क्या अमित शाह का उपनाम वाक़ई फ़ारसी है?

अमित शाह

इमेज स्रोत, Samiratamj Mishra

    • Author, अजित वडनेरकर
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने हाल ही में इलाहाबाद और फ़ैज़ाबाद का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर क्रमश: प्रयागराज और अयोध्या कर दिया है.

भाजपा नेता अयोध्या और प्रयागराज जैसे हिंदी नामों को हिंदू संस्कृति का प्रतीक बताते रहे हैं, जबकि फ़ारसी से उपजे नामों को मुग़लकाल में थोपे गए विदेशी प्रतीक के तौर पर देखते रहे हैं.

जब इलाहाबाद का नाम बदलने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि क्यों आपका नाम रावण या दुर्योधन नहीं रखा गया?

इसी सिलसिले में हाल ही में इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने कहा था कि अगर भाजपा को फ़ारसी नामों से आपत्ति है तो उन्हें सबसे पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का नाम बदलने पर विचार करना चाहिए क्योंकि 'शाह' शब्द भी फ़ारसी से आया है.

पत्रकार और लेखक अजित वडनेरकर इस लेख में अतीत के पन्नों में इसी 'शाह' शब्द की तलाश कर रहे हैं: -

भारत के सामाजिक, जातीय, धार्मिक मसले अक्सर मनोरंजन के विषय होते हैं. उनमें भी ख़ासतौर पर अगर वे हिन्दुओं से संबंधित हो. अपनी अनोखी सुपाच्य और सर्व-स्वीकार्य जीवन-शैली के चलते हिन्दू समुदाय में लक्कड़ हज़म, पत्थर हज़म वाली पाचन क्षमता है.

यही नहीं, पच-पचाकर जो धारा सामने आती है उसमें से यह जानने की इच्छा कि देखें, कौन सिन्ध की धार से आया और कौन काबुल दरिया से. किसमें आमु दरिया का असर है और किसमें सीर का पानी है. "पानी से पानी मिलै, एक रंग ह्वै जाए", हिन्दुस्तान होने के यही मानी हैं और हिन्दू होने के भी, समझदानी कैसी है, उस पर निर्भर करता है.

'शाह' उपनाम भी ऐसा ही एक विषय है. ईरानी मूल का शब्द जिसका प्रयोग सत्ता-प्रमुख के तौर पर होता रहा. सूफ़ियों ने जो आध्यात्मिक सत्ता क़ायम की तो उसके पीरों को भी इसी अर्थ में 'शाह' कहा जाने लगा. बाद में जिस तरह से 'राजा' उपाधि बंटने लगी, उसी तरह 'शाह' का चलन भी हुआ.

ये सभी उपाधियाँ उपनाम की तरह अपना ली गईं. शाह को लेकर दो तरह की धारणाएं हैं. संस्कृत में शास् क्रिया है जिसमें नियंत्रण, प्रबन्धन, नियमन, शासन, दमन, विधान, हुकूमत जैसे आशय हैं. स के ह में बदलाव के चलते शास् का ही रूप शाह् हुआ.

अमित शाह-नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, EPA

प्रत्येक शाह, फ़ारसी वाला शाह नहीं

आमतौर पर हिन्दी का शाह उपनाम फ़ारसी शाह से जोड़ा जाता है. यह गलत नहीं, पर प्रत्येक शाह, फ़ारसी वाला शाह भी नहीं. वणिकों में साह उपनाम होता है (जिनमें तेली, पंसारी शामिल हैं) जो 'साधु' से बना है. इन्हें साहू भी कहते हैं.

शिवाजी के पौत्र का पुकारनाम शाहू था. दरअसल यह 'साधु' का ही मराठी रूपान्तर है न कि फ़ारसी शाह से रूपान्तरित. मराठी में ऊकारीकरण की प्रवृत्ति नहीं है. यूँ भी फ़ारसी शाह का मराठी रूप 'शहा' होगा.

