बीजेपी का संकल्प पत्र-2019, सबसे बड़ा वादा मोदी ख़ुद हैं

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- Author, राजेश प्रियदर्शी
- पदनाम, डिजिटल एडिटर, बीबीसी हिंदी
2014 के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' से चलकर बीजेपी का काफ़िला 2019 में 'मोदी है तो मुमकिन है' पर आ पहुंचा है. दोबारा पीएम बनने का संकल्प लेते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 2022 में भारत की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होंगे इसलिए पार्टी संकल्प पत्र में दर्ज 75 वादे पूरा करने की दिशा में काम करेगी.
नेता चाहे जिस पार्टी के हों वे चुनाव से पहले बहुत सारे वादे करते हैं, और ज़्यादातर वादे पूरे नहीं होते, इस मामले में न तो कांग्रेस अपवाद है, न ही बीजेपी. मोदी ने कहा कि यह मैनिफ़ेस्टो वैसे तो 2024 तक के लिए है लेकिन "अपने कार्यकाल के बीच में 2022 में हम हिसाब दे सकते हैं."
बीजेपी के पिछले वादे कितने पूरे हुए, कितने अधूरे रहे और कितनों पर कोई काम नहीं हुआ, यह जानने के लिए आप मोदी सरकार की प्रोग्रेस रिपोर्ट यहाँ पढ़ सकते हैं. पिछले घोषणापत्र से 2019 के मैनिफ़ेस्टो की तुलना करने का बहुत अर्थ नहीं है क्योंकि पांच सालों में गोलपोस्ट कई बार बदल चुके हैं.
बहरहाल, 2014 का यूट्यूब वीडियो आप देख सकते हैं
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इस वीडियो में प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी कहते हैं कि "इस मेनिफ़िस्टो में जितनी बातें हम कर रहे हैं उन्हें 60 महीने में पूरा करने में हम पीछे नहीं रहेंगे, उसे पूर्णतया हासिल करेंगे." 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी ने सैकड़ों वादे किए थे लेकिन उसके मुकाबले इस बार का पूरा घोषणापत्र सिर्फ़ 50 पन्नों का है.
शायद देखा यह जाना चाहिए कि नया क्या आया, पुराना क्या गायब हो गया और क्या कुछ जस का तस है. सबसे पहले नज़र डालिए बीजेपी के तीन शाश्वत मुद्दों पर- भव्य राम मंदिर बनाना, कश्मीर से 370 हटाना और यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू करना.

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तीन शाश्वत मुद्दों का क्या हुआ?
'मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा लगाने वाली पार्टी के संकल्प पत्र में राम मंदिर का ज़िक्र इतना भर और यूं किया है, "राम मंदिर पर भाजपा अपना रुख़ दोहराती है. संविधान के दायरे में अयोध्या में शीघ्र राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं को तलाशा जाएगा और इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे."
क्या देश की जनता को बार-बार नहीं बताया गया था कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार का न होना राम मंदिर के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है, जैसे ही पूर्ण बहुमत वाली सरकार आएगी अयोध्या में जन्मभूमि स्थल पर भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा.
इसी तरह, कश्मीर में 370 के बारे में संकल्प पत्र में लिखा गया है, "हम जनसंघ के समय से अनुच्छेद 370 के बारे में अपने दृष्टिकोण को दोहराते हैं. हम धारा 35-ए को ख़त्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं." जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन में सरकार चलाने वाली बीजेपी ने इस प्रतिबद्धता को पूरा करने के क्या प्रयास किए?
तीसरा शाश्वत मुद्दा है यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू करना. तीन तलाक को अपराध घोषित करने के लिए मोदी सरकार ने अध्यादेश जारी किया है, यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड पर 2019 के संकल्प पत्र में बस इतना ही लिखा है, "हम तीन तलाक और निकाह-हलाला जैसी प्रथाओं के उन्मूलन और उन पर रोक लगाने के लिए एक कानून पारित करेंगे."

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'रोज़गार' का ज़िक्र भर
कई सर्वेक्षण बता रहे हैं कि देश में इस समय जो सबसे बड़े मुद्दे हैं उनमें से बेरोज़गारी सबसे गंभीर है. ऐसे में संकल्प पत्र में उससे निबटने का कोई ठोस भरोसा दिए जाने की उम्मीद थी. वैसे तो इस दस्तावेज़ में 'युवा भारत-भविष्य का भारत' नाम का एक पूरा चैप्टर है जिसमें खेल से जुड़े छह वादे, स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लक्ष्य और युवाओं को समाज से जोड़ने जैसी बातें कही गई हैं.
रोज़गार का ज़िक्र इतना ही, और इन शब्दों में है, "भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले 22 उत्कृष्ट क्षेत्रों की पहचान करके, उन क्षेत्रों में निर्णायक नीतियों के माध्यम से रोज़गार के नए अवसरों को पैदा करने के लिए कार्य करेंगे. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उपलब्ध अवसरों को ध्यान में रखते हुए, उच्च क्षमता वाले रक्षा और फ़ार्मा जैसे सेक्टरों में रोज़गार सृजन की दिशा में कार्य करेंगे."
युवाओं वाले चैप्टर में नरेंद्र मोदी का एक बयान भी छापा गया है, "भारत युवा देश है. एक ऐसा देश जिसकी प्रमुख आबादी युवा हो वो देश न केवल अपने, बल्कि पूरी दुनिया का भाग्य बदलने की क्षमता रखता है."

