संदेसरा बंधुओं पर 14,500 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप: प्रेस रिव्यू

संदेसरा बंधुओं

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अमर उजाला अख़बार की ख़बर है कि संदेसरा बंधु पर 14,500 करोड़ रुपए के घपले का आरोप लगा है जो पीएनबी घोटाले से भी बड़ा बताया जा रहा है.

अख़बार प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के हवाले से लिखता है कि गुजरात की फार्मा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटरों नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा पर बैंकों से 14,500 करोड़ रुपए के फ़र्जीवाड़ा का आरोप है.

इससे पहले हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक से 11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा था.

पहले सीबीआई ने स्टर्लिंग बायोटेक और इसके प्रमोटरों के ख़िलाफ़ बैंको से 5,383 करोड़ रुपयेए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था.

तब पता चला कि संदेसरा समूह की विदेशों में स्थित कंपनियों ने भारतीय बैंकों की विदेशा शाखाओं से नौ हज़ार करोड़ रुपए का क़र्ज़ लिया है. बाद में क़र्ज़ एनपीए में बदल गया.

मनोज तिवारी

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दिल्ली में भी एंटी रोमियो स्क्वॉड की मांग

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़ दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर दिल्ली में भी एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाने की मांग की है.

महिलाओं की सुरक्षा के लिए यूपी सरकार इसे फिर से शुरू कर रही है. इस पर मनोज तिवारी ने कहा कि यह दिल्ली में भी लागू होना चाहिए. अच्छा है कि यूपी में फिर शुरू हो रहा है.

अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि मनोज तिवारी संसद के बजट सत्र में भी इसकी मांग करने वाले हैं.

मनोज तिवारी ने सोमवार को रिलीज किए गए एक वीडियो में कहा था कि परेशान करने वालों को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए. चाहे इसके लिए पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में क्यों न रहना पड़े. किसी भी तरह इन लोगों में क़ानून का डर होना चाहिए.

जी-20 शिखर सम्मेलन

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आर्थिक अपराधियों के लिए जी-20 में घोषणा

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जी-20 शिखर सम्मेलन में घोषणा की गई है कि आर्थिक अपराधियों के लिए कोई भी देश सुरक्षित ठिकाने के रूप में काम नहीं करेगा. जी-20 देशों के बीच हुई वार्ता के बाद घोषणापत्र में ये कहा गया.

इसमें कहा गया कि देश भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाएंगे. भ्रष्टाचार के मामले में वांछित व्यक्ति को किसी और देश में सुरक्षित ठिकाना मुहैया नहीं होने देंगे. हालांकि, संयुक्त बयान में आतंकवाद को बहुत कम महत्व दिया गया है.

वहीं, जलवायु समझौते को लेकर अमरीका जी-20 देशों में अलग-थलग पड़ गया. अमरीका को छोड़कर सभी देशों ने जलवायु समझौता लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई.

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