कंप्यूटर निगरानी मामले में मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस -प्रेस रिव्यू

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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, देश की 10 एजेंसियों के कंप्यूटर की निगरानी रखे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है.
इस बारे में एक याचिका दायर की गई थी. सरकार के पास जवाब देने के लिए छह हफ्तों का वक़्त है. हालांकि केस की अगली सुनवाई की तारीख़ फिलहाल तय नहीं है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 21 दिसंबर को एक अधिसूचना जारी की थी. इसके मुताबिक़, देश की दस एजेंसियों को ये अधिकार दिए गए थे कि वो सभी के कंप्यूटर में मौजूद डेटा पर नज़र रख सके.
अब तक बड़े आपराधिक मामलों में ही कंप्यूटर या ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखी जाती थी या जांच के बाद जब्त किया जाता था.
सोशल मीडिया पर इस फ़ैसले का काफ़ी विरोध हुआ था.
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने कहा था कि सरकार के इस फ़ैसले के साथ देश में अघोषित आपातकाल लागू हो गया है. वहीं सरकार का कहना था कि ये अधिकार एजेंसियों को पहले से प्राप्त थे, इसे सिर्फ़ दोबारा जारी किया है.

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नहीं थम रहा सीबीआई निदेशक विवाद
द स्टेटसमेन की ख़बर के मुताबिक़, एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के तौर पर नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
आलोक वर्मा को हटाए जाने के बाद राव की 10 जनवरी को इस पद पर नियुक्ति हुई थी.
वकील प्रशांत भूषण की याचिका में कहा गया कि पूर्व निदेशक आलोक वर्मा के पद छोड़ने के बाद राव को कार्यभार देने का फ़ैसला दिल्ली स्पेशल पुलिस एंस्टैबलिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के ख़िलाफ़ है.
याचिका में कहा गया कि सरकार ने राव की नियुक्ति में चयन समिति की नज़रअंदाज़ किया है.

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सांसदों से बीजेपी कार्यकर्ता क्यों नाराज़?
हिंदुस्तान अख़बार की ख़बर के मुताबिक़, लोकसभा के 60 फीसदी सांसदों से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता नाराज़ हैं.
इस मामले को लेकर भाजपा नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं. पार्टी को अपने अंदरूनी तंत्र से मिल रहे फीडबैक से ये जानकारी मिली है.
तीन दिन पहले ही दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी.
संगठन से जुड़े एक प्रमुख नेता ने कहा, ''कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं ज़्यादा होती हैं और ऐसे में नाराज़गी होती है. जहां से भी नकरात्मक रिपोर्ट मिली है, वहां पर उम्मीदवार बदलने पर विचार किया जाएगा.''
बताया जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराज़गी कई मंत्रियों और ऐसे बड़े नेताओं से भी है, जिनके टिकट काटे जाने संभव नहीं हैं.

तहव्वुर राणा को लाया जाएगा भारत?
जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक़, अमरीका में 14 साल की सज़ा काट रहे तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित कराने की तैयारी भारत ने शुरू कर दी है.
राणा 2008 को मुंबई में हुए हमले की साजिश में शामिल थे.
इस मामले में एनआईए अमरीकी अधिकारियों से संपर्क कर नौकरशाही संबंधी औपचारिकताओं को कम करने के तरीकों पर बात कर रही है.
पाकिस्तान में जन्मे कैनेडियाई नागरिक तहव्वुर राणा को डेनमार्क के एक अख़बार के ख़िलाफ़ साजिश रचने और लश्कर-ए-तैयबा को मदद मुहैया कराने के मामले में अमरीका में सज़ा सुनाई गई थी.
राणा को 2009 में गिरफ़्तार किया गया था.
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