राहुल सांकृत्यायन, चतुरसेन शास्त्री जैसे अनेक लेखकों ने शहंशाह की तर्ज़ पर शासानुशास का प्रयोग भी किया है. शास् और अनुशास का मेल. दोनों का अर्थ एक ही है. संस्कृत परम्परा में शासानुशास जैसा पद नहीं मिलता.

ज़ाहिर है, तब इस आधार पर स-ह के रूपान्तर से शाहानुशाही, तदनुरूप शाहंशाह जैसे रूपान्तर के पीछे ठोस आधार नहीं है.

इतिहास की किताबों में हम सबने क्षत्रप और महाक्षत्रप जैसे पदनाम पढ़े हैं. ये ईरानी मूल के शब्द हैं जो संस्कृत कोशों में भी दर्ज़ हैं. दरअसल ये हखामनी साम्राज्य की उपाधियाँ थीं जिन्हें शक अपने साथ-साथ लगाने के शौकीन थे. उस समय तक्षशिला, मथुरा, उज्जयिनी और नासिक शकों की प्रमुख राजधानियां थीं.

अमित शाह

इमेज स्रोत, Samiratmj Mishra

उच्चारण में बदलाव की प्रक्रिया

गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र भी इनके प्रभुत्व में था. क्षत्रप का चलन आमतौर पर युवराज के लिए होता था जबकि महाक्षत्रप राज्यपाल, सूबेदार या प्रान्तपाल को कहते थे. गौरतलब है शक जाति के लोग सोग्दी ज़बान बोलते थे और उपाधियां उन्हीं के शासनकाल की हैं. इन स्थानों के प्रधान शक शासक महाक्षत्रप कहलाते थे जबकि कनिष्ठ शासक या उप शासक क्षत्रप कहलाते थे.

'क्षत्रप' शब्द का प्रसार इतना था कि एशिया में जहां कहीं यूनानी और शक साम्राज्य के अवशेष थे, उन स्थानों के गवर्नर या राज्यपालों का उल्लेख भी सट्रप/खत्रप/ख्वातवा/शत्रप के रूप में ही मिलता है. शक जाति के लोग संभवतः उत्तर पश्चिमी चीन के निवासी थे. वैसे जब ये भारत में आए तब तक इनका फैलाव समूचे मध्य एशिया में हो चुका था. ईरान की पहचान शकों से होती थी.

दक्षिणी पूर्वी ईरान को 'सीस्तान' कहा जाता था जिसका अर्थ था 'शकस्थान'. संस्कृत ग्रंथों में भारत से पश्चिम में सिंध से लेकर अफ़गानिस्तान, ईरान आदि क्षेत्र को शकद्वीप कहा गया है अर्थात यहां शकों का शासन था.

ब्राह्मणों की एक शाखा शाकद्वीपीय भी मानी जाती है. शायद यही मागी ब्राह्मण थे जिनका रिश्ता मगध से था, जिन्हें बाद में शाकद्वीपीय कहा गया.

संस्कृत के क्षत्र में भी प्रभुत्व, साम्राज्य, वंश, आधिपत्य के आशय हैं. इसी कड़ी का क्षेत्र शब्द भूमि के अर्थ में भी हम जानते हैं. खेत इसी क्षेत्र का अपभ्रंश है.

संस्कृत का क्षत्री भी राजकुल वाले अर्थ से कालान्तर में राजपूत जाति के अर्थ में क्षत्रीय में ढल गया. इसका एक रूप पंजाब में खत्री बना. नेपाली में यह छेत्री होता है. इस तरह क्षत्रप का खत्रप भी हुआ. तो ईरानी क्षत्रप का सोग्दी रूप ख्वातवा हुआ.

