मोदी ने पटना की रैली में टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल क्यों किया?

नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, तीन फ़रवरी को पटना के गांधी मैदान में रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी और सामने का लगा ये टेलिप्रॉम्पटर
    • Author, टीम बीबीसी हिंदी
    • पदनाम, नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहचान बिना देखे लंबे भाषण देने वाले नेता की रही है. मोदी स्वतंत्रता दिवस पर भी लाल क़िले से देश को संबोधित करते हैं तो वो भाषण पढ़ते नहीं हैं बल्कि बिना देखे बोलते हैं.

कहा जाता है कि पीएम मोदी ने ऐसा कर लाल क़िले से भाषण पढ़ने की परंपरा को तोड़ा था.

शनिवार को बीजेपी की अगुआई वाले गठबंधन एनडीए की पटना में रैली थी. रैली को संबोधित करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे. किसी भी रैली में प्रधानमंत्री मोदी धाराप्रवाह बोलते हैं लेकिन पटना में जब वो लोगों को संबोधित करने उठे उनके सामने टेलिप्रॉम्पटर लगे हुए थे.

ज़ाहिर है पटना में आई भीड़ हिन्दी भाषी थी और मोदी को हिन्दी आती है. ऐसा क्या हो गया कि मोदी को हिन्दी भाषी लोगों को संबोधित करने के लिए टेलिप्रॉम्पटर की ज़रूरत पड़ी?

बिहार बीजेपी के प्रवक्ताओं से यही सवाल पूछा तो उन्होंने टेलिप्रॉम्पटर होने से इनकार कर दिया. हालांकि रैली के वीडियो और फ़ोटो में साफ़ दिख रहा है कि टेलिप्रॉम्पटर लगे हुए थे.

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टेलिप्रॉम्पटर डिस्प्ले डिवाइस है जिसे वक्ता के आगे लगाया जाता है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक विजुअल टेक्स्ट आते रहते हैं जिसे देखकर वक्ता बोलता है. दर्शकों को सामान्य रूप से पता नहीं चलता है कि वक्ता भाषण पढ़ रहा है या धाराप्रवाह ख़ुद से ही बोल रहा है.

बिहार में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के प्रवक्ता अजय आलोक भी शनिवार को गांधी मैदान में प्रधानमंत्री मोदी की रैली में मंच पर मौजूद थे. अजय आलोक इस बात को मानते हैं कि टेलिप्रॉम्पटर लगे हुए थे. उनसे पूछा कि धाराप्रवाह बोलने वाले मोदी को टेलिप्रॉम्पटर की ज़रूरत क्यों पड़ी?

अजय आलोक कहते हैं, ''प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियों में टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल कोई पहली बार नहीं किया है. हाल की सभी रैलियों में वो टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. दरअसल, वो भाषण की शुरुआत स्थानीय बोलियों में करते हैं. पटना में भी उन्होंने भोजपुरी, मगही और मैथिली में बोला. ये बोलियां उन्हें नहीं आती हैं. ऐसे में इन बोलियों को वो टेलिप्रॉम्पटर के सहारे बोलते हैं.''

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अजय आलोक मानते हैं कि टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल मोदी की चुनावी रणनीति का हिस्सा है. लेकिन बीजेपी इससे इनकार क्यों कर रही है? बीजेपी बिहार के प्रभारी भूपेंद्र यादव से संपर्क किया तो उन्होंने मीडिया प्रभारी से बात करने को कहा. बिहार बीजेपी के मीडिया प्रभारी अशोक भट्ट से पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बात की जानकारी नहीं है.

मोदी टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल विदेशी दौरों में भी करते हैं. प्रधानमंत्री आम तौर पर जब इंग्लिश में बोलते हैं तो टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल करते हैं. कई लोगों का ये भी कहना है कि तथ्यों में कोई ग़लती ना हो इसलिए भी मोदी ने टेलिप्रॉम्पटर का इस्तेमाल करना शुरू किया है.

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मोदी अपनी रैलियों में कई बार ऐतिहासिक तथ्यों को बताने में भूल कर चुके हैं. बिहार वर्ष 2013 में पटना की बहुचर्चित रैली में नरेंद्र मोदी ने बिहार की शक्ति का ज़िक्र करते हुए सम्राट अशोक का जिक्र किया, पाटलिपुत्र का ज़िक्र किया और फिर नालंदा और तक्षशिला का. लेकिन तथ्य ये है कि तक्षशिला का पंजाब का हिस्सा रहा है और अब पाकिस्तान में है.

2013 की ही रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सिकंदर की सेना ने पूरी दुनिया जीत ली थी. लेकिन जब उन्होंने बिहारियों से पंगा लिया था, उसका क्या हश्र हुआ. यहाँ आकर वो हार गए. सच्चाई यह है कि सिकंदर की सेना ने कभी गंगा पार ही नहीं की.

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बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी मोदी के टेलिप्रॉम्पटर इस्तेमाल करने पर निशाना साधा है.

लालू ने ट्वीट कर कहा है, ''हार की महान न्यायप्रिय धरा ने औक़ात दिखा दिया. योजना फ़ेल होने की बौखलाहट में आदमी कुछ भी झूठ बक सकता है. जुमले फेंक सकता है. बिहार में संभावित हार की घबहराहट से आत्मविश्वास इतना हिला हुआ है कि अब हिंदी भी "स्पीच टेलीप्रॉम्‍प्‍टर में देखकर बोलना पड़ रहा है.''

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