ख़ाशोज्जी की हत्या सच पर पर्दा डालने की इतिहास की सबसे बुरी कोशिश: डोनल्ड ट्रंप

ट्रंप, सऊदी

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पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या पर मंगलवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के बयान के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी इस पूरे मामले में सऊदी अरब की प्रतिक्रिया पर बयान दिया है.

उन्होंने कहा कि जमाल खाशोज्जी की हत्या पर सऊदी की ओर से दी गई प्रतिक्रिया 'अब तक की सबसे बुरी सच छिपाने की कोशिश है. इस हत्या में जो भी शामिल हो उसे इसका ख़ामियाज़ा भुगतना चाहिए.'

व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ''उनकी अवधारणा बेहद बुरी थी. इसे उतने ही बुरे तरीके से अंजाम दिया गया और सच छिपाने के इतिहास में ये सबसे बुरा सच छिपाने का तरीका है. इसके पीछे जो भी है उसे अब बड़ी परेशानी में होना चाहिए और मुझे लगता हैं वे परेशानी में हैं भी. ''

राष्ट्रपति ट्रंप के बाद अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ''अमरीका दोषियों को सज़ा देगा. जिन 21 संदिग्ध लोगों की मामले में ग़िरफ़्तारी हुई है उनका वीज़ा अमरीका रद्द कर रहा है.''

खाशोज्जी

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जमाल ख़ाशोज्जी पर बदलता सऊदी रुख

दो अक्टूबर को वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी तुर्की के अंकारा स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास गए थे जिसके बाद वे वापस नहीं आए. 17 दिनों तक सऊदी सरकार ने इसपर कई अलग-अलग बयान दिए, लेकिन तमाम सवालों और लंबे इंतज़ार के बाद सऊदी अरब ने माना कि दूतावास में 'एक संघर्ष' में उनकी मौत हुई.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में माइक पोम्पियो ने बताया, ''मैं और राष्ट्रपति ट्रंप मौजूदा स्थिति से नाखुश हैं. हम ये साफ़ कर देना चाहते हैं कि खाशोज्जी को चुप करने के लिए किए गए इस कृत्य को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. ''

क्या प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सफ़ाई पर अमरीका यक़ीन करेगा? इस सवाल के जवाब में पोम्पियो ने कहा, '' हम उस पर यक़ीन करेंगे जो हमें नज़र आएगा.''

''हमारे पास अपनी समझ तय करने के लिए पूरी दुनिया में काम कर रहे लोग हैं. हमें अपना डेटा तैयार करना होगा और तथ्यों के आधार पर ख़ुद समझना होगा. ''

मंगलवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने संसद के सामने बताया कि पत्रकार ख़ाशोज्जी की मौत एक 'सुनियोजित योजना' के तहत की गई थी. उन्होंने कहा कि तुर्की के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि दो अक्टूबर को ख़ाशोज्जी की हत्या से पहले उनके साथ बर्बरता की गई थी.

खाशोज्जी, सऊदी अरब

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इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संदिग्धों को इस्तांबुल लाया जाए और यहां मामले की जांच कराई जाए.

मंगलवार को राष्ट्रपति जिस वक़्त तुर्की की संसद में इस मामले पर बोल रहे थे उसी वक़्त सऊदी अरब में इंवेस्टमेंट कॉन्फ़्रेंस चल रही थी जिसपर ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले का प्रतिकूल असर पड़ा है.

कई राजनेताओं ,व्यापरियों और निवेशकों ने इस आयोजन से दूरी बनाई है. इस सम्मलेन में 140 फ़र्मों के 150 हाई प्रोफ़ाइल वक्ता बोलने वाले थे, लेकिन अब 40 लोगों ने ख़ुद को इस सम्मलेन से अलग कर लिया है.

दुनियाभर के कई नेताओं ने पत्रकार ख़ाशोज्जी की हत्या की आलोचना और इसकी सघन जांच की मांग की है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने जहां एक ओर सऊदी अधिकारियों पर हमला बोला है, वहीं दूसरी ओर एक सहयोगी के तौर पर सऊदी की अमरीका के लिए महत्ता का भी ज़िक्र किया.

सीआईए निदेशक गिना हासपल को मामले की समीक्षा के लिए तुर्की भेजा गया है.

सऊदी क्या कर रहा है?

किंग सलमान ने मंगलवार को एक कैबिनेट बैठक बुलाई. इस बैठक के बाद एक बयान में उन्होंने बताया कि जो भी इस हत्या के लिए ज़िम्मेदार है उसे जवाब देना होगा.

सऊदी की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ किंग और क्राउन प्रिंस ने रियाद में भी ख़ाशोज्जी के परिवार के साथ बैठक की जिसमें जमाल ख़ाशोज्जी के बेटे सालाह बिन जमाल भी शामिल थे.

प्रिंस सलनमान

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अब तक सऊदी ने इस हत्या के मामले में कई बार विरोधाभासी बयान दिए हैं. शुरुआत में सऊदी ने दावा किया कि ख़ाशोज्जी दूतावास से ज़िंदा बाहर निकले थे. उसके बाद 'संघर्ष' में मारे जाने की बात कबूल की.

रविवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने माना कि जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या हुई, लेकिन उनके मुताबिक नेतृत्व को इस 'ऑपरेशन' की जानकारी नहीं थी. साथ ही उन्होंने कहा कि जमाल का पार्थिव शरीर कहां है इसे लेकर सऊदी अरब को कोई जानकारी नहीं है.

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बेहद क़रीबी माने जाने वाले दो लोगों डिप्टी इंटेलिजेंस प्रमुख मेजर जनरल अहमद असीरी और शाही दरबार के मीडिया सलाहकार सऊद अल-क़हतानी को शाह सलमान ने इसी मामले की वजह से बर्ख़ास्त कर दिया है.

सऊदी अरब

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मेजर जनरल अहमद असीरी को मोहम्मद बिन सलमान के क़रीबी लोगों में बेहद अहम माना जाता है. जनरल असीरी उस समय सुर्ख़ियों में आए जब 2015 में यमन की जंग की शुरुआत हुई. उन्होंने सऊदी अरब के पड़ोसी देश यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के नेतृत्व में बनने वाले गठबंधन के प्रवक्ता की भूमिका निभाई थी.

तुर्की ने सबसे पहले कहा था कि ख़ाशोज्जी की इस्तांबुल स्थित वाणिज्य दूतावास में सऊदी ने जानबूझकर हत्या करवाई है.

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