सबरीमला में मकरज्योति की क्या है महत्ता

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
समूचे केरल और या यूं कहें कि दुनियाभर में बसे भगवान अयप्पा के भक्त मकर संक्रांति के दिन मकरज्योति महोत्सव को देखने के लिए अपने टेलीविज़न सेट से चिपके रहेंगे.
दक्षिण भारतीय राज्य केरल में पेरियार टाइगर रिज़र्व के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित भगवान अयप्पा को समर्पित सबरीमला मंदिर में हर साल मकर संक्रांति के दिन ये उत्सव मनाया जाता है.
इस दौरान मकरज्योति नाम के तारे की पूजा की जाती है.
ये उत्सव अपने आप में इसलिए और दर्शनीय हो जाता हैं क्योंकि इस दौरान भगवान अयप्पा के हज़ारों भक्तों की आंखें आसमान में मकरज्योति तारे की ओर गड़ी रहती हैं.
इस साल ये तारा पर्वत के पूरब में शाम 7 बजकर पांच मिनट से आठ बजे तक देखा जाएगा.

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मकरज्योति पूजा 7 बजकर 52 मिनट पर होगी. ये पूजा एक घंटे तक चलती है.
आमतौर पर सबरीमला मंदिर में अनुष्ठान शाम छह बजे शुरू हो जाते हैं और रात आठ बजे तक चलते रहते हैं.
एक पुजारी या तांत्रिक परिवार से आने वाले राहुल ईश्वर बताते हैं, "मकरज्योति सूरज के बाद दूसरा सबसे चमकीला तारा है जो हमारे आसमान में दिखता है."

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वो बताते हैं, "मंदिर के गर्भगृह में होने वाली पूजा ब्राह्मण पद्धति से होती है. पर्वत पर होने वाली पूजा में प्राचीन जनजातीय व्यवस्था की मकराविल्लकू परंपरा के तहत पूजा की जाती है. सबरीमला वो जगह हैं जहां प्राचीन ब्राह्मणवादी और जनजातीय व्यवस्थाएं आपस में मिलती हैं. यही सबरीमला का महत्व है और इसी वजह से दक्षिण भारत और पूरी दुनिया से दसियों लाख लोग यहां पहुंचते हैं."

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मकरज्योति की महत्ता
ईश्वर कहते हैं कि ये प्राचीन मान्यता है कि सभी देवता आकाशीय चीज़ों के रूप में ही सामने आते हैं. प्राचीन मिस्र में इसे ओसुर कहा जाता था. पवित्र क़ुरान में भी इसका ज़िक्र है. इसे सीरियस कहा गया है और यह सूर्य के बाद आकाश में दूसरी सबसे ज़्यादा चमकने वाला तारा है.
हृदय विद्या फाउंडेशन के वैदिक मामलों के विशेषज्ञ विद्या सागर कहते हैं, "इस तारे का आकाश में दिखना कोई नई बात नहीं है. ये रोज़ ही आकाश में दिखता है. इस दिन की विशेषता ये है कि इस दिन स्वामी अयप्पा के पुजारी और भक्त आभूषणों के तीन बक्सों को गर्भगृह में ला जाते हैं और भगवान अयप्पा का श्रंगार करते हैं. "

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विद्या सागर कहते हैं, "स्वामी अयप्पा संन्यासी या योगी हैं लेकिन आज के दिन वो एक राजकुमार के रूप में दर्शन देते हैं. उन पर आभूषण सजाए जाते हैं. वो विष्णु के अवतार हैं, वो ही रक्षक हैं और भक्षक भी. आज के दिन राजा अपने बेटे को राजकुमार के रूप में देखना चाहते हैं तो वो आभूषणों से श्रंगार करते हैं."
सागर बताते हैं कि मकरण मलयालम कैलेंडर का पहला महीना है और आज के दिन के बाद से सूर्य अगले छह महीनों तक उत्तर दिशा में चलेगा. इसे उत्तरयायन कहते हैं. जुलाई में सूर्य दक्षिण की ओर चलना शुरू करता है और इसे ही दक्षिणायन कहा जाता है.
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