दिल्ली: सिग्नेचर ब्रिज पर कपड़े उतारने वाले कौन- लड़कियां या ट्रांसजेंडर्स?

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निर्माण से लेकर उद्घाटन तक. उद्घाटन से लेकर इस ख़बर को लिखे जाने तक. दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज अलग-अलग वजहों से चर्चाओं में बना हुआ है.
दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज आम लोगों के लिए खुला हुआ है. सफ़र को आसान बनाने के लिए बना ये ब्रिज अब लोगों के लिए इंग्लिश का SUFFER यानी दिक़्क़त बना हुआ है.
बीच ब्रिज में गाड़ियों को रोककर ज़िंदगी को ख़तरे में डालते हुए सेल्फ़ी लेने की घटनाएं लगातार हो रही हैं.
इसी क्रम में ताज़ा घटना वो वीडियो हैं जिसमें कुछ लोग अपने कपड़े उतारकर सिग्नेचर ब्रिज में मस्ती करते हुए दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो के बारे में दो तरह की बातें की जा रही हैं.
पहली ये कि वीडियो में कपड़े उतारने वाली लड़कियां हैं. दूसरी ये कि कपड़े उतारने वाले ट्रांसजेंडर्स हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सिग्नेचर ब्रिज पर अश्लीलता फ़ैलाने के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है.

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कपड़े उतारने वाले ट्रांसजेंडर या लड़कियां?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ये स्पष्ट नहीं है कि कपड़े उतारने वाले कौन हैं? ये वीडियो कुछ दूरी से बनाए गए हैं.
पीटीआई को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ''सिग्नेचर ब्रिज पर ट्रांसजेंडर्स के बने वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता फ़ैलाने का केस दर्ज कर लिया है.''
डीसीपी नॉर्थ ईस्ट अतुल ठाकुर ने बीबीसी हिंदी से अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए जाने की पुष्टि की है.
अतुल ठाकुर ने कहा, ''धारा 294 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है. अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं की गई है. जल्दी गिरफ़्तारी की जाएगी. ये दोनों धाराएं सार्वजनिक स्थलों पर अश्लीलता फैलाने पर लगाई जाती हैं.''
अतुल बताते हैं, ''अभी जांच की जा रही है. देखते हैं जांच में क्या आता है. वैसे तीन महीने की सज़ा होती है. ये केस पुलिस की तरफ से खुद दर्ज किया गया है. अभी हम इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं कि वीडियो में दिख रहे लोग ट्रांसजेंडर्स हैं या लड़कियां. जांच के आगे बढ़ने पर बेहतर पता चल पाएगा.''
दिल्ली पुलिस ने बताया, ''ये कोई तीन चार लोग थे, जो सिग्नेचर ब्रिज पर मौजूद थे. फिलहाल हमने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. घटना की सही तारीख़ और वक़्त क्या है. इसकी जांच बाकी है.''
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क्या है अश्लीलता क़ानून?
ये केस ऑबसिनिटी यानी अश्लीलता के तहत दर्ज किया गया है.
ऐसे केस आईपीसी की धारा 294 के तहत दर्ज किए जाते हैं. ये धारा है क्या और इसके तहत कितनी सज़ा का प्रावधान है?
इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की वकील अवनि बंसल ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''कोई भी इंसान अगर सार्वजनिक स्थल पर नग्नता करता या करती है. या फिर ऐसा कुछ करता है, जो अश्लील हो तो ये केस दर्ज किया जाता है. अश्लीलता क्या है, इसको लेकर कई मत हैं. इसे समझने की ज़रूरत है. अश्लीलता की परिभाषा वक़्त के साथ बदली भी है. किसी भी सार्वजनिक जगह पर कोई भी ऐसा काम करना जो अश्लील है, वो दंडनीय है.''
अवनि बंसल के मुताबिक़, ''इस क़ानून के पीछे का मकसद ये है कि समाज के नैतिक मूल्यों की रक्षा की जा सके. कोई कुछ भी अश्लील हरकत सार्वजनिक जगहों पर न करे. अगर कोई सार्वजनिक जगहों पर कपड़े उतारकर नाचने लगता है तो ये किसी को भी अश्लीलता लग सकता है. सिग्नेचर ब्रिज में ऐसा लोगों ने ऐसा क्यों किया, ये पता लगाने का विषय है. हो सकता है कि किसी अभियान के तहत ऐसा किया गया हो.''
हालांकि अश्लीलता क्या है, ये एक व्याख्या का विषय है. लेकिन क्या अश्लीलता फैलाने वालों के बीच सज़ा दिए जाने को लेकर कोई फ़र्क़ है?
अवनि बताती हैं, ''इस क़ानून में सभी के लिए एक सी सज़ा है. फिर चाहे अश्लीलता फ़ैलाने वाला लड़का हो या लड़की या ट्रांसजेंडर. ऑबसिनिटी आईपीसी का ही हिस्सा है. ऑबसिनिटी एक ऐसा मुद्दा है जिसे उठाए जाने की ज़रूरत है. आप किसे अश्लील मानते हैं? यह साल 1858 का क़ानून है, वो अभी तक क्यों मान्य है.''

