सिग्नेचर ब्रिज उद्घाटन समारोह में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी का हंगामा

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली को जोड़ने वाला सिग्नेचर ब्रिज उद्घाटन होने से पहले ही चर्चा में आ गया था.
दरअसल, 1500 करोड़ से अधिक की लागत में यमुना नदी पर बनकर तैयार हुए सिग्नेचर ब्रिज का रविवार शाम को उद्घाटन हुआ. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पुल का उद्घाटन किया.
वैसे इसके उद्घाटन से पहले काफ़ी हंगामा हुआ. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद और दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने समर्थकों के साथ उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे. इस दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस से उनकी झड़प हुई है.
इस झड़प की तस्वीर में मनोज तिवारी पुलिसकर्मियों पर मुक्का चलाते हुए देखे जा रहे हैं. हालांकि इस पूरे विवाद पर उन्होंने मीडिया से कहा है कि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया जबकि वह स्थानीय सांसद हैं और आम आदमी पार्टी सरकार इस ब्रिज का क्रेडिट लेना चाहती है.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शनिवार को ही इस कार्यक्रम के लिए दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर आमंत्रित किया था.
अरविंद केजरीवाल ने इस ब्रिज को इंजीनियरिंग का नायाब नमूना बताया है लेकिन इससे पहले उनकी पार्टी से एक चूक भी हुई.
इसके बाद उद्घाटन का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा जिसमें आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह ख़ान मनोज तिवारी को मंच पर से नीचे धक्का दे रहे हैं. इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अमानतुल्लाह के ख़िलाफ़ नारे लगाए.
आम आदमी पार्टी ने शनिवार को अपने ट्विटर हैंडल से कई ऐसे ट्वीट किए जिनमें सिग्नेचर ब्रिज के अलावा रॉटेरडम के एक ब्रिज की तस्वीर थी.
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जस ओबेरॉय नामक ट्विटर हैंडल ने ट्वीट करते हुए लिखा कि इसमें जो एक तस्वीर है वह रॉटेरटम (नीदरलैंड्स) के एरेस्मस पुल की है.
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इसके अलावा दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट किया. उन्होंने इसके ज़रिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा.
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एक अन्य यूज़र दर्शन पाठक ने ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली को लंदन न सही नीदरलैंड्स ज़रूर बना दिया है.
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तस्वीर की आलोचना होने के बाद आम आदमी पार्टी के इस ट्वीट से पहली तस्वीर को हटा दिया गया. हालांकि, बाकी दो तस्वीरों को रहने दिया गया जो सिग्नेचर ब्रिज की है.

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क्या है सिग्नेचर ब्रिज?
दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की सरकार के समय 2004 में सिग्नेचर ब्रिज बनाने की योजना बनी थी. यह वह दौर था जब दिल्ली में मेट्रो शुरू हुए दो साल हो चुके थे. साथ ही शीला दीक्षित सरकार अपने फ़्लाईओवर बनाने के कामों में तेज़ी ला रही थी.
इसी दौरान वज़ीराबाद बैराज के पास ही सिग्नेचर ब्रिज की योजना बनी. अब तक उत्तरी दिल्ली से उत्तर-पूर्वी दिल्ली को जोड़ने के लिए केवल सिंगल ब्रिज था.
इस पुल के तैयार होने की अंतिम तारीख़ बढ़ती रही और फिर साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले इसको बनकर तैयार होना था लेकिन तकरीबन आठ साल बाद यह जनता के लिए खोला जा रहा है.
यह देश का पहला असिमेट्रिकल ब्रिज है जो तारों पर टिका हुआ है. इसकी कुल ऊंचाई 575 मीटर है और 154 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लास व्यूइंग बॉक्स है जहां से दर्शक दिल्ली का नज़ारा ले सकते हैं.
इस बॉक्स तक जाने के लिए चार एलिवेटर हैं जहां तकरीबन 50 लोग आ सकते हैं और इस पर चढ़कर दिल्ली देखने का नज़ारा एक प्रकार से दो क़ुतुब मीनार चढ़कर देखने जैसा होगा. क़ुतुब मीनार की कुल ऊंचाई 73 मीटर है.
इस पुल के पास सेल्फ़ी पॉइंट भी बनाए गए हैं जहां से लोग पुल के साथ अपनी सेल्फ़ी ले सकते हैं. 8 लेन के इस पुल की कुल लंबाई 1.5 किलोमीटर से अधिक है.
ग़ौरतलब है कि हाल ही में गुजरात में सरदार सरोवर बांध पर देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण हुआ है. इसकी कुल लंबाई 182 मीटर है और 153 मीटर पर एक व्यूइंग गैलरी है जहां से दर्शक सरदार सरोवर बांध और आस-पास की पहाड़ियों का नज़ारा ले सकते हैं.
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