योगी आदित्यनाथ

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और फ़ैज़ाबाद का अयोध्या कर दिया है

हमारा अनुमान है कि यहाँ 'क्ष' का रूपान्तर 'ख्व' हुआ होगा, 'त्र' का सिर्फ़ 'त' शेष रहा. भारत-ईरानी भाषाओं में 'प' का रूपान्त 'व' में हो जाता है.

इसे यूँ समझ सकते हैं- क्षत्रप ख्वतप ख्वातवा. इसका रूप कहीं कहीं खाता/ख्वाती भी मिलता है जिसका अर्थ प्रमुख, परम, अधिपति, राजा, सामन्त आदि था.

ऐतिहासिक सन्दर्भों में बुम-ख़्वातवा जैसे सन्दर्भ भी मिलते है. यहाँ बुम वही है जो संस्कृत हिन्दी में भूमि है. इस तरह बुम-ख़्वातवा का आशय ज़मींदार, क्षेत्रपाल या क्षेत्रपति हुआ जो आमतौर पर राजाओं की उपाधि है. तो सोग्दी ज़बान के ख्वातवा या खाती का स्त्रीवाची हुआ ख़्वातीन या ख़ातून जिसमें राजा, श्रीमन्त, सामन्त की स्त्री अथवा कुलीन या भद्र महिला का आशय था. उर्दू में ख़ातून का बहुवचन ख़वातीन होता है.

प्रसंगवश संस्कृत के 'क्ष' वर्ण में क्षेत्र, भूमि, किसान और रक्षक का अर्थ छुपा है. क्षत्रप शब्द ईरान में शत्रप/खत्रप रूप में प्रसारित था. जहाँ से यह ग्रीक में सट्रप बन कर पहुँचा. ग्रीक ग्रंथों में ईरान और भारत के क्षत्रपों का उल्लेख इसी शब्द से हुआ है.

इसकी व्युत्पत्ति प्राचीन ईरानी के क्षत्रपवान से मानी जाती है जिसका अर्थ है राज्य का रक्षक. इसमें क्षत्र+पा+वान का मेल है. 'क्षत्र' यानी राज्य, 'पा' यानी रक्षा करना, पालन करना और 'वान' यानी करनेवाला.

गौर करें इससे ही बना है फारसी का शहरबान शब्द जिसमें नगरपाल का भाव है. इसे मेयर समझा जा सकता है. याद रखें संस्कृत के वान प्रत्यय का ही फारसी रूप है बान जैसे निगहबान, दरबान, मेहरबान आदि. संस्कृत वान के ही वन्त या मन्त जैसे रूप भी हैं जैसे श्रीवान या श्रीमन्त. रूपवान या रूपवंत आदि.

क्षत्र जिसके तमाम अर्थों अर्थात शक्ति, अधिराज्य, सामर्थ्य या इससे बने क्षत्रिय शब्दों पर गौर करें तो क्षण् में निहित वचन का महत्व स्पष्ट होता है.

एक क्षत्रप यानी प्रजापालक, एक क्षत्रिय यानी सैनिक हमेशा ही समाज के प्रति उसकी सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए वचनबद्ध होता है.

मैदान, भूमि, इलाका, राज्य, जन्मभूमि के अर्थ में क्षेत्र का जन्म भी क्ष से ही हुआ है और पृथ्वी के अर्थ में क्षिति शब्द का मूल भी यही है. राजा को क्षेत्रपाल इसीलिए कहते थे. शाह में क्षेत्रपाल वाली अर्थवत्ता ही है.

मोटे तौर पर अवेस्ता से संस्कृत की समानता कही जा सकती है, पर मूलतः उसे वैदिकी कहना ठीक होगा. अवेस्ता में अर्यनम-क्षथ्र या आर्याणाम क्षथ्र नाम मिलता है, जिसका अर्थ है आर्यशासित क्षेत्र. इस इलाके से तात्पर्य समूचे मध्यएशिया से था. गौरतलब है, ईरान शब्द आर्याणाम से ही निकला है. अवेस्ता के क्षथ्र का अर्थ हुआ इलाका या राज्य.

