You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
#MeToo: राजनीतिक दलों में कहां शिकायत करें लड़कियां?
- Author, मोहम्मद शाहिद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर चले #MeToo अभियान के बाद अब केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने राजनीतिक दलों में यौन उत्पीड़न पर एक शिकायत समिति बनाने का अनुरोध किया है.
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर को क़रीब बीस महिलाओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के अध्यक्ष फ़िरोज़ ख़ान को भी ऐसे आरोपों के चलते पद छोड़ना पड़ा.
#MeToo अभियान के ज़रिये सैकड़ों महिलाएं ख़ुद के साथ हुए यौन दुर्व्यवहारों की घटनाएं सोशल मीडिया पर ज़ाहिर कर चुकी हैं. इनमें कई दुर्घटनाएं उनके साथ कार्यस्थल पर हुई थीं.
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न क़ानून 2013 के अनुसार, दफ़्तरों में महिलाओं के साथ होने वाले यौन दुर्व्यवहारों के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) होनी चाहिए. लेकिन राजनीतिक दलों में ऐसी कोई समितियां नहीं होतीं, जबकि वहां भी महिलाएं काम करती हैं.
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने गुरुवार को ट्वीट करके कहा कि उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और प्रांतीय राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और प्रभारियों से अनुरोध किया है कि वे कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न क़ानून 2013 के तहत अपने यहां आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करें.
मेनका ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "कार्यस्थल पर महिलाओं को जो उत्पीड़न सहना पड़ता है, हर एक मामले का पता चले इसकी हम कोशिश कर रहे हैं."
अब तक कैसे होती थी शिकायत
इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट की थी कि 2013 के क़ानून और 1997 के विशाखा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद भी भाजपा और कांग्रेस समेत किसी ने भी अपने मुख्य कार्यालय में ऐसी शिकायत समिति का गठन नहीं किया है.
कांग्रेस सांसद और ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्षा सुष्मिता देवा कहती हैं कि उनकी पार्टी में एक अनुशासनात्मक समिति है और यही समिति ऐसी शिकायतों को सुनते हुए ऐसे मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित कर सकती है.
मेनका गांधी के अनुरोध को सुष्मिता एक शिगूफ़ा बताती हैं. वह कहती हैं कि भाजपा ख़ुद यौन दुर्व्यवहार को लेकर चिंतित नहीं है और उसने आज तक उन्नाव (उत्तर प्रदेश) में बलात्कार के आरोपी विधायक कुलदीप सिंगर को पार्टी से नहीं निकाला है.
सुष्मिता कहती हैं, "मेनका गांधी कौन होती हैं, यह सब कहने के लिए. वह पहले अपनी पार्टी ठीक करें और फिर किसी को कुछ लिखें."
एनएसयूआई के प्रमुख फ़िरोज़ ख़ान के इस्तीफ़े पर सुष्मिता कहती हैं कि उनकी पार्टी ने इस पर एक समिति बनाई जबकि एम.जे. अकबर पर बीजेपी ने कोई समिति नहीं बनाई.
भाजपा की राय
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न क़ानून के भाग चार के हिसाब से जिस संगठन में महिलाएं काम करती हैं, वहां एक अंदरूनी शिकायत समिति (आईसीसी) का होना ज़रूरी है जिसकी अध्यक्षता वहां काम करने वाली वरिष्ठ महिला कर्मचारी करेगी.
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने सभी बॉलीवुड प्रॉडक्शन हाउस को चिट्ठी लिखकर आईसीसी के गठन के लिए कहा था.
भाजपा सांसद और भारतीय जनता युवा मोर्चा की अध्यक्षा पूनम महाजन मेनका गांधी के इस विचार का स्वागत करती हैं.
वह कहती हैं, "निजी कंपनियों में विशाखा गाइडलाइंस के तहत समितियों का गठन होता है और आज राजनीतिक दल प्रोफ़ेशनल तरीक़े से काम कर रहे हैं. कोई भी संगठन हो, वहां महिलाओं का मान और सम्मान होना चाहिए."
