CBI विवाद: इस घटनाक्रम के आधार पर सुप्रीम कोर्ट करेगा फ़ैसला

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    • Author, टीम बीबीसी हिन्दी
    • पदनाम, नई दिल्ली

भारत का उच्चतम न्यायालय आज यानी शुक्रवार को सीबीआई विवाद पर सुनवाई करेगा.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ़ की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी.

कोर्ट सीबीआई के मामले से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा.

पहली याचिका सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा की होगी जिन्होंने भारत सरकार द्वारा उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के फ़ैसले को चुनौती दी है. आलोक वर्मा को मंगलवार की देर रात छुट्टी पर भेजा गया था.

वहीं इस अहम सुनवाई से पहले सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने पूर्व अटार्नी जेनरल मुकुल रोहतगी से मुलाकात की.

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल और सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता फाली एस. नरीमन ने रखा जबकि सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने जिरह करेंगे.

वहीं इस मामले में दूसरी याचिका वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के एनजीओ 'कॉमन कॉज़' द्वारा दाख़िल की गई है जिसकी दलील है कि भ्रष्टाचार के अभियुक्त राकेश अस्थाना को तुरंत सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर के पद से हटाया जाए और इस मामले की जाँच के लिए स्पेशल जाँच टीम का गठन किया जाए.

देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फ़ैसला सरकार के पक्ष में सुनाती है या आलोक वर्मा के पक्ष में.

अगर फ़ैसला आलोक वर्मा के पक्ष में आता है तो भारत की वर्तमान राजनीति में ये एक बेहद अहम फ़ैसला होगा और इसके दूरगामी प्रशासनिक और सियासी परिणाम हो सकते हैं.

लेकिन अब तक इस मामले में कब-क्या हुआ, इसे एक टाइम-लाइन के ज़रिए समझिए:

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15 अक्तूबर

  • सीबीआई ने रिश्वतखोरी का एक मामला दर्ज किया और एफ़आईआर में अपने ही स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ साज़िश करने और रिश्वत लेने के आरोप लगाये.
  • सीबीआई ने हैदराबाद के बिज़नेसमैन सतीश बाबू की शिक़ायत पर ये एफ़आईआर दर्ज की थी.
  • सतीश बाबू का आरोप है कि उन्होंने मोइन क़ुरैशी केस में अपने ख़िलाफ़ जाँच को रुकवाने के लिए 3 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी.
  • सतीश बाबू का दावा है कि उन्होंने दुबई में रहने वाले इनवेस्टमेंट बैंकर मनोज प्रसाद की मदद से ये रिश्वत राकेश अस्थाना तक पहुँचाई थी.
  • सतीश बाबू के ख़िलाफ़ सीबीआई जो जाँच कर रहा था, उसकी अगुआई राकेश अस्थाना ही कर रहे थे.
  • 15 अक्तूबर को सीबीआई ने जो एफ़आईआर दर्ज की थी, उसमें सीबीआई के उप-पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार, दुबई में रहने वाले मनोज प्रसाद और उनके भाई सोमेश्वर प्रसाद को भी नामित किया था.

(फ़िलहाल देश की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी सीबीआई में जो दंगल जारी है, उसके तार कहीं न कहीं मोइन क़ुरैशी केस से जुड़े हैं. पढ़िये सीबीआई को हिला देनेवाले मोइन क़ुरैशी केस की पूरी कहानी.)

मोइन क़ुरैशी

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16 अक्तूबर

  • सीबीआई ने रिश्वतखोरी के इस मामले में कथित बिचौलिए मनोज प्रसाद को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया.
  • सीबीआई ने कहा कि मनोज प्रसाद को 25 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में रखा जाएगा और उनसे पूछताछ की जाएगी.
  • सीबीआई की एफ़आईआर के अनुसार, मनोज प्रसाद ने ये दावा किया था कि वो सीबीआई में कई बड़े लोगों को जानता है और जाँच को रुकवा सकता है.

