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नोटबंदी-रफ़ाल डील पर जानबूझकर टाली जा रही सीएजी रिपोर्ट: रिटायर्ड अधिकारियों की चिट्ठी
साठ पूर्व नौकरशाहों ने सीएजी को ख़त लिखकर चिंता जताई है कि नोटबंदी और रफ़ाल पर ऑडिट रिपोर्ट्स देने में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि 2019 चुनावों से पहले एनडीए सरकार को शर्मिंदगी से बचाया जा सके.
पूर्व नौकरशाहों ने ये मांग भी की है कि इन दोनों अहम मुद्दों पर ऑडिट रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में पेश की जाए.
सरकार पहले ही रफ़ाल और नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष और मीडिया की ओर से दवाब का सामना कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने हर भाषण में इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं.
'ऑडिट रिपोर्ट का अता-पता नहीं'
नोटबंदी पर मीडिया में आई रिपोर्टों का हवाला देते हुए पूर्व नौकरशाहों ने लिखा है कि उस वक़्त के सीएजी शशिकांत शर्मा ने ऑडिट रिपोर्ट में नोटों की छपाई, आरबीआई के डिविडेंट और बैंकों की ओर से जुटाया गया तमाम डेटा शामिल करने को कहा था. शशिकांत 2013 से 2017 तक देश के सीएजी थे.
उन्होंने ये भी कहा था कि नोटबंदी के बाद संभावित टैक्स चोरों को पहचानने के लिए आयकर विभाग की गई कार्रवाई को भी उसमें शामिल किया जाए.
चिट्ठी में कहा गया है, "पूर्व सीएजी के इस बयान को 20 महीनों से ज़्यादा हो चुके हैं लेकिन अब तक नोटबंदी की ऑडिट रिपोर्ट का अता-पता नहीं है."
इस चिट्ठी पर दस्तख़त करने वालों में पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलियो रिबेरियो, आईएएस अफ़सर से सामाजिक कार्यकर्ता बनी अरुणा रॉय, पुणे पुलिस की पूर्व कमिश्नर मीरन बोरवनकर, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार, इटली में पूर्व राजदूत केपी फेबियन आदि नाम हैं.
चिट्ठी में दावा किया गया है कि कहा गया था कि रफ़ाल डील का ऑडिट सितंबर 2018 तक कर लिया जाएगा लेकिन संबंधित फ़ाइलों को अब तक छांटा ही नहीं गया है. चिट्ठी के मुताबिक, "ऑडिट की मौजूदा स्थिति साफ़ नहीं है."
पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि 2जी, कोयला, आदर्श, कॉमनवेल्थ खेलों के कथित घोटालों के संबंध सीएजी की रिपोर्ट ने तत्कालीन यूपी सरकार के संबंध में जनता की राय को बड़े स्तर पर प्रभावित किया था.
चिट्ठी के मुताबिक़, "अब ऐसा लगता है कि सीएजी जानबूझकर नोटबंदी और रफ़ाल समझौते पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में देरी कर रही है, ताकि इसे मई 2019 के चुनावों के बाद तक टाला जा सके और मौजूद सरकार शर्मिंदगी से बच जाए."
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