देशात्मक रूप में लेती है.

आर्थिक सर्वे की मुख्य बातें
- निवेश और खपत में वृद्धि के कारण 2019-20 में जीडीपी में 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान.
- सेवा निर्यात 2000-01 के 0.746 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 14.389 लाख करोड़ रुपये हो गया.
- जून 2019 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 422.2 बिलियन डॉलर का हुआ.
- सेवा, ऑटोमोबिल तथा रसायन में 2015-16 से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आवक दर ऊंची हुई.
- बड़े तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को क़र्ज़ से वृद्धि हुई. अच्छी विनिर्माण तथा निर्माण गतिविधि के कारण 2018-19 में औद्योगिक वृद्धि में तेजी आई.

- 2018-19 में अर्थव्यवस्था में 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान.
- पिछले पांच वर्षों के दौरान सामाजिक सेवाओं पर परिव्यय में जीडीपी के अनुपात के संदर्भ में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई.
- आर्थिक समीक्षा में भारत को 2024-25 तक 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए विकास दर निरंतर 8 प्रतिशत रखने की बात कही गई. साथ ही वर्ष 2032 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एक मज़बूत और लोचदार बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया गया है.
- समीक्षा में बुनियादी ढांचे में निवेश अंतरालों को पाटने के लिए पीपीपी के अंतर्गत नवाचार दृष्टिकोण अपनाने पर ज़ोर दी गई है. इसमें कहा गया है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र में विवाद के समाधान के लिए संस्थागत प्रक्रिया की आवश्यकता है.
- भारत को उच्च मध्यम आय समूह में प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी 5000 डॉलर बढ़ाने के लिए प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत ढाई गुणा बढ़ाने की आवश्यकता.
- ऊर्जा सक्षमता कार्यक्रमों से भारत में 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत बचत और 2017-18 में लगभग 108.28 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई.
- वित्त वर्ष 2020-21 तक वित्तीय घाटा जीडीपी के 3 प्रतिशत तक लाने तथा 2024 -25 तक केन्द्र सरकार का क़र्ज़ जीडीपी के 40 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य.

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- 2018-19 के बजट में 2017-18 के संशोधित अनुमानों की तुलना में सकल कर राजस्व (जीटीआर) में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई गई. यह अनुमान व्यक्त किया गया कि सकल कर राजस्व (जीटीआर) 22.7 लाख करोड़ रुपये का होगा, जो जीडीपी का 12.1 प्रतिशत है.
- वर्ष 2018-19 के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में औद्योगिक विकास की दर वर्ष 2017-18 की 4.4 प्रतिशत की तुलना में 3.6 प्रतिशत रही.
- रेल भाड़ा और यात्रियों की आवाजाही 2017-18 के 0.64 प्रतिशत की तुलना में 2018-19 में 5.33 प्रतिशत बढ़ गया.
- भारत में 2018-19 में कुल टेलीफ़ोन कनेक्शन 118.34 करोड़ तक पहुंच गए.
- बिजली की स्थापित क्षमता 2018 में 3,44,002 मेगावाट से बढ़कर 2019 में 3,56,100 मेगावाट हो गई.
- 2018-19 के दौरान औद्योगिक क्षेत्र के कार्य निष्पादन में वर्ष 2017-18 की तुलना में सुधार हुआ है. वास्तविक सकल मूल्यवर्धित (जीवीए) औद्योगिक विकास की दर वर्ष 2017-18 में 5.9 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018-19 के दौरान बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गई.

