राहुल गांधी कार्यकर्ताओं को फ़ोन कर चुन रहे हैं मुख्यमंत्री

राहुल गांधी

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देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम आ चुके हैं और तीन राज्यों में बीजेपी के ख़िलाफ़ जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने जा रही है.

एक ओर जहाँ इन परिणामों को कांग्रेस की 'वापसी' के तौर पर देखा जा रहा है वहीं सकारात्मक नतीजों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व को भी मज़बूती दी है.

बहुमत मिलने के बावजूद अभी तक राहुल गांधी तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा नहीं कर सके हैं.

नतीजे आ जाने के बाद भी नाम की घोषणा नहीं होना, निश्चित तौर पर ये दर्शाता है कि मुख्यमंत्री का चुनाव कठिन है.

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चुनौती से निपटने का नया तरीक़ा

इस चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस पार्टी ने रायशुमारी की है. कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि बुधवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी का एक प्री-रिकॉर्डेंड फ़ोन आया. इस प्री-रिकॉर्डेड कॉल में राहुल गांधी उनसे उनकी राय पूछ रहे थे. उनका कहना है कि क़रीब तीन लाख कार्यकर्ताओं को ये फ़ोन कॉल आई.

इस ख़बर की पुष्टि के लिए हमने कांग्रेस के आईटी सेल के प्रवीण चक्रवर्ती से बात की. उन्होंने बताया कि ये कोई पहला मौक़ा नहीं है जब पार्टी ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं से उनकी राय पूछ रही है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी बहुत पहले से कार्यकर्ताओं से रायशुमारी करती आई है. यहां तक कि किस सीट पर किस उम्मीदवार को खड़ा किया जाए, ये भी कार्यकर्ताओं की राय से ही तय किया गया था.

लेकिन पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा कथित रुप से शक्ति ऐप के सहारे मुख्यमंत्री पद के नाम की रायशुमारी को लेकर छत्तीसगढ़ में कहीं कोई उत्साह नहीं है.

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अपने मोबाइल में शक्ति ऐप ले कर घूम रहे कांग्रेस के अधिकांश नेताओं के पास यही जानकारी है कि कुछ लोगों को राहुल गांधी ने फोन किया था. अधिकांश को यह जानकारी सोशल मीडिया या टीवी से ही मिली.

हमने कांग्रेस पार्टी के 42 लोगों से इस संबंध में फ़ोन कर के चर्चा की, जिनमें पार्टी की आईटी सेल के लोग भी शामिल थे. लेकिन इनमें से केवल दो लोगों ने माना कि उनके पास राहुल गांधी का रिकार्डेड संदेश पहुंचा था और उन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी राय दी है.

बिलासपुर के बेलतरा इलाके के नीरज सोनी कहते हैं-"मेरे लिये खुशी की बात है कि हमारा नेतृत्व छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी इतना महत्व देता है. मुख्यमंत्री चुनने के लिये अगर दिल्ली से हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे किसी कार्यकर्ता को राहुल गांधी अगर फोन करते हैं तो हमारा उत्साहवर्धन तो होता ही है, हमें ताक़त भी मिलती है."

रायपुर के स्वप्निल का कहना था कि पहले उनके पास एक मेसेज आया था कि राहुल गांधी का फ़ोन आएगा, उसके बाद उन्हें फ़ोन भी आया.

वे कहते हैं-"हमें पहली बार लग रहा है कि हमारी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है."

तो क्या राजस्थान में भी इसी तरह मुख्यमंत्री की चयन किया जा रहा है?

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बीबीसी हिंदी के सहयोगी नारायण बारेठ ने जब राजस्थान में पार्टी के प्रवक्ता सतेंद्र राघो से इस संबंध में बात की तो उन्होंने ये तो नहीं बताया कि कितने कार्यकर्ताओं को ये कॉल आई थीं लेकिन इतना ज़रूर कहा कि लोगों ने कॉल आने का दावा किया है.

मध्य प्रदेश में भी शक्ति ऐप के माध्यम से कार्यकर्ताओं की पसंद जानने की कोशिश की गई है. पार्टी की प्रवक्ता शोभा ओझा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं की राय जानना ज़रूरी है और पार्टी हमेशा से ऐसा करती आ रही है.

क्या है शक्ति ऐप और कैसे करता है ये काम?

शक्ति ऐप ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के डेटा एंड एनालिटिक्स डिपार्टमेंट का प्रोजेक्ट है. इस ऐप को लॉन्च करने का मक़सद कार्यकर्ताओं से जुड़ी जानकारी रखना और उनसे ज़्यादा से ज़्यादा संवाद करना है. इस ऐप में बहुत से विकल्प हैं जिनकी मदद से पार्टी के कार्यकर्ता अपने नेता से सीधे संपर्क कर सकते हैं और अपनी बात रख सकते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स में शक्ति ऐप के 40 से 45 लाख रजिस्टर्ड यूज़र्स बताए जा रहे हैं. हालांकि किसी भी कांग्रेस प्रवक्ता ने हमसे इसकी पुष्टि नहीं की है.

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