सवर्ण आरक्षण के मामले में मायावती मोदी के साथ

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने नरेंद्र मोदी सरकार के गरीब सवर्णों को दस फ़ीसदी आरक्षण दिए जाने के फ़ैसले का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया ये फ़ैसला हमें सही नीयत से लिया गया फ़ैसला नहीं लगता है, चुनावी स्टंट लगता है, राजनीतिक छलावा लगता है.
मायावती ने कहा, "अच्छा होता अगर भाजपा अपना कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले नहीं बल्कि और पहले ये फ़ैसला ले लेती."

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वर्तमान आरक्षण सीमा की समीक्षा हो
मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में अब एससी-एसटी और ओबीसी वर्गों को मिलने वाले आरक्षण की लगभग 50 फीसदी सीमा की सही नीयत के साथ भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है.
और इन्हें उनकी बढ़ी हुई आबादी के अनुपात में आरक्षण के अनुपात को भी पूरे तौर पर बढ़ा कर दिए जाने की कोई नई संवैधानिक व्यवस्था देश में लागू की जानी चाहिए.
अगर ऐसा होता है तो इन वर्गों के लिए ये बेहतर होगा. और इतना ही नहीं, बल्कि इन वर्गों को मिलने वाले आरक्षण की व्यवस्था को केंद्र और राज्य की विभिन्न सरकारों द्वारा निष्क्रिय और निष्प्रभावी बनाने के लिए अभी तक अनेकों प्रकार के षड्यंत्र लगातार किये जाते रहे हैं, ये भी जगजाहिर है.
लेकिन अब इन्हें इसकी वजाए इन वर्गों के लिए उन क्षेत्रों में भी आरक्षण की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, जहां अब तक आरक्षण की कोई व्यवस्था ही लागू ही नहीं की गई है.
मायावती ने कहा, "इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में आरक्षण का कोटा भरे जाने के संबंध में भी पहले की सरकारों की तरह वर्तमान में भाजपा सरकारों का संकीर्ण, जातिवादी और नकारात्मक रवैया भी निंदनीय है, जिसका परिणाम यह है कि अब इन वर्गों के लोगों को आरक्षण का लाभ शिक्षा और सरकारी नौकरियों में नाममात्र ही मिल पा रहा है."
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