अशोक लवासा: चुनाव आयोग में असहमति का सुर

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चुनाव आयुक्त अशोक लवासा इन दिनों चर्चा में हैं. इसकी वजह है आदर्श आचार संहिता की बैठकों में उनका शामिल ना होना.
ख़बरों के मुताबिक़ आदर्श आचार संहिता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट दिए जाने पर अशोक लवासा सहमत नहीं थे. आयोग ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के छह मामलों में पीएम मोदी को क्लीन चिट दी थी.
लवासा चाहते थे कि उनकी अल्पमत की राय को रिकॉर्ड किया जाए. उनका आरोप है कि उनकी अल्पमत की राय को दर्ज नहीं किया जा रहा है, इसलिए इस महीने के शुरू से उन्होंने आचार संहिता से संबंधित बैठकों में जाना बंद कर दिया है.
कहा जा रहा है कि लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर बैठकों से अलग रहने की जानकारी दी है.
लवासा की चिट्ठी की ख़बरें मीडिया में आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बयान जारी कर इसे ग़ैरज़रूरी विवाद बताया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार क्लीन चिट देने की वजह से चुनाव आयोग की काफ़ी आलोचना भी हुई. इस बीच इस मामले पर चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी अशोक लवासा की नाराज़गी चर्चा का विषय बनी हुई है.

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कौन हैं अशोक लावास
अशोक लवासा ने 23 जनवरी 2018 को भारत के चुनाव आयुक्त के तौर पर पद संभाला.
लवासा हरियाणा कैडर के (बैच 1980) के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं.
भारत के चुनाव आयुक्त बनने से पहले वो 31 अक्तूबर 2017 को केंद्रीय वित्त सचिव के पद से सेवा-निवृत्ति हुए थे.
भारत के वित्त सचिव रहने से पहले वो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय में केंद्रीय सचिव रहे थे.

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37 साल का करियर
सक्रिय सेवा में अशोक लवासा को 37 से भी ज़्यादा सालों का अनुभव है. केंद्र और राज्य सरकार में रहते हुए उन्हें सुशासन और नीतिगत सुधार की पहलों में ख़ास योगदान देने का श्रेय दिया जाता है.
अशोल लवासा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कई वार्ताओं में भी मुख्य भूमिका निभा चुके हैं.
2015 में जलवायु परिवर्तन को लेकर हुए पेरिस समझौते के दौरान लवासा ने भारतीय टीम का नेतृत्व किया था.
इसके अलावा मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और कन्वेंशन ऑन बायोडायवर्सिटी एंड डीसर्टिफिकेशन के दौरान भी उन्होंने भारतीय टीम को लीड किया था.
आर्थिक मामलों के संयुक्त सचिव रहते हुए एशियन डेवलपमेंट बैंक से दर्जनों डेवलपमेंट लोन लेने और वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स बनाने के लिए बातचीत की.

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वित्तीय सचिव
अशोक लवासा उस वक़्त वित्त सचिव रहे जब सरकार में बड़े बदलाव या बड़े फैसले हुए.
जीएसटी पेश किए जाने के वक़्त और रेल बजट को आम बजट में मिलाए जाने के वक़्त वो वित्त सचिव के पद पर थे.
इसके अलावा जब बजट पेश किए जाने की तारीख़ को चार हफ्ते आगे बढ़ा दिया गया, उस वक़्त भी वो वित्त सचिव के अहम पद पर थे.
जब सामान्य वित्तीय नियमों में संशोधन किया गया, उस वक़्त भी वो ये अहम पद देख रहे थे.
वहीं पर्यावरण सचिव रहते हुए भी उन्होंने कई नीतिगत और प्रक्रियात्मक सुधारों की पहल की.

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इसके अलावा भी उन्होंने बहुत से मंत्रालयों में अहम पद संभाले.
वो उर्जा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रहे, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे, आर्थिक मामलों के विभाग (वित्त मंत्रालय) में भी संयुक्त सचिव का पद संभाला.
हरियाणा के प्रशासन में भी उन्होंने कई अहम विभागों का काम देखा.

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आईएएस बनने से पहले
आईएएस बनने से पहले वो दिल्ली विश्वविद्यालय में अगस्त 1978 से दिसंबर 1979 तक लेक्चरर रहे.
अशोल लवासा ने दिसंबर 1979 से जुलाई 1980 तक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में प्रोबेशनरी ऑफ़िसर के तौर पर भी काम किया.
अशोक लवासा का जन्म 21 अक्तूबर 1957 को हुआ था.
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (इंग्लिश ऑनर्स) और इंग्लिश में ही एमए किया.
लवासा ने ऑस्ट्रेलिया की सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी से एमबीए भी किया है और उनके पास डिफेंस और स्ट्रेटेजिक स्टडिज़ में एम.फिल की डिग्री भी है.
अशोक लवासा को फ़ेटोग्राफ़ू का काफ़ी शौक़ है. अलग-अलग शहरों में उन्होंने अपनी खींची तस्वीरों की प्रदर्शनियां भी की हैं.
लवासा ने 'एन अनसिविल सर्वेंट' नाम की किताब भी लिख है. ये किताब 2006 में छपी थी.
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