20 अक्तूबर

  • सीबीआई ने मजिस्ट्रेट के समक्ष मुख्य शिक़ायतकर्ता सतीश बाबू का बयान दर्ज किया.
  • सीबीआई के उप-पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार जिस वक़्त 'मोइन क़ुरैशी केस' की जाँच कर रहे थे, उस समय उन्होंने इस केस के एक गवाह सतीश बाबू के नाम समन जारी किया था.
  • सीबीआई के अनुसार, सतीश बाबू को 'मोइन क़ुरैशी केस' में राहत देने के लिए उनके अफ़सरों ने रिश्वत ली थी.
  • इसी दिन दोपहर बाद सीबीआई ने देवेंद्र कुमार के घर और सीबीआई भवन में उनके दफ़्तर पर छापे मारकर कुछ अहम दस्तावेज़ ज़ब्त करने का दावा किया.
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22 अक्तूबर

  • सीबीआई ने उप-पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार को जाँच से जुड़े सरकारी दस्तावेज़ों में हेरफेर के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया.
  • जाँच एजेंसी ने कहा कि "ये हेरफेर सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के रिश्वत लेने के आरोप से जुड़ा है."
  • सीबीआई के प्रवक्ता अखिलेश दयाल ने अपने बयान में कहा कि ''सीआरपीसी के सेक्शन-161 के तहत मोइन क़ुरैशी केस के एक गवाह सतीश बाबू का जो बयान गढ़ा गया है, उसके बारे में कहा जा रहा है कि दिल्ली में 26 सितंबर को ये बयान रिकॉर्ड किया गया. जाँच में पता चला है कि उस दिन सतीश बाबू दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे. उस दिन वो हैदराबाद में थे. यानी सतीश बाबू का बयान एक 'काल्पनिक' बयान था जिसपर जाँच अधिकारी के तौर पर देवेंद्र कुमार के हस्ताक्षर है.''
  • देवेंद्र कुमार पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने सतीश बाबू का एक 'काल्पनिक बयान' इसलिए पेश किया क्योंकि उनका उद्देश्य सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा पर राकेश अस्थाना द्वारा लगाए गए आरोपों को बल देना था.
  • इस आधार पर सीबीआई ने अपनी एफ़आईआर में देवेंद्र कुमार को अभियुक्त नंबर दो और राकेश अस्थाना को अभियुक्त नंबर एक बनाया.
  • इसी बीच मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और कैबिनेट सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखकर राकेश अस्थाना ने डायरेक्टर आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ हरियाणा में एक ज़मीन के सौदे में गड़बड़ी करने और भ्रष्टाचार के दूसरे कथित मामलों की शिक़ायत की.
  • राकेश अस्थाना ने ये आरोप लगाया है कि आलोक वर्मा ने भी सतीश बाबू से दो करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी.

(कहा जा रहा है कि राकेश अस्थाना ने ये शिक़ायती चिट्ठियाँ 18 से 22 अक्तूबर के बीच लिखीं. सीबीआई के कई जानकार इशारों में कहते हैं कि राकेश अस्थाना ने ये ख़त किसी की शह पर लिखे थे.)

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राकेश अस्थाना वर्ष 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं

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23 अक्तूबर

  • राकेश अस्थाना और देवेंद्र कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर सीबीआई की एफ़आईआर को चुनौती दी.
  • सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में ये दावा किया कि "दोनों अभियुक्त अफ़सर सीबीआई के हेडक्वार्टर में बैठकर जाँच में राहत देने के बदले पैसे वसूलने का एक रैकेट चला रहे थे".
  • कोर्ट में पेशी के बाद उप-पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार को सात दिन के लिए सीबीआई की हिरासत में भेज दिया गया.
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने अस्थाना के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को ख़ारिज तो नहीं किया, पर चंद दिनों के लिए उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी.
  • कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ जाँच को ये कहते हुए रोकने से मना कर दिया कि उन पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं.
  • रात 9 बजे सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने एक आदेश जारी कर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना से सारी ज़िम्मेदारियां वापस ले लीं. उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि "भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा अधिकारी जिसकी जाँच चल रही हो, उसे दफ़्तर की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ नहीं दी जा सकतीं".
  • इससे कुछ देर बाद मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) ने एक आदेश जारी किया और कहा कि सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा उनके ख़िलाफ़ लगे आरोपों की जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.
  • देर रात भारत सरकार के 'डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सोनेल एंड ट्रेनिंग' (डीओपीटी) के दो आदेश आये और राकेश अस्थाना के साथ सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा को भी छुट्टी पर भेज दिया गया.
  • डीओपीटी ने कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी के हवाले से आदेश जारी किया कि "सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर (चौथे नंबर के अधिकारी) एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से अंतरिम निदेशक बनाया जाता है."
  • सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, देर रात क़रीब पौने दो बजे एम नागेश्वर राव ने सीबीआई के सीजीओ कॉम्पलेक्स स्थित एजेंसी मुख्यालय पहुँचकर सीबीआई के डायरेक्टर का चार्ज ले लिया. इतना ही नहीं, नागेश्वर राव ने आलोक वर्मा के कार्यालय को सील भी करवा दिया.
  • राव ने पद संभालते ही एजेंसी के 13 अधिकारियों के तबादले कर दिए. राव द्वारा हटाये गए अधिकारियों में वो अधिकारी भी शामिल हैं जो अस्थाना के ख़िलाफ़ घूसखोरी की जाँच कर रहे थे.
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24 अक्तूबर