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- भारत को उच्च मध्यम आय समूह में प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी 5000 डॉलर बढ़ाने के लिए प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत ढाई गुणा बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है.
- ऊर्जा सक्षमता कार्यक्रमों से भारत में 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत बचत और 2017-18 में लगभग 108.28 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है.
- पांच साल में विकास दर में वृद्धि हुई, निवेश दर भी बढ़ी
- 2019-20 में वित्तीय घाटा 5.8 फ़ीसदी रहने का अनुमान
- विदेशी निवशकों का भारत पर भरोसा बढ़ा
- आर्थिक समीक्षा में समग्र विकास के लिए भारत में न्यूनतम मज़दूरी प्रणाली का नया प्रारूप तैयार करने की बात कही गई.
- न्यूनतम मज़दूरी प्रणाली का एक प्रभावी प्रारूप तैयार करने के लिए नीतिगत सिफारिशों का सुझाव.
- न्यूनतम मज़दूरी के बेहतर और प्रभावी कार्यान्वयन से मज़दूरी में असमानता कम करने में मदद मिलेगी.
- न्यूनतम मज़दूरी को नियमित रूप से अनुकूल बनाने के लिए एक नई प्रक्रिया विकसित करने का सुझाव.
- श्रम और रोज़गार मंत्रालय के अंतर्गत राज्य सरकारों तक पहुंच वाला एक राष्ट्रीय स्तर का डैश बोर्ड स्थापित किया जा सकता है.
- क़ानूनी रूप से निर्धारित न्यूनतम मज़दूरी का भुगतान नहीं होने पर शिकायतें दर्ज करने के लिए एक टोल फ्री नम्बर स्थापित करने की सिफारिश.

- आर्थिक समीक्षा 2018-19 के मुताबिक ट्रेनों की सीधी टक्कर की एक भी घटना नहीं हुई.
- 2018-19 के दौरान रेलवे के माल ढुलाई से राजस्व में 5.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
- भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण के बड़े कार्यः 2021 तक 38,000 किलोमीटर रेललाइन का विद्युतीकरण किया जाएगा जिससे ब्रॉडगेज का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल हो जाएगा.
- 10 रेलवे स्टेशनों, 34 वर्कशॉप और 4 उत्पादक ईकाइयों को ग्रीन इंडस्ट्रीज़ सर्टिफिकेट मिला.
- दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) 2016 पारित होने से क़र्ज़ वसूली व्यवस्था मज़बूत हुई है.
- 1,73,000 करोड़ से अधिक रुपयों के दावों का निपटान.
- राष्ट्रीय कंपनी क़ानून न्यायाधिकरण का विस्तार किया जा रहा है.

- स्वच्छ भारत मिशन शुरू होने के बाद से देश भर में 9.5 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ. 5.5 लाख से ज़्यादा गांव खुले में शौच से मुक्त घोषित किये गये. स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की बदौलत 93.1 प्रतिशत परिवारों की शौचालयों तक पहुंच बनी.
- 30 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) कवरेज उपलब्ध कराई जा चुकी है. खुले में शौच से मुक्त (ओएफडी) के परिणामस्वरूप अतिसार और मलेरिया के कारण होने वाली मौतों में कमी आई.
- आर्थिक समीक्षा के मुताबिक देश के सामाजिक क्षेत्रों और ग़रीबों की बेहतरी के लिए डाटा तैयार किया जाना चाहिए. समाज के कल्याण के लिए इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए. लोगों का डाटा, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए सरकार का मंत्र होना चाहिए.
- एनपीए अनुपात में गिरावट तथा बैंक क़र्ज़ में वृद्धि से बैंकिंग प्रणाली के कार्य प्रदर्शन में सुधार.
- दिवाला और दिवालियापन के लिए व्यवस्था बनाने से फंसे हुए क़र्ज़ों की वसूली तथा समाधान हुआ.
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जनसंख्या के बड़े हिस्से को लाभ मिला है, पीएम किसान 2019 के तहत 5 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है.

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- बैंकिंग सुविधा प्राप्त महिलाओं की संख्या 2005-06 में 15.5 प्रतिशत थी जो 2015-16 में बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई है.
- भूमि की उत्पादकता से सिंचाई जल उत्पादकता की तरफ़ जाने की राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए.
- वर्ष 2018-19 में 10.6 मिलियन विदेशी पर्यटक भारत आए जबकि 2017-18 में इनकी संख्या 10.4 मिलियन थी.
- आईटी-बीपीएम उद्योग 2017-18 में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 167 अरब अमरीकी डॉलर पर पहुंच गया - इसके 2018-19 में 181 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान.
- 2018-19 में सेवा क्षेत्र में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि. सेवा क्षेत्र में एफडीआई इक्विटी का प्रवाह 28.26 अरब अमरीकी डॉलर.
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