प्रेस रिव्यू: क्या सीबीआई के झगड़े से विजय माल्या को होगा फायदा?

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टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक जांच एजेंसी सीबीआई में आपसी तकरार से शराब करोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण का मामला कमजोर पड़ सकता है.
अख़बार के अनुसार सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ही विजय माल्या के मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे थे. राकेश अस्थाना पर ही मांस कारोबारी मोइन क़ुरैशी के मामले में रिश्वत लेने का आरोप है.
विजय माल्य पर बैंकों से लिया गया 9 हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ ना चुकाने का आरोप है. मामले की जांच शुरू होने के बाद माल्या ब्रिटेन चले गए थे.
माल्या मार्च 2016 में ब्रिटेन गए थे और तभी से लंदन में रह रहे हैं. भारत सरकार ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई है.
अब वह सीबीआई में चल रही तकरार का फ़ायदा उठाते हुए कह सकते हैं कि उन्हें ऐसे व्यक्ति की जांच के आधार पर भारत नहीं भेजा सकता जो ख़ुद एक अभियुक्त है.
विजय माल्या के वकील उनके प्रत्यर्पण को रोकने के लिए राकेश अस्थाना और सीबीआई पर हमला करने से गुरेज़ नहीं करेंगे.
इससे पहले माल्या भारतीय जेलों में क़ैदियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं ना होने का हवाला दे चुके हैं. इसके बाद भारत सरकार की ओर से जेल का वीडियो बनाकर भेजा गया था.
विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में 10 दिसंबर को सुनवाई होनी है.

फिर उठा इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ एमिनेंस का मामला
इंडियन एक्सप्रेस ने इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ एमिनेंस से जुड़ी ख़बर दी है. आईआईटी मद्रास ने मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर गहरी निराशा जाहिर की थी कि यूजीसी के सेलेक्शन पैनल की सिफ़ारिश के बावजूद भी उन्हें इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ एमिनेंस के लिए नहीं चुना गया.
आईआईटी मद्रास के अध्यक्ष पवन गोएनका ने जुलाई में इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ एमिनेंस में आने वाले संस्थानों की घोषणा के एक महीने बाद ही इस संबंध में पत्र लिखा था.
एम्पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (ईईसी) ने 114 संस्थानों में से 11 संस्थानों को इस श्रेणी के लिए चुना था. इनमें आईआईटी मद्रास का नाम था. इनमें से छह संस्थानों को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2018 के आधार पर अंतिम तौर पर चुना गया.
आईआईटी मद्रास ने इस चयन के लिए एक व्यावसायिक एजेंसी की रैंकिंग को आधार बनाने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि चयन के लिए न तो ईईसी की सिफ़ारिश और न ही सरकार का अपने नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ़्रेमवर्क (एनआईआरएफ) को आधार बनाया गया है.
एनआईआरएफ़ ने आईआईटी मद्रास को लगातार तीन बार सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थान माना था. इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ एमिनेंस का मामला इससे पहले तब उठा था जब जियो इंस्टीट्यूट को इस श्रेणी में रखा गया था जो कि अभी अस्तित्व में ही नहीं है.

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दिवाली पर दो घंटे जलेंगे पटाखे
हिंदुस्तान ने पटाखे जलाने को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ख़बर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए दिवाली पर सिर्फ़ दो घंटे पटाखे जलाने का आदेश दिया है. ये समय रात 8 बजे से 10 बजे तक होगा.
इस आदेश का पालन करवाने की ज़िम्मेदारी संबंधित इलाके के थानाध्यक्ष की होगी. अगर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होता है तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा.
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि दिवाली के लिए सिर्फ़ ग्रीन पटाखे ही बनाए और बेचे जाएंगे. कोर्ट ने तय सीमा में आवाज़ और धुएं वाले पटाखों को ही ग्रीन पटाखे माना है. जिनमें नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फ़र डाइऑक्साइड की कम मात्रा निकलती है.
साथ ही ये भी कहा है कि दिल्ली और एनसीआर में जहां भी मुमकिन है सामूहिक रूप से पटाखे जलाए जाएं. ये आदेश सिर्फ़ दिवाली ही नहीं बल्कि किसी भी धार्मिक और सामाजिक पर्व पर भी लागू होगा.

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कुतुबमीनार से भी ऊंचा कचरे का ढेर
अमर उजाला की ख़बर के अनुसार दिल्ली में 70 एकड़ में फैली भलस्वा लैंडफ़िल साइट पर कूड़े के ढेर की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी ज्यादा हो गई है.
कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है. वहीं, जमीन पर कूड़े के ढेर की ऊंचाई 60 मीटर है और ज़मीन के अंदर 12 मीटर के दायरे में कूड़ा फैला है.
साइट पर 80 लाख मीट्रिक टन कूड़ा है. इस साइट पर 21 अक्टूबर (रविवार) को लगी आग की घटना पर संज्ञान लेते हुए उत्तरी दिल्ली के मेयर आदेश गुप्ता और कमिश्नर मधुप व्यास ने मंगलवार को यहां का निरीक्षण किया.
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