मुसलमानों को वोट देने से रोकने का सच: फ़ैक्ट चेक

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- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब शेयर किया जा रहा है जिसमें पुलिस वाले कुछ मुसलमानों को वोट देन से रोकने के लिए मारपीट करते नज़र आ रहे हैं.
इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है, "मोदी सरकार, आरएसएस और शिवसेना मुस्लिमों को वोट देने से रोक रहे हैं. मीडिया इसे नहीं दिखाएगा इसलिए कृपया इसे शेयर करें और मोदी और आरएसएस पर कार्रवाई बहुत ज़रूरी है. "
ट्विटर और फ़ेसबुक पर ये वीडियो हज़ारों बार शेयर किया गया है.
ओसिक्स मीडिया नामक एक फ़ेसबुक पेज ने इस वीडियो को एक कैप्शन के साथ शेयर किया था.
इसमें लिखा गया है, "हार के डर से एनडीए ट्रिक का इस्तेमाल कर रहा है और पुलिस मुस्लिमों को वोट देने से रोक रही है. मोदी सरकार, आरएसएस और शिव सेना महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को पीट रहे हैं. आगामी चुनावों में हिस्सा लें."
हमारे पाठकों ने इस वीडियो को व्हाट्सऐप के ज़रिए भेज कर इसकी सच्चाई के बारे में पूछा है.
हमने पाया है कि वीडियो के साथ जो दावे किए गए हैं, वो ग़लत हैं.

वीडियो की सच्चाई
रिवर्स इमेज सर्च में इस वीडियो से जुड़ी ख़बरें मिलीं.
एक अप्रैल 2019 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये वीडियो गुजरात के वीरामगम कस्बे का है.
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ये वीडियो वीरामगम कस्बे के भाथीपुर इलाक़े का है.
ये घटना तब घटी जब एक महिला कब्रिस्तान की दीवार पर कपड़े सुखाने की कोशिश कर रही थी और उसी सयम कुछ लोगों ने इसका विरोध किया.
इस पूरी घटना की जानकारी के लिए बीबीसी ने अहमदाबाद ग्रामीण क्षेत्र के एसपी आरवी असारी को फ़ोन किया.

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असारी ने बताया, "ये वीडियो विरामगम क़स्बे में 31 मार्च 2019 को हुई घटना का है. जिसमें ठाकुर और मुस्लिम समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए. एक महिला कब्रिस्तान की दीवार पर कपड़े सुखाने के लिए डाल रही थी. तनातनी ने हिंसा का रूप तब ले लिया जब एक समुदाय के लोगों ने दूसरे समुदाय पर हमला बोल दिया."
उन्होंने कहा, "जब पुलिस वहां पहुंची कुछ लोगों के एक ग्रुप ने पुलिस पर भी हमला बोला और पत्थर चलाना शुरू कर दिया. हालांकि पुलिस आरोपी को गिरफ़्तार करने में सफल रही. ग़लत दावों के साथ वीडियो को फैलाने वालों तक पहुंचने के लिए हम इस मामले की जांच कर रहे हैं. इस वीडियो का इस समय जारी चुनावों से कोई संबंध नहीं है."
वोट देने से रोकने के लिए पुलिसकर्मी मुस्लिम लोगों को पीट रहे हैं, ये दावा हमने ग़लत पाया है.

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