  • छुट्टी पर भेजे जाने के ख़िलाफ़ आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट में याचिका लेकर पहुँचे. आलोक वर्मा ने केंद्र सरकार पर ग़लत तरीक़े से संस्थान की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया.
  • आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि क़ानून के मुताबिक़ सरकार उन्हें इस तरह अचानक नहीं हटा सकती है.
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि "दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और इसकी निष्पक्ष जाँच के लिए किसी तीसरे आदमी ज़रूरत थी".
  • जेटली ने कहा कि जाँच पूरी होने तक दोनों अधिकारियों को कार्यभार से मुक्त रखा जाएगा. सरकार ने जो फ़ैसला लिया है वो पूरी तरह से क़ानूनसम्मत है.
  • अरुण जेटली के तर्कों का जवाब देने के लिए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी एक प्रेस वार्ता की और कहा, "मोदी सरकार ने असंवैधानिक रूप से सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को हटाया. सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेज कर इन लोगों ने देश के सर्वोच्च न्यायालय का अपमान किया है. नियमों के मुताबिक़ दो वर्ष तक सीबीआई प्रमुख को पद से हटाया ही नहीं जा सकता. इसका प्रावधान सीबीआई एक्ट के सेक्शन 4 (a) और 4 (b) में है."
  • सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा की याचिका को स्वीकार करके उसकी सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन मुकर्रर किया. भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक बेंच सरकार के ख़िलाफ़ दाख़िल हुई इस याचिका पर सुनवाई करेगी.
प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा

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25 अक्तूबर

  • इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने ख़बर छापी कि जब सीबीआई के डायरेक्टर अलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया तब उनके पास सात महत्वपूर्ण मामलों की फ़ाइलें थीं. इसमें रफ़ाल सौदा, मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया में रिश्वत का मामला, कोयले की खादानों के आवंटन के मामलों की फ़ाइलें शामिल हैं जिनपर सीबीआई काम कर रहा है.
  • बीबीसी से बातचीत में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा कि "ये कितनी हैरानी की बात है कि जो नरेंद्र मोदी सभी को सीबीआई के डंडे से डरा रहे थे वो अब ख़ुद सीबीआई से डरे हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डरने की तीन वजहें हैं. सबसे पहले तो उन्हें ये डर था कि सीबीआई में उनके ख़ास आदमी राकेश अस्थाना पर अगर अधिक दबाव पड़ा तो वो राज़ खोल सकते हैं. दूसरा डर ये कि सीबीआई का वो जिस तरह से इस्तेमाल करना चाह रहे थे कर नहीं पा रहे थे. उनका तीसरा डर ये था कि अगर आलोक वर्मा जैसा स्वतंत्र अधिकारी रफ़ाल पर जांच कर देता, तो क्या होता क्योंकि सीबीआई के निदेशक को जांच शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री या किसी और की अनुमति की आवश्यक्ता नहीं होती है."
  • कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि "सीबीआई के डायरेक्टर को पद पर लाने या उन्हें हटाने के लिए तीन लोगों का कमेटी में होना ज़रूरी है. प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष इसमें होने चाहिए. लेकिन रात दो बजे एक आदेश जारी कर सीबीआई के डायरेक्टर को हटा दिया गया. ये संविधान का अपमान है. ये एक अपराध है."
  • सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा, "हम सीबीआई की छवि और विश्वसनीयता को बट्टा नहीं लगने दे सकते. सीबीआई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई केस लड़ रही है. अगर एजेंसी की छवि ख़राब होती है तो कई प्रमुख मामलों पर इसका प्रभाव पड़ेगा."
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