सुप्रीम कोर्ट के रफ़ाल फ़ैसले पर मोदी सरकार ने 'ग़लती सुधार' की अर्जी लगाई

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केंद्र सरकार ने रफ़ाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार को आए फैसले में एक 'तथ्यात्मक' संशोधन की अपील की है.
सरकार ने उस पैराग्राफ़ में संशोधन का अनुरोध किया है, जिसमें सरकार की ओर से कोर्ट को दी गई जानकारी को उद्धृत करते हुए कहा गया था कि रफ़ाल विमानों की क़ीमत के ब्यौरे सीएजी को सौंप दिए गए हैं और उसकी पीएसी ने भी जांच की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि सरकार की ओर से इस संबंध में एक शपथ पत्र दाख़िल किया गया है.सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में शीर्ष कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेज़ में सीएजी और पीएसी से जुड़ी बात को ग़लत समझा गया है.
इस लाइन को लेकर है विवाद
"सरकार पहले ही सीएजी से क़ीमत के ब्यौरे साझा कर चुकी है. सीएजी की रिपोर्ट की पीएसी ने पड़ताल की है. इसका एक संपादित संस्करण संसद के सामने रखा गया है और सार्वजनिक रूप से भी उपलब्ध है."

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सरकार की सफ़ाई
शपथपत्र में सरकारी वक़ील एके शर्मा की ओर से लिखा गया है कि 'सरकार क़ीमत के ब्यौरे सीएजी से साझा कर चुकी है' भूतकाल का वाक्य है और तथ्यात्मक तौर पर सही है. इसके बाद जो दूसरा वाक्य है वहां ये प्रक्रिया समझाने की कोशिश थी कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी के सामने पेश की जाती है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अंग्रेज़ी के 'is' को 'has been' करके लिखा गया है. इससे ये संदेश गया कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी के पास चली गई है.
सरकार ने कहा है, "सीएजी की रिपोर्ट की पीएसी पड़ताल करती है' यह प्रक्रिया का ब्यैरा है और वहां 'is' लिखने का अर्थ है कि जब सीएजी की रिपोर्ट तैयार हो जाएगी तो उसके बाद यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसी तरह अगली पंक्ति 'संपादित अंश ही संसद के सामने रखा जाता है और सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होता है' को भी भूतकाल का समझ लिया गया है."

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राहुल गांधी ने उठाया था सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रफ़ाल विमान सौदे को लेकर दायर याचिकाएं ख़ारिज कर दी थीं, जिसे केंद्र सरकार को क्लीन चिट बताया जा रहा था.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद से ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कुछ याचिकाकर्ताओं ने फैसले के इस हिस्से पर सवाल उठाए थे.
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राहुल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "इस फ़ैसले में कहा गया है कि रफ़ाल विमानों के सौदे की जानकारी नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (सीएजी) को दी गई है और इस रिपोर्ट को संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (पीएसी) के साथ साझा किया गया है. मेरे साथ पीएसी कमिटी के चेयरमेन मल्लिकार्जुन खड़गे हैं. इनसे पूछिए कि क्या उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट देखी है. इन्हें भी यह रिपोर्ट नहीं मिली है. ये कैसे हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में इसकी चर्चा होती है और पीएसी के चेयरमेन को इसके बारे में पता ही नहीं है."
मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी और न ही यह संसद में पेश की गई. उन्होंने कहा कि इसके बारे में सीएजी को भी नहीं पता है क्योंकि उन्होंने डिप्टी सीएजी को बुलाकर पूछा था लेकिन उन्हें भी इसके बारे में नहीं पता है.
उन्होंने कहा कि पीएसी के पास ऐसी कोई रिपोर्ट आई होती तो संसद में पेश होती और वह सार्वजनिक होती, जब तक ऐसी रिपोर्ट संसद में नहीं पेश की जाती तब तक इसका ज़िक्र कहीं बाहर भी नहीं होना चाहिए.














