BJP को वोट दें मुसलमान, कहने वाले कांग्रेसी नेता रौशन बेग़ कौन हैं

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के एक वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री ने अपनी ही पार्टी के ख़िलाफ़ बग़ावती सुर छेड़ दिया है.
सात बार के कांग्रेस विधायक रौशन बेग़ ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के क़रीबी और राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल को 'मसखरा' कहा और प्रदेश नेतृत्व पर मुसलमानों के वोटों को हल्के में लेने का आरोप लगाया.
उन्होंने यह भी कहा कि ज़रूरत पड़ने पर मुसलमानों को भाजपा को वोट देने के बारे में भी सोचना चाहिए. एक समाचार चैनल ने जब दोबारा इस पर उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर क़ायम हैं और वह नहीं चाहते कि मुसलमान अछूत बनकर रह जाए.

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पूर्व मंत्री रौशन बेग़ ने 2019 लोकसभा और 2018 के विधानसभा चुनावों में कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी केसी वेणुगोपाल की नीतियों की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाए कि 2018 विधानसभा चुनावों के बाद जेडीएस-कांग्रेस सरकार में मंत्रियों की सीटों का सौदा किया गया.
कर्नाटक की ज़िम्मेदारी मिलने के बाद वेणुगोपाल बहुत तेज़ी से सचिव से महासचिव बना दिए गए थे. माना जाता है कि राहुल गांधी उन पर काफ़ी भरोसा करते हैं.
हालांकि रौशन बेग़ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की. पार्टी की प्रदेश इकाई ने बेग़ को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया है.
इस पर बेग़ ने कहा है कि वो इसे पढ़ेंगे भी नहीं क्योंकि यह उन लोगों ने भेजा है जिनकी 'अक्षमता मैंने उजागर कर दी है.'
उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि उन्होंने ये मुद्दे सार्वजनिक तौर पर उठाने से पहले कई बार हाईकमान के सामने रखे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.
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टिकट न मिलने से नाराज़?
बीबीसी हिंदी से बातचीत में रौशन बेग़ ने कहा, "यह ग़ुस्से का सवाल नहीं है. उन्होंने जिस तरह का आचरण किया है, जिस तरह इस चुनाव में उन्होंने टिकट बांटे हैं, जिस तरह विधानसभा का चुनाव लड़ा गया, कांग्रेस 79 सीटों से आगे नहीं बढ़ सकी. इस आधार पर मैंने उन्हें मसखरा कहा है."
रौशन बेग़ ख़ुद भी बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से टिकट चाहते थे. उन्होंने स्वीकार किया कि टिकट न मिलने से भी वह नाराज़ थे. उन्होंने कहा, "लेकिन इसके अलावा मुझे यह कहना है कि वेणुगोपाल पार्टी के लिए बोझ हैं. एक्ज़िट पोल्स पर मुझे कोई हैरानी नहीं है. मैंने अपने विचार साझा किए हैं."
बेग़ ने यह आरोप भी लगाया है कि पार्टी नेतृत्व चुनाव अभियान के दौरान अल्पसंख्यक समाज के कार्यकर्ताओं की अनदेखी करता है. उन्होंने कहा, "नेतृत्व ने मुसलमान और ईसाई कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है. वे कहां जाएंगे. वे कांग्रेस छोड़कर कहां जाएंगे. हमारी भावनाओं को ठेस पहुंची है."

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सौम्य छवि के लिए जाने जाते रहे बेग़
हालांकि बेग़ अपने लंबे राजनीतिक करियर में एक ऐसे नेता के रूप में देखे जाते रहे, जिन्होंने अतीत में भाजपा की ओर से कड़े प्रहारों के बावजूद अपना संयम बनाए रखा.
वह सौम्य छवि के नेता माने जाते हैं. कहा जाता है कि जब दो साल पहले सिद्धरमैया सरकार ने विवादित इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को कर्नाटक में सभा की इजाज़त नहीं दी थी तो इसके लिए मुख्यमंत्री को रौशन बेग़ ने ही राज़ी किया था.
तो क्या वह सिर्फ़ कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर हमला कर रहे हैं या राष्ट्रीय नेतृत्व भी उनके निशाने पर है?
उन्होंने कहा, "मैं प्रदेश नेतृत्व पर आरोप लगा रहा हूं. मैं यहां कुप्रबंधन से निराश हूं. आम तौर पर मुसलमानों को तीन सीटें दी जाती रहीं. ये सीटें गुलबर्ग, हुबली-धारवाड़ और बेंगलुरु की होती तीं. उडुपी सीट ऑस्कर फर्नांडीज़ और करवाड़ सीट मार्गरेट अल्वा को दी गई थी. वो मैंगलौर सीट जेआर लोबो और करवाड़ सीट निवेदित अल्वा को दे सकते थे. ख़ास तौर से इस बात को ध्यान में रखते हुए कि अल्पसंख्यकों ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को वोट दिया था."
हालांकि बेग़ की नाराज़गी सिर्फ़ अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं की अनदेखी तक ही सीमित नहीं है. वह इस बात से भी ख़फ़ा हैं कि वेणुगोपाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यकों का दर्जा देने के मामले पर आगे बढ़ने के लिए नहीं कहा.
बेग़ कहते हैं, "उस वजह से हम 25 सीटें हार गए."

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बेग़ ने एक छात्र नेता के तौर पर राजनीति की शुरुआत की थी. शुरुआती दिनों में वह कांग्रेस पार्टी के पोस्टर चिपकाया करते थे. फिर वह जनता दल में चले गए और एचडी देवगौड़ा और जेएच पटेल की प्रदेश सरकारों में मंत्री रहे. फिर मंत्री पद पर ही उनकी कांग्रेस में वापसी हुई. सिर्फ़ इस गठबंधन सरकार में ही हुआ कि उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया.
तो क्या वह भाजपा के साथ जा रहे हैं?
वह कहते हैं, "अब तक इस पर फ़ैसला नहीं किया है. देखते हैं. बीजेपी का डर दिखाते-दिखाते बहुत हो गया. फ़ैसला लेने की ज़रूरत पड़ी तो ज़रूर लेंगे."
बेग़ ने ताज़ा बयान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव को अपरिपक्व बताया था.
दिनेश गुंडू राव उन्हें 'अवसरवादी' कहते हैं.
वह कहते हैं, "यह पूरी तरह राजनीतिक अवसरवाद है और नेताओं को इस तरह के नाटक नहीं करने चाहिए. हम सही समय पर कार्रवाई करेंगे."
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