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'एम एफ हुसैन पर भी लगी थी धारा 294'
वकील जसप्रीत सिंह राय के मुताबिक़, कोई भी इंसान अगर सार्वजिनक जगहों पर अश्लीलता करता है. फिर चाहे ये किसी कला के ज़रिए हो या किसी काम की वजह से. जिसका मकसद किसी को परेशान करना हो या कोई इसकी वजह से परेशान हो तो धारा 294 के तहत केस दर्ज होता है.
इस धारा के तहत तीन महीने की सज़ा होती है और ज़मानत मिल सकती है.
जसप्रीत सिंह कहते हैं, ''मशहूर पेंटर एमएफ़ हुसैन को भी इसी धारा के तहत नोटिस भेजा गया था, जिसे हाईकोर्ट में उन्होंने चुनौती दी थी. कोर्ट ने हुसैन को बरी करते हुए कहा था कि इन्होंने जो भी आर्टिस्टिक काम किया है, वो सार्वजिनक स्तर पर नहीं किया. पेंटिंग बनाई और उसे किसी को बेच दिया. ऐसे मामलों में 294 की धारा नहीं लगेगी.''
यह एमएफ़ हुसैन की चर्चित 'भारत माता' पेंटिंग थी.
लेकिन क्या किसी बार में कैबरे डांस करने वाले भी इसी श्रेणी में आते हैं?
वकील जसप्रीत सिंह के मुताबिक़, ''कैबरे डांस जब कोई देखने जाता है तो वो टिकट ख़रीदकर जाता है. ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता है कि इससे देखने वाले को कोई परेशानी हुई होगी.''

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कितने रुपये में बना सिग्नेचर ब्रिज?
दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की सरकार के समय 2004 में सिग्नेचर ब्रिज बनाने की योजना बनी थी. यह वो दौर था जब दिल्ली में मेट्रो शुरू हुए दो साल हो चुके थे. साथ ही शीला दीक्षित सरकार अपने फ़्लाइओवर बनाने के कामों में तेज़ी ला रही थी.
इसी दौरान वज़ीराबाद बैराज के पास ही सिग्नेचर ब्रिज की योजना बनी. अब तक उत्तरी दिल्ली से उत्तर-पूर्वी दिल्ली को जोड़ने के लिए केवल अकेला ब्रिज था.
इस पुल के तैयार होने की अंतिम तारीख़ बढ़ती रही और फिर साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले इसको बनकर तैयार होना था, लेकिन तकरीबन आठ साल बाद यह जनता के लिए खोला जा रहा है.
यह देश का पहला असिमेट्रिकल ब्रिज है जो तारों पर टिका हुआ है. इसकी कुल ऊंचाई 575 मीटर है और 154 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लास व्यूइंग बॉक्स है जहां से दर्शक दिल्ली का नज़ारा ले सकते हैं. ब्रिज को बनाने में 1500 करोड़ रुपए लगे हैं.
लेकिन ब्रिज के खुलने के बाद से जिस तरह जोखिम लेते हुए सेल्फी लेने और कपड़े उतारकर तस्वीरें खिंचवाने की घटनाएं हो रही हैं, ये पुलिस के लिए चिंता का सबब बना हुआ है.
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पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस ने सिविक अथॉरिटी से कहा है कि सेल्फी लेने और नियमों का उल्लंघन करने वालों को चेतावनी देते हुए बोर्ड लगाए जाएं ताकि सिग्नेचर ब्रिज ख़राब वजहों से चर्चा में न रहे.
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