पुलवामा CRPF हमला: देवबंद से जैश ए मोहम्मद के दो संदिग्ध चरमपंथी गिरफ़्तार

शहनवाज़ अहमद और आकिब मलिक

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

उत्तर प्रदेश एटीएस ने चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े और जम्मू-कश्मीर के रहने वाले दो चरमपंथियों को देवबंद से गिरफ़्तार करने का दावा किया है.

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने मीडिया को बताया कि ये दोनों सहारनपुर में रहकर जैश-ए-मोहम्मद के लिए चरमपंथियों की भर्ती का अभियान चला रहे थे.

डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि गिरफ़्तार किए गए चरमपंथियों में शहनवाज़ अहमद कुलगाम जबकि आकिब मलिक पुलवामा का रहने वाला है.

दोनों पिछले काफी समय से सहारनपुर के देवबंद इलाक़े में रह रहे थे.

डीजीपी के मुताबिक, "दोनों से पूछताछ की जा रही है और आज ही इन दोनों को एटीएस कोर्ट में पेश किया जाएगा, फिर ट्रांज़िट रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी."

पुलवामा हमले में संलिप्तता की जांच

पुलिस के मुताबिक, पुलवामा में सीआरपीएफ़ के काफ़िले पर हुए हमले के बाद से ही सहारनपुर के देवबंद इलाक़े से ऐसी जानकारियां मिली थीं कि यहां कुछ संदिग्ध लोग हैं जो चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हैं.

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डीजीपी ने बताया, "इन्हीं जानकारियों के आधार पर एटीएस के आईजी के नेतृत्व में छापेमारी की कार्रवाई की गई जिसमें फ़िलहाल दो लोगों को पकड़ा गया है."

डीजीपी ने बताया कि पकड़े गए लोगों के पास से दो हथियार और कई कारतूस भी बरामद हुए हैं. दोनों ही संदिग्ध देवबंद में पढ़ाई करने का दावा कर रहे थे, लेकिन पुलिस के मुताबिक उन्होंने किसी संस्थान में प्रवेश नहीं लिया था. पुलिस फ़िलहाल ये भी पता करने की कोशिश कर रही है कि इनकी फंडिंग कहां से और किन माध्यमों से हो रही है.

पुलिस यह भी पता लगाने में लगी है कि कहीं इनकी संलिप्तता पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले में तो नहीं है.

पुलवामा चरमपंथी हमला

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मिले फर्जी आधार कार्ड

स्थानीय पत्रकार रियाज़ हाशमी के मुताबिक इस इलाक़े से संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में पहले भी कुछ छात्र पकड़े जाते रहे हैं.

रियाज़ कहते हैं, "यूपी एटीएस ने जिस शाहनवाज़ अहमद तेली को गिरफ़्तार किया है, वह देवबंद में फर्जी नाम से आधार कार्ड बनवाकर रह रहा था. जो आधार कार्ड उसके पास से मिला है, उसमें उसका नाम नवाज़ अहमद तेली लिखा हुआ है. सहारनपुर में फर्जी आधार कार्ड के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं."

हालांकि, जिस निजी छात्रावास से इन दोनों चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया गया है, वहां और भी कई छात्र रहते हैं. छापेमारी की कार्रवाई के बाद एक छात्र ने बताया कि एटीएस वाले, पांच-छह छात्रों को और पास में ही एक कपड़े की दुकान के मालिक को वहां से ले गए थे.

मोहम्मद मूसा नाम के इस छात्र के मुताबिक, "रात क़रीब दो बजे अचानक कुछ लोग पहुंचे और बताया कि हम पुलिसवाले हैं. हम लोगों ने कहा कि ठीक है आप जांच करिए जो कुछ भी आपको देखना है. हम लोग तो हर वक़्त जांच के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन जिस तरीक़े से वो आए, वो ठीक नहीं था."

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