कश्मीर में सात लोगों के मारे जाने के बाद भारी तनाव

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भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सोमवार को कर्फ्यू लगा दिया गया है.
श्रीनगर से 30 किलोमीटर दूर पुलवामा ज़िले में एक विरोध-प्रर्दशन के दौरान मुठभेड़ में मारे गए सात प्रदर्शनकारियों को लेकर अलगाववादियों ने विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की थी.
इस विरोध-प्रदर्शन में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और मोहम्मद यासीन मलिक भी शामिल होने वाले थे. सभी अलगाववादी नेताओं का यह साझा विरोध-प्रदर्शन था.
आर्मी के एक प्रवक्ता ने रविवार को अपील की थी कि इस विरोध-प्रदर्शन में लोग शामिल ना हों. सेना का कहना था कि यह पाकिस्तान समर्थित विरोध-प्रदर्शन है.
पिछले हफ़्ते शनिवार को पुलवामा के सिर्नू गांव में एक गोलीबारी में तीन चरमपंथी मारे गए थे. सेना की इस कार्रवाई से ख़फ़ा स्थानीय लोग इस गांव में एकजुट हो गए थे.
इसी एनकाउंटर में सेना की गोलीबारी में सात कश्मीरी नौजवान मारे गए थे. कश्मीर स्थित बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर से पुलिस प्रवक्ता ने कहा है कि एक एनकाउंटर के दौरान भीड़ बिल्कुल क़रीब आ गई थी इसलिए इनकी मौत हुई. इस एकाउंटर में तीन चरमपंथी और सेना के एक जवान की मौत हुई थी.

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विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने रेल सेवा और इंटरनेट को बंद कर दिया है. उन सड़कों को भी बंद कर दिया गया है जो श्रीनगर में बादामी बाग सेना मुख्यालय की तरफ़ जाती है.
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीररवाइज़ उमर फ़ारूक़ और उनके समर्थकों को नज़रबंद कर लिया गया है. यासीन मलिक को भी पुलिस ने अपने अधीन कर लिया है.
विरोध प्रदर्शन पर अंकुश
यासीन मलिक ने कर्फ्यू तोड़ मार्च निकालने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया. मलिक ने गिरफ़्तार होने से पहले कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर में जितना ख़ून ख़राबा हो रहा है उतना कहीं नहीं है.
8 जुलाई, 2016 में प्रमुख चरमपंथी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद स्थानीय लोगों में चरमपंथियों के प्रति सहानुभूति बढ़ी है.
बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से पुलिस और सेना ख़िलाफ़ लोगों के सड़कों पर उतरने का सिलसिला तेज़ हुआ है. पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक़ इस साल प्रदर्शनकारियों और सेना के संघर्ष में कम से कम 46 लोग मारे गए, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ दक्षिण कश्मीर में कम से कम गोलीबारी की 100 घटनाएं हुईं और इनमें कम से कम 240 चरमपंथी मारे गए. सेना का कहना है कि कश्मीर में कम से कम 230 हथियारबंद चरमपंथी सक्रिय हैं.
पाकिस्तानी नेताओं ने इस घटना को लेकर कड़ी निंदा की है. ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन की तरफ़ से एक बयान जारी किया गया है और इसकी निंदा की गई है. आईओसी ने कहा है कि बेगुनाह लोगों को मारा गया है.
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी इस घटना को लेकर ट्वीट किया है. इमरान ख़ान ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''हम कश्मीर में सात लोगों के मारे जाने की कड़ी निंदा करते हैं. केवल संवाद के ज़रिए ही कश्मीर की समस्या का समाधान हो सकता है. हमलोग कश्मीर का मानवाधिकार को मुद्दों को उठाते रहेंगे और जममत संग्रह को लेकर हमारी प्रतिबद्धता कायम है.''
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