कांग्रेस की ग़लतियों से पाकिस्तान में चला गया करतारपुर: नरेंद्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह कांग्रेस की ग़लती थी जो करतारपुर पाकिस्तान चला गया.
राजस्थान विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए राजस्थान के हनुमानगढ़ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंटवारे का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा.
जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु नानन देव की भूमि इसलिए पाकिस्तान चली गई क्योंकि कांग्रेस ने इस पर ध्यान नहीं दिया.
मोदी ने कहा, "विभाजन के समय अगर कांग्रेस नेताओं में इस बात की थोड़ी भी समझदारी, संवेदशीलता और गंभीरता होती तो तीन किलोमीटर की दूरी पर हमारा करतारपुर हमसे अलग नहीं होता."
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'सत्ता के मोह में कांग्रेस पार्टी ने इतनी ग़लतियां की हैं कि उन्हें आज पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है.'
उन्होंने कहा, "कांग्रेस की हर बड़ी ग़लती को ठीक करने का काम मेरे नसीब में आया है और मेरा नसीब मेरी हाथ की लकीरों ने नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के हाथ में है.

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कॉरिडोर पर राजनीति
करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है लेकिन भारत से इसकी दूरी महज़ साढ़े चार किलोमीटर है.
मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे और उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे.
इसके साथ ही माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव ने आख़िरी सांस ली थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था.
हाल ही में भारत और पाकिस्तान दोनों ने करतारपुर गलियारे को खोलने पर सहमति देते हुए अपनी-अपनी ओर कॉरिडोर का शिलान्यास किया है.

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विवाद की शुरुआत
इस मामले में सबसे पहले राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ था जब अगस्त में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मेहमान बनकर पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तानी जनरल बाजवा से गले मिले थे.
इसके बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक हंगामा हुआ था. ना सिर्फ़ बीजेपी बल्कि उनके ख़ुद के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इसपर आपत्ति की थी.
मामला बढ़ने के बाद सिद्धू को सफ़ाई देनी पड़ी थी. सिद्धू के मुताबिक़, जनरल बाजवा ने उनसे कहा था कि भारतीय सिखों के लिए करतारपुर साहिब के गुरुद्वारे में जाने के लिए विशेष रास्ता मुहैया कराए जाने के लिए कोशिश की जा रही है.
सिद्धू का कहना था कि यह सुनकर वह भावुक हो गए थे और जनरल बाजवा से गले मिले.
इसी साल सितंबर में पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने बीबीसी को बताया था कि पाकिस्तान सरकार जल्द ही भारत से करतारपुर गुरुद्वारा साहिब आने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए कॉरिडोर खोलने जा रही है.

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इसके बाद भारत सरकार ने 22 नवंबर को डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक एक कॉरिडोर बनाने की घोषणा की थी ताकि सिख श्रद्धालु गुरु नानक की कर्मस्थली करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन कर सकें.
इसके कुछ घंटों के अंदर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भी एलान किया कि 28 नवंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस कॉरिडोर के निर्माण की नींव रखेंगे.
बाद में भारत की ओर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 26 नवंबर को कॉरिडोर की आधारशिला रखी और पाकिस्तान में 28 नवंबर को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कॉरिडोर का शिलान्यास किया.
इस मौक़े पर नवजोत सिंह सिद्धू भी पाकिस्तान गए थे और उनकी गोपाल सिंह चावला नाम के शख़्स के साथ तस्वीरें सामने आईं.

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दावा किया गया कि चावला ख़ालिस्तान समर्थक नेता हैं. इसे लेकर सिद्धू फिर विवाद में आ गए.
इस बीच बीजेपी और कांग्रेस के बीच करतारपुर कॉरिडोर खोलने की दिशा में हुई प्रगति का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है.
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