अयोध्या मामला: जस्टिस यू यू ललित का क्या है कल्याण सिंह कनेक्शन?

जस्टिस यू यू ललित

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सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि मामले में गुरुवार को उस वक्त नाटकीय मोड़ आया जब पाँच सदस्यों की संवैधानिक पीठ के एक जस्टिस यू यू ललित ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया.

जस्टिस ललित ने ये फ़ैसला एक मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ता के वकील राजीव धवन की इस आपत्ति के बाद किया कि जस्टिस यू यू ललित अयोध्या के एक आपराधिक मामले में बतौर वकील पेश हो चुके हैं.

राजीव धवन ने कहा है कि जस्टिस ललित अयोध्या आपराधिक मामले में 1997 में कल्याण सिंह की तरफ़ से पेश हुए थे.

धवन ने कहा, "महामहिम, जस्टिस ललित 1997 में एक बार अयोध्या आपराधिक मामले में कोर्ट में पैरवी कर चुके हैं, इसलिए उन्हें बेंच का हिस्सा नहीं होना चाहिए."

धवन की इस आपत्ति के बाद संवैधानिक पीठ के पाँच न्यायाधीशों- मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने विचार विमर्श किया.

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई

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बाद में, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि जस्टिस यू यू ललित इस मामले को नहीं सुनना चाहते, इसलिए इस सुनवाई को अभी स्थगित करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी तक स्थगित कर दी.

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के साल 2010 के फ़ैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील की गईं हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में अयोध्या की 2.77 एकड़ ज़मीन सुन्नी वक़्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बांटने का फ़ैसला दिया था.

कौन हैं जस्टिस यू यू ललित?

साल 1957 में पैदा हुए उदय उमेश ललित (यू यू ललित) सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बनने से पहले देश की शीर्ष अदालत में वरिष्ठ वकील हुआ करते थे. यू यू ललित जून 1983 में बार में शामिल हुए थे. 1986 में दिल्ली आने से पहले वह दिसंबर 1985 तक बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस किया करते थे.

सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल फोटो)

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13 अगस्त 2014 को जस्टिस ललित को तत्कालीन चीफ़ जस्टिस आर एम लोढा की अगुवाई वाले कोलेजियम ऑफ़ जज ने नामित किया था और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों वो नियुक्त हुए थे.

यू यू ललित का जन्म यू आर ललित के परिवार में हुआ, जो दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व एडिशनल जज और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील थे.

साल 1986 से 1992 के बीच ललित ने भारत के अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के लिए काम किया.

29 अप्रैल, 2004 को ललित को सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठ वकील बना दिया गया. साल 2011 में जी एस सिंघवी और ए के गांगुली वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ललित को 2जी स्पेक्ट्रम मामलों में सीबीआई जांच के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर नियुक्त किया.

ललित इसके अलावा कई हाई प्रोफ़ाइल मामलों में भी पेश हो चुके हैं, जिनमें सलमान ख़ान वाला ब्लैक बक शिकार मामला भी शामिल है.

साथ ही वो भ्रष्टाचार मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में गुजरात के तत्कालीन मंत्री अमित शाह और तत्कालीन सेना प्रमुख वी के सिंह का जन्मतिथि वाला मामला भी शामिल है.

ललित का कल्याण सिंह कनेक्शन

राजीव धवन ने गुरुवार को जस्टिस यू यू ललित के जिस मामले से जुड़े होने का मामला है, वो 20 साल पुराना है. ऐसा मामला जो राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में कोर्ट की अवमानना से जुड़ा है. याचिका हाशिम अंसारी ने दाखिल की थी.

हालाँकि अवमानना के एक और मामले में कल्याण सिंह को एक दिन की जेल और 20 हज़ार रुपये जुर्माना हुआ था.

सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किया था. ये अवमानना याचिका पीवी नरसिंह राव, एसबी चव्हाण, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, विजयराजे सिंधिया और अशोक सिंघल के ख़िलाफ़ थी, जिसमें कहा गया था कि इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना करते हुए बाबरी मस्जिद को गिराया.

नरसिंह राव उस समय प्रधानमंत्री थे, चव्हाण गृह मंत्री और कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. इनके अलावा केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को भी अवमानना का अभियुक्त बनाया गया था.

अंसारी की याचिका पर जस्टिस जीएन रे और जस्टिस एसपी भरूचा की खंडपीठ ने 26 मार्च 1997 को आखिरी सुनवाई की थी. इसी केस में कल्याण सिंह की तरफ़ से यूयू ललित पेश हुए थे. तब बेंच ने कहा था कि 'इन मुद्दों पर' गर्मियों की छुट्टी के बाद सुनवाई होनी चाहिए. लेकिन फिर कभी इस याचिका पर सुनवाई नहीं हुई.

हाशिम अंसारी की जुलाई 2016 में मौत हो गई थी.

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