नाम बदलने की राजनीति

इमेज स्रोत, Getty Images

गौर करें, क्षथ्र संस्कृत के क्षेत्र का ही रूपांतर है जो त्र के स्थान पर थ्र हो जाने से हुआ है. संस्कृत का मित्र अवेस्ता में मिथ्र हो जाता है जिसका अर्थ सूर्य है.

ईरानी और फिर फारसी में क्षथ्र का रूप बदला. क्ष व्यंजन से क ध्वनि का लोप हुआ और शेष रहा श. फिर थ्र से त ध्वनि का लोप हुआ और र ध्वनि का वियोजन होने से ह और र ध्वनियां अलग-अलग हो गई. इस तरह क्षथ्र का फारसी रूप हुआ शह्र जो उर्दू में भी शह्र और हिन्दी में शहर बन कर प्रचलित है.

स्थान नाम के साथ क्षेत्र शब्द का इस्तेमाल हमारे यहां होता रहा है. खेत इसका ही रूपांतर है जैसे सुरईखेत, छातीखेत, साकिनखेत, रानीखेत. ये सभी स्थान उत्तराखण्ड में आते हैं. हरियाणा के कुरुक्षेत्र में यह अपने मूल स्वरूप में नज़र आ रहा. शहर की खासियत होती है उसका फैलाव या विस्तार.

कार्टून

शब्दों की गवाहियां

जरथ्रुस्तवादी (पारसी) अगर अपने देश को आर्याणाम-क्षथ्र कहते थे तो उसमें आर्यों के विशाल क्षेत्र में फैलाव का भाव ही था, जो सिन्धु से लेकर वोल्गा तक विस्तृत था.

देवनागरी की क्षह् ध्वनि में ही विस्तार छुपा है. क्ष (क्षह्) का अर्थ भी क्षेत्र, खेत और किसान ही होता है. संस्कृत के क्षेत्र का अर्थ होता है भूमि, मैदान अथवा स्थान. यह बना है क्षि क्रिया से जिसमें शासन करना या राज्य करना जैसे भाव हैं. फ़ारसी में शह्रेवर (शहरेवर) एक महीने का नाम है. शहरयार का अर्थ है राजा, शासक, शहंशाह. शहरबान यानी नगरपाल या मेयर.

कुल मिला कर उपरोक्त अनेक सजातीय शब्दों की छाया में जो 'शह' साफ़ नज़र आ रहा है उससे यह समझना आसान है कि संस्कृत विसर्गयुक्त क्ष का ईरानी उच्चार क्षह् होगा और उसका रूपान्तर शह/ शाह होगा. इसी क्रम में राजसी के अर्थ में शाह का रूप शाही हो गया. उप्र बिहार में शाही उपनाम भी है.

अमित शाह

इमेज स्रोत, @AmitShah

दरअसल ये सिंह, सिन्हा, सहाय जैसे नामों के रूपभेद से बन गया लगता है. मुमकिन है, प्रतिष्ठित भूपतियों को 'शाही' उपाधि दी गई हो. पर शाह से बना शाही प्रत्यय, उपसर्ग की तरह जहाँ कहीं नज़र आता है, उसमें शाह की महिमा समाहित होती है.

फ़ारसी पदनामों का बरताव हिन्दुस्तान में नया नहीं है. दीवान, कानूनगो, वजीर, वकील, मोदी, मुसद्दी, मुनीम, जागीरदार, फ़ौज़दार वग़ैरह जैसी एक लम्बी फ़ेहरिस्त है. इन पर आगे कभी बात की जाएगी.

अभी इतना ही कि भाषा ही अकेला ऐसा तत्व है जो हमें अतीत से जोड़े रखता है. शब्दों की गवाहियाँ, पुरातात्विक साक्ष्य से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. वे जीवित प्रमाण हैं.

(यह लेखक की व्याख्या है और बीबीसी इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आपयहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)