नाम बदलने की राजनीति किस ओर इशारा करती है

शिमला
    • Author, मानसी दाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

17 अक्तूबर को आधिकारिक रूप से इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज कर दिया गया. दलील थी कि शहर का पुराना नाम प्रयाग था और मुग़लकाल में 16वीं सदी के आख़िर में इलाहाबाद कर दिया गया.

इस बात को कुछ चार ही दिन हुए थे कि भाजपा प्रशासित हिमाचल प्रदे श की राजधानी शिमला का नाम बदलकर 'श्यामला' करने की चर्चा तूल पकड़ने लगी.

हाल में प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मीडिया के सामने इस मुद्दे पर विचार करने की बात की.

उन्होंने कहा, "इस बात को लेकर हमारे पास कई सुझाव आए हैं. बहुत सारी चीज़ें हैं जो अंग्रेज़ों की ग़लत बातों का स्मरण कराती हैं."

"ये प्रचलित नाम थे तो उन्होंने रख लिए लेकिन और उन नामों को आज भी उसी तरह से चलाया जा रहा है. हम इस पर विचार कर रहे हैं."

"अंग्रेज़ों के समय में कई बुरी बातें हुई हैं और उन बातों को स्मरण करें तो लगता है कि उसे परिवर्तन करना चाहिए. लेकिन मुझे लगता है कि इस पर लोगों की तरफ से सुझाव भी मांगे जाने चाहिए."

शिमला

इमेज स्रोत, AFP/Getty Images

पहले भी हुईं शिमला का नाम बदलने की कोशिशें

मुख्यमंत्री की मानें तो ब्रितानी शासन काल में पहाड़ों में बसे इस शहर का नाम बदल दिया गया था.

वहीं तीस साल से भी लंबे वक्त से शिमला की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी शर्मा मानते हैं कि ऐसा नहीं है कि पहली बार ऐसी कोशिश की गई हो.

वो कहते हैं, "कई बार विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के छात्र संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा और इसकी यूथ विंग ने कई बार राज्यपाल को इसके लिए ज्ञापन भी दिए हैं. लेकिन अभी तक इस मांग का कोई जस्टिफिकेशन नहीं मिला है सरकार को."

लेकिन इसके बावजूद सवाल ये उठता है कि किसी शहर का नाम बदलने की राजनीति या ऐसी चर्चा को बार-बार उछालने से सरकार या फिर हिंदुत्ववादी संगठनों को क्या हासिल होगा. क्या इसका नाता चुनावों में हिंदुत्व एजेंडे को बढ़ाने से जुड़ा हो सकता है?

अश्विनी शर्मा बताते हैं, "शिमला में पूजी जाने वाली एक देवी का नाम श्यामला है जिनके नाम पर शिमला का नाम बदलने की राजनीति हो रही है. वो कहते हैं कि हिमाचल में हज़ारों देवी देवताओँ के मंदिर हैं- लगभग हर गांव में अपनी देवी का मंदिर है."

"अगर इस तर्ज पर जगहों के नाम बदले जाएं तो यह प्रक्रिया अपने आप में सरकार के लिए परेशानी का कारण बन सकती है."

शिमला

हालांकि ये कभी यहां होने वाले चुनावों का मुद्दा बन सकती है, इससे अश्विनी शर्मा इनकार करते हैं. वो कहते हैं कि सीधे तौर पर देखें तो लोकसभा सीट के तौर पर शिमला में चार ज़िले आते हैं और सभी की अपनी समस्याएं हैं और फ़िलहाल गर्मियों में पानी का संकट सबसे बड़ा है.

वो कहते हैं, "इसे शिमला में चुनावी मुद्दा ही बनाना होता तो भाजपा ऐसा नगर निगम चुनाव के दौरान करती. एक तबका इसे बहसबाज़ी का मुद्दा बना रहा है और सोशल मीडिया में इसे लेकर प्रचार कर रहा है."

"सरकार, प्रबुद्ध जनता, लेखक या फिर पुरातत्व विभाग या किसी और पक्ष की तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन नहीं है."

सरकार में दिखती है 'आत्मविश्वास की कमी'

नाम बदलने की राजनीति पर वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "लगता ये है कि चुनाव में जाने से पहले भाजपा में कहीं ना कहीं आत्मविश्वास की कमी दिखती है और वो धार्मिक ध्रुवीकरण चाहती है."

"वो चाहती है कि ऐसा विवाद उठे जिससे बहस हिंदू-मुसलमान पर सिमट जाए और वर्तमान के ज्वलंत मुद्दे - जैसे बेरोज़गारी, महंगाई या कानून व्यवस्था इन सबसे लोगों का ध्यान हट जाए."

मायावती

हालांकि इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता कि भाजपा से पहले बसपा प्रमुख मायावती भी इस तरह की राजनीति अपना चुकी हैं लेकिन उनका फैसला दलित चिंतकों या समाजसेवियों (जैसे आंबेडकर, ज्योतिबा फुले) के नाम को आगे बढ़ाने से जुड़ा रहा.

रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "उनको ये शिकायत थी कि आज़ादी के बाद प्रमुख जगहों के नाम अभिजात्य वर्ग से जुड़े लोगों के नाम पर रखे गए थे जबकि दलित या पिछड़े समुदायों के लिए काम करने वाले नायकों को भुला दिया गया था. हालांकि ये भी दलित और पिछड़े लोगों को गोलबंद करने की कोशिश थी."

"कह सकते हैं कि जबसे संघ का जन्म हुआ है मुस्लिम विरोधी उनके डीएनए में है. वो ढूंढ-ढूंढ कर ऐसा मुद्दा ले कर आते हैं जिससे वो मुस्लिम विरोध में हिंदुओं को, एक ख़ास प्रवृत्ति के हिंदुओं को निशाना बनाते हैं उनको एकजुट करते हैं."

शिमला

इमेज स्रोत, AFP/Getty Images

फ़िलहाल शिमला का नाम जल्द ही श्यामला में बदलेगा ऐसा नहीं लगता और जानकारों की मानें तो आगामी चुनावों में विकास के मुद्दों के सामने ये मुद्दा फीका ही रहेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)