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राष्ट्रवाद पर सबसे ज़्यादा ज़ोर
संकल्प पत्र के पहले चैप्टर का शीर्षक है-- 'राष्ट्र सर्वप्रथम'. 2014 के चुनावी घोषणापत्र में भी सशक्त राष्ट्र बनाने पर ज़ोर दिया गया था, राष्ट्रवाद बीजेपी के एजेंडे में हमेशा ऊपर रहा है, यह एक ऐसा भावनात्मक मुद्दा है जिसकी कामयाबी-नाकामी का आकलन करने का ठोस पैमाना नहीं है.
इसमें आतंकवाद से सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सैनिकों का कल्याण, पुलिस का आधुनिकीकरण, घुसपैठ की समस्या का समाधान, वामपंथी उग्रवाद का ख़ात्मा आदि करने के वादे किए गए हैं.
राष्ट्रवाद के अध्याय में दो ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सरकार ने कुछ हद तक काम किया है और इन दोनों विवादास्पद मुद्दों पर काम आगे बढ़ाने का वादा किया गया है, ये मुद्दे हैं--सिटिज़नशिप अमेंडमेंट बिल और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजंस (एनआरसी) को प्राथमिकता के आधार पर लागू करना.
मोदी ने अपने भाषण में कहा कि तीन बातें हैं जिनको ध्यान में रखकर यह संकल्प पत्र तैयार किया गया है, "राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा है, अंत्योदय हमारा दर्शन है और सुशासन हमारा मंत्र."
किसानों के लिए क्या हैं वादे-इरादे
देश भर में कृषि संकट पर लगातार बात होती रही है, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा मोदी सरकार कर चुकी है. संकल्प पत्र में किए गए 75 वादों में से 31 किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े हैं.
'किसानों की आय दोगुनी' शीर्षक वाले अध्याय की पहली पंक्ति है, "भाजपा सरकार के वर्तमान कार्यकाल के प्रारंभ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने को मिशन के रूप में लिया है. हम इस लक्ष्य को 2022 तक पूरा करने के लिए सभी प्रयास करेंगे."
एक बड़ी घोषणा है--छोटे और सीमांत किसानों को पेंशन देने की. छोटे किसानों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन देने का वादा किया गया है. इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड पर एक लाख रुपए तक के लोन पर पांच साल के लिए कोई ब्याज नहीं देना होगा.
बाकी वादे मधुमक्खी पालन, मछली पालन, पशुपालन और जैविक खेती से जुड़े हुए हैं. गोदामों और बीजों की व्यवस्था को बेहतर बनाने का भी वादा किया गया है.

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पुराने संकल्प के नए विकल्प
सरकार में आने के बाद नरेंद्र मोदी ने बीसियों नए ऐलान किए थे, उनमें से ज़्यादातर का या तो संकल्प पत्र में ज़िक्र नहीं है, अगर है भी तो नाममात्र के लिए.
काला धन और भ्रष्टाचार पिछले चुनाव में बीजेपी के लिए बड़े मुद्दे थे. 'सुशासन' शीर्षक वाले अध्याय में भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए प्रयास किए जाने की बात कही गई है. देश से काला धन ख़त्म करने और विदेशों से काला धन लाने का कोई ज़िक्र संकल्प पत्र में नहीं है.
नोटबंदी और जीएसटी वे कदम हैं जो सरकार पहले उठा चुकी है इसलिए 2019 के संकल्प पत्र में उनका ज़िक्र होने का कोई तुक नहीं है लेकिन दीर्घकालीन योजनाएं जो अधूरी हैं उन्हें पूरा करने का कोई ठोस संकल्प दिखाई नहीं दे रहा है.

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'मेक इन इंडिया' मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना थी जिसका संकल्प पत्र में ज़िक्र भर किया गया है, यह नहीं बताया गया है कि लक्ष्य क्या है और कब तक हासिल होगा.
'डिजिटल इंडिया' का ज़िक्र 'नए भारत की बुनियाद' शीर्षक वाले चैप्टर में दो वाक्यों में किया गया है, इसमें वादा किया गया है कि 2022 तक सभी गांवों को हाइ स्पीड ऑप्टिक फ़ाइबर से जोड़ दिया जाएगा.
इसी तरह गंगा सफ़ाई के लिए कैबिनेट मंत्रालय बनाकर 'नमामि गंगे' नाम का मिशन चलाने वाली सरकार ने अब सिर्फ़ इतना कहा है कि स्वच्छ गंगा का लक्ष्य 2022 में हासिल कर लिया जाएगा.
'स्मार्ट सिटी' का संकल्प पत्र में कोई उल्लेख नहीं है, 100 स्मार्ट सिटी बनाने का लक्ष्य या तो हासिल हो गया माना गया है, या उसका संकल्प न करने का फ़ैसला किया गया है, शहरी विकास की बात तो की गई है लेकिन स्मार्ट सिटी शब्द का उल्लेख किए बग़ैर.
'स्किल्ड इंडिया' हासिल करने के लिए कौशल विकास मंत्रालय बनाया गया था, ऐसा नहीं है कि यह काम पूरा हो गया है लेकिन स्किल्ड इंडिया शब्द का संकल्प पत्र में एक जगह भी ज़िक्र नहीं है, अलबत्ता कौशल विकास के बारे में लिखा है, "नेशनल रीस्किलिंग और अपस्किलिंग नीति का निर्माण करेंगे."
कुल मिलाकर, इस संकल्प पत्र के ज़रिए एक ही वादा किया गया है कि बीजेपी को वोट देने पर 'शक्तिशाली नेता मोदी और उनकी मज़बूत सरकार' मिलेगी.
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