मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी पर कसा तंजः आज की पांच बड़ी ख़बरें

नरेंद्र मोदी, मनमोहन सिंह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने कार्यकाल के दौरान अब तक संवाददाता सम्मेलन नहीं आयोजित करने पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तंज कसा है.

मनमोहन ने अपनी किताब 'चेंजिंग इंडिया' के विमोचन के मौके पर कहा कि उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा.

मनमोहन ने कहा, "मैं कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था, जिसे प्रेस से बात करने में डर लगता हो. मैं नियमित तौर पर प्रेस से मिलता था, और जब भी मैं विदेश दौरे पर जाता था, लौटने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन ज़रूर बुलाता था."

उन्होंने कहा, "उन तमाम संवाददाता सम्मेलनों के बारे में इस किताब में बताया गया है."

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उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी. मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीज़ें हुई हैं, वे पाँच खंडों की इस पुस्तक में मौजूद हैं."

मनमोहन सिंह का बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अबतक के कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित न करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कस चुके हैं.

मनमोहन ने देश के भविष्य के बारे में कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद भारत एक प्रमुख वैश्विक ताकत बनने वाला है.

उन्होंने कहा, "एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उदय एक ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है और धरती पर कोई भी ताक़त इस विचार को रोक नहीं सकती."

अरुण जेटली, नोटबंदी

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नोटबंदी में आठ हज़ार करोड़ का खर्च बढ़ाः अरुण जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश की संसद के सामने नोटबंदी के दौरान हुए खर्च का ब्यौरा बताया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद नए नोटों को छापने में 7 हज़ार 965 करोड़ रुपये का खर्च आया था.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में ये भी बताया कि इस दौरान चार लोगों की मौत भी हुई.

मंगलवार को संसद में जेटली ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) को छोड़कर बाकि किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने नोटबंदी के दौरान हुई मौतों का आंकड़ा नहीं दिया.

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने बताया कि नोटबंदी के दौरान उनके तीन स्टाफ़ और एक ग्राहक की मौत हुई थी.

ग्राहक की मौत पर उनके परिजनों को तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया गया, जबकि तीनों स्टाफ़ के परिजनों को लगभग 41 लाख सात हज़ार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए गए थे.

सोनू निगम

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काश मैं पाकिस्तान में पैदा होताः सोनू निगम

मशहूर गायक सोनू निगम ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि काश! उनका जन्म भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान में हुआ होता, तो अच्छा होता.

सोनू निगम कहा कि भारत में अपने देश के गायकों के साथ काफ़ी ग़लत होता है. भारतीय गायकों को गाने के लिए म्यूज़िक कंपनियों को पैसे देने पड़ते हैं, तब जाकर उन्हें गाने को मिलता है और उन्हें प्रोमोट किया जाता है, जबकि पाकिस्तानी गायकों को यहाँ काम करने के लिए कोई अतिरिक्त फ़ीस नहीं देनी पड़ती है.

उन्होंने कहा, "कभी-कभी लगता है कि यदि हम पाकिस्तान से होते तो अच्छा होता क्योंकि हमें भारत में काम मिल रहा होता. अब ऐसा हो गया है कि सिंगर्स को म्यूज़िक कंपनियों को पैसे देने पड़ते हैं अपने कार्यक्रमों के लिए. यदि आप उन्हें पैसे नहीं देते हैं तो वे आपका गाना बजाएंगे ही नहीं. वो गाना आपको दिलवाएंगे ही नहीं."

उन्होंने कहा, "कंपनियां पाकिस्तानी सिंगर्स के साथ ऐसा नहीं करती हैं. ये अच्छी बात है कि वो उनके साथ ऐसा नहीं करते, लेकिन यदि ऐसा ही है तो आप भारतीय गायकों के साथ भी ऐसा क्यों कर रहे हो?"

उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा हो रही है.

इसरो

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इसरो करेगा संचार उपग्रह जीसैट-7ए का प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो बुधवार को संचार उपग्रह जीसैट-7ए को जीएसएलवी-एफ 11 के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है.

मंगलवार को जीसैट-7ए को लांच करने का 26 घंटे तक चलने वाला काउंटडाउन शुरू किया जा चुका है. श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से बुधवार को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर इसे लांच किया जाएगा.

जीसैट-7ए का वजन 2,250 किलोग्राम है और यह मिशन आठ साल का होगा.

इसरो का यह 39वां संचार उपग्रह है और इसे खासकर भारतीय वायुसेना को बेहतर संचार सेवा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया जा रहा है.

राष्ट्रपति जोसेफ कबीला

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कांगोः राष्ट्रपति कबीला की पत्नी के घर के बाहर लगी भीड़

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में राष्ट्रपति जोसेफ़ कबीला की पत्नी के आधिकारिक निवास के बाहर दर्ज़नों लोग इकट्ठा हुए. लोगों ने पत्रकारों से कहा कि सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देने वालों को पैसे बांटे गए थे, इसलिए वो भी पैसे मिलने की उम्मीद में आज यहां आए हैं.

कांगो में रविवार को चुनाव होने हैं. इस देश में मतदाताओं को पैसा बांटना गैर क़ानूनी नहीं है. हालांकि भ्रष्टाचार-विरोधी कार्यकर्ता इस प्रथा की आलोचना करते हैं. उनका कहना है कि मतदाताओं को उम्मीदवार का घोषणापत्र देखना चाहिए, ना कि तोहफों के प्रभाव में आना चाहिए. लेकिन सत्ताधारी पार्टी के एक प्रतिनिधि कटिंडी राफेल के विचार कुछ अलग हैं.

कांगो की सत्ताधारी पार्टी की एक प्रतिनिधि ने कहा, "इसे भ्रष्टाचार नहीं कहा जा सकता. उन्होंने नेताओं को चुना है तो बदले में उन्हें भी तो कुछ मिलना ही चाहिए. लोग इतने समझदार हैं कि पैसों से उनके वोट को प्रभावित नहीं किया जा सकता."

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