भाजपा में यौन उत्पीड़न जैसे मामलों की महिलाएं शिकायत कहां कर सकती हैं? इस सवाल पर पूनम कहती हैं कि उनकी पार्टी एक परिवार के रूप में काम करती है और वहां शिकायत एवं अनुशासनात्मक समिति होती है जहां ऐसे मामले उठाए जा सकते हैं.
पूनम कहती हैं इन समितियों के सामने राजनीतिक और व्यक्तिगत मामले आते हैं लेकिन हो सकता है कि इनके आगे कभी ऐसी शिकायतें गई भी हों.
सुष्मिता देव के भाजपा पर हमले के जवाब में पूनम कहती हैं, "मैं राजनीति को अलग रखकर सिर्फ़ इतना कहना चाहती हूं कि महिलाओं को सम्मान दिलाने का काम महिला और पुरुषों दोनों का है. दोषारोपण से अच्छा है इस संबंध में काम किया जाए."
शिकायत समितियां बनेंगी या नहीं
कांग्रेस में ऐसी कोई शिकायत समिति होगी या नहीं इस पर पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद कहते हैं कि इस पर समिति बन जाए तो कोई हर्ज़ नहीं है लेकिन मेनका गांधी को ख़ुद अपनी पार्टी से इसकी शुरुआत करनी चाहिए.
वह कहते हैं, "कांग्रेस ऐसी शिकायतों को लेकर गंभीर है और हमारे यहां एक वरिष्ठ पद पर रहे व्यक्ति को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. लेकिन मोदी जी के मंत्रिमंडल में एक बलात्कार के आरोपी काफ़ी दिनों तक रहे. एक बच्ची से बलात्कार के अभियुक्त एक विधायक आज भी बीजेपी में हैं. तो मेनका गांधी अपनी पार्टी में पहले सुधार करें."
शकील अहमद कहते हैं कि ऐसी समिति को लेकर चुनाव आयोग भी अहम भूमिका अदा कर सकता है लेकिन ऐसी समितियों के आगे आपराधिक मामले आएंगे तो उन्हें कोर्ट जाना होगा.
भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं कि उनकी पार्टी ने अब तक इस मामले पर कोई स्टैंड नहीं लिया है लेकिन उनकी पार्टी महिला सशक्तिकरण के लिए काफ़ी काम कर ही रही है.
वह कहते हैं, "हमारी पार्टी एक परिवार की तरह है और घरों में कैसे शिकायत होती है. इसीलिए कोई गड़बड़ होती है तो घर की तरह ही हम उसे हल करते हैं. पार्टी स्तर पर किसी शिकायत समिति पर अभी तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ है."
48 विधायकों-सांसदों पर महिला अपराध के आरोप
चुनाव सुधारों को लेकर काम करने वाला संगठन एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 1,580 सांसदों-विधायकों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें से 48 के ख़िलाफ़ महिलाओं से जुड़े अपराध दर्ज हैं.
राजनीतिक दलों में आंतरिक शिकायत समिति बनाने के सुझाव पर आम आदमी पार्टी की विधायक और नेता अलका लांबा कहती हैं कि मेनका को साढ़े चार साल बाद ही यह सब क्यों याद आया है और अगर आया है तो वह ख़ुद इसकी क्यों नहीं पहल करती.
शिकायत समिति बनाने का अलका स्वागत करती हैं और कहती हैं कि हर पार्टी में उसके अध्यक्ष को इसकी पहल करते हुए ख़ुद ही समिति बनानी चाहिए.
आम आदमी पार्टी में ऐसी शिकायतों पर क्या किया जाता रहा है? इस सवाल पर अलका कहती हैं कि उनके यहां आज तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई और उनकी पार्टी में पुरुष-महिलाओं के बीच दोस्ताना संबंध हैं.
विभिन्न पार्टियों में शिकायत समिति बनेगी या नहीं, यह फ़ैसला पार्टियों को ही लेना है लेकिन एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, जिन 48 सांसदों-विधायकों के ख़िलाफ़ महिलाओं से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें 45 विधायक और तीन सांसद हैं.
इनमें भी सबसे अधिक 12 विधायक भाजपा के हैं. सात विधायक शिवसेना और छह विधायक तृणमूल कांग्रेस के हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)