उर्जित पटेल के जाते ही रुपया-बाज़ार गिरा

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भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफ़े ने ना सिर्फ़ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है बल्कि इससे भारतीय शेयर बाज़ार और मुद्रा में भी गिरावट दर्ज की गई है.
सोमवार शाम उर्जित पटेल के इस्तीफ़े की घोषणा के बाद शेयर मार्केट में ज़बरदस्त गिरावट देखने को मिली.
हफ्ते के पहले दिन जब बाज़ार बंद हुआ तो सेंसेक्स में 713.53 अंक गिर कर 34959.72 पर बंद हुआ. यह कुल दो प्रतिशत की गिरावट थी. वहीं निफ्टी भी 205.20 अंक गिरकर 10488.50 पर बंद हुआ.
मंगलवार को भी बाज़ार में गिरावट का दौर जारी है, सेंसेक्स में 300 अंकों की गिरावट दिख रही है वहीं निफ्टी लगभग 90 अंक नीचे चल रहा है.

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बाज़ार और रुपया लुढ़का
उर्जित पटेल के इस्तीफ़े का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है. भारतीय रुपया अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले 1.3 प्रतिशत गिर गया.
उर्जित पटेल ने निजी कारणों का हवाला देते हुए सोमवार को अचानक इस्तीफ़ा दे दिया था, अभी उनके कार्यकाल के 10 महीने बाक़ी थे.
भारतीय शेयर बाज़ार में सोमवार को भी गिरावट देखी गई थी. दरअसल इसकी वजह पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद आए एग्जिट पोल के नतीजों को बताया जा रहा था.
कई एग्जिट पोल के नतीजों में सत्ताधारी दल बाजेपी की हार बताई गई थी.

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कई विश्लेषकों का मानना है कि उर्जित पटेल का अचानक इस्तीफ़ा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलें लेकर आ सकता है. ख़ासतौर इस इस्तीफ़े की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं.
उर्जित पटेल ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक एक दिन पहले इस्तीफ़ा दिया, साथ ही कुछ महीनों बाद देश में लोकसभा चुनाव भी होने वाले हैं.
ऑक्सफॉर्ड इकोनॉमिक्स में भारत और दक्षिणपूर्व एशिया की प्रमुख प्रियंका किशोर उर्जित पटेल के इस्तीफ़े को सरकार के ख़िलाफ़ विरोध के रूप में देखती हैं.
उन्होंने कहा, ''पटेल का इस्तीफ़ा सरकार के लगातार बढ़ते हस्तक्षेप का विरोध नज़र आता है. पहले से ही अर्थव्यवस्था पर मुश्किल के बादल मंडरा रहे थे और अब आरबीआई के नेतृत्व पर पैदा हुई अनिश्चिता ने इसे और गहरा दिया है.''
माना जा रहा है कि देश की मौद्रिक नीति में सरकार के हस्तक्षेप के चलते निवेशकों का भरोसा कम होने लगा जिसके चलते रुपये को भी नुक़सान हुआ.
आरबीआई का स्टाफ़ निराश
उर्जित पटेल के इस्तीफ़े के बाद आरबीआई के कर्मचारी भी हैरान हैं. आरबीआई कर्मचारी संगठन के महासचिव समीर घोष ने इस संबंध में बीबीसी को लिखित जवाब दिया है.
अपने जवाब में उन्होंने बताया, ''आरबीआई गवर्नर के अचानक हुए इस्तीफ़े से पूरा देश और आरबीआई का पूरा स्टाफ़ हैरान है. इस्तीफ़े के लिए उन्होंने अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया है जिस पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि वे हमेशा की तरह स्वस्थ दिख रहे थे.''
''एक दिन पहले ही उन्होंने मौद्रिक नीति कमेटि की बैठक की थी और मीडिया को संबोधित भी किया था.''
''ख़ैर उन्होंने अपने इस्तीफ़े का कोई वाजिब कारण नहीं बताया है. ऐसे में यह माना जा सकता है कि उन्हें सरकार की ओर से लगातार डाले जा रहे दबाव के चलते यह फ़ैसला लेना पड़ा होगा.''

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''डॉ. पटेल ने केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता बचाने के लिए यह क़दम उठाया. आरबीआई का स्टाफ़ उनके इस फ़ैसले पर अत्याधिक खेद प्रकट करता है. हम सरकार से मांग करते हैं कि वह आरबीआई की नीतियों और कामों में बहुत अधिक हस्तक्षेप न करे.''
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