ब्रिटेन से किसी अभियुक्त के भारत प्रत्यर्पण में कभी कामयाबी मिली है?

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- Author, साजिद इक़बाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
ब्रिटेन की एक अदालत ने 25 फ़रवरी 2021 को भारतीय उद्योगपति नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण के लिए हरी झंडी दे दी है. दो साल पहले फ़रवरी 2019 में ऐसे ही एक और भारतीय उद्योगपति विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण को भी मंज़ूरी दे दी गई थी.
बीबीसी हिन्दी ने उस समय एक लेख में बताया था कि ब्रिटेन में अदालतों के सामने माल्या से पहले भी कई भारतीयों के प्रत्यर्पण के मामले आए थे. क्या हुआ उनका? एक बार फिर पढ़िए कि क्या ब्रिटेन से किसी अभियुक्त के भारत प्रत्यर्पण में कामयाबी मिली है?

22 सितंबर 1992 को भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर के बाद इक़बाल मेमन उर्फ़ इक़बाल मिर्ची ऐसे पहले भारतीय थे जिन्हें इस मामले में अदालत जाना पड़ा था.
हालांकि ये मामले साबित नहीं हो सके और भारतीय सरकार को मिर्ची को क़ानूनी खर्च देना पड़ा था.
अप्रैल 1995 में स्कॉटलैंड यार्ड ने मिर्ची के घर पर छापेमारी कर उन्हें 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों और ड्रग्स के सिलसिले में गिरफ़्तार किया.
लेकिन जब मामला अदालत में पहुँचा, तो उनपर पहले लगे आरोपों को उनकी लंदन राइस मिल के मैनेजर की हत्या के आरोप से बदल दिया गया, जिनकी नौकरी छोड़ने के तुरंत बाद ही मुंबई में हत्या कर दी गई थी.
बो स्ट्रीट के मैजिस्ट्रेट ने ये कहते हुए कि कोई मामला नहीं बनता, प्रत्यर्पण की गुज़ारिश को नकार दिया.
भारत ने इसके ख़िलाफ़ कोई अपील नहीं की और मिर्ची को क़ानूनी लड़ाई के पैसे चुकाने पड़े.
ब्रिटिश अदालत में मोहम्मद उमरजी पटेल उर्फ़ हनीफ टाइगर के प्रत्यर्पण का मामला एक और हाई प्रोफ़ाइल मामला था.
हनीफ़ की सूरत के एक बाज़ार में 1993 में ग्रेनेड हमले में उनकी कथित भूमिका के लिए तलाश की जा रही है, उस हमले में एक स्कूली छात्रा की मौत हो गई थी.
उन पर एक भीड़ भरे रेलवे स्टेशन पर दूसरे ग्रेनेड हमले की साज़िश रचने का आरोप भी है, अप्रैल 1993 में हुए उस हमले में 12 रेलयात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
2017 में मीडिया में रिपोर्ट आई कि प्रत्यर्पण से बचने के लिए ब्रिटिश गृह मंत्री के पास टाइगर हनीफ़ की पेशी का मामला 2013 से 'अब तक विचाराधीन' है और गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि इसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

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ब्रिटेन से अब तक सिर्फ एक प्रत्यर्पण
2002 के गुजरात दंगों के मामले में समीर भाई वीनू भाई पटेल को 18 अक्तूबर 2016 को ब्रिटेन से भारत लाया गया था जो ब्रिटेन से प्रत्यर्पण के मामले में मिली एक मात्र सफलता है.
पटेल ने प्रत्यर्पण का विरोध नहीं किया बल्कि इसके लिए अपनी सहमति दी थी, इससे यह मामला लंबी प्रक्रिया से बच गए.
उन्हें 9 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया और 22 सितंबर को ब्रिटिश गृह मंत्री ऐंबर रड ने प्रत्यर्पण के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये.
इसकी कोई जानकारी नहीं है कि प्रत्यर्पण के बाद से पटेल को भारत में किसी अपराध का दोषी ठहराया गया है या नहीं.

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भारत से तीन प्रत्यर्पण
15 नवंबर 1993 को लागू हुए भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत, ऐसे लोगों की संख्या तीन है जब भारत से किसी व्यक्ति को ब्रिटेन प्रत्यर्पित किया गया.
- मनिंदर पाल सिंह (भारतीय नागरिक): ब्रिटिश युवती हाना फोस्टर की हत्या के मामले में 29 जुलाई 2017 को भारत से ब्रिटेन प्रत्यर्पित किया गया.
- सोमैया केतन सुरेंद्र (केन्याई नागरिक): 8 जुलाई 2009 को, धोखाधड़ी के एक मामले में ब्रिटेन भेजा गया.
- कुलविंदर सिंह उप्पल (भारतीय नागरिक): 14 नवंबर 2013 को अपहरण और बंधक बना कर रखने के एक मामले में ब्रिटेन के सुपुर्द किया गया.

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