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ब्लॉग: #MeToo और 'तेरा पीछा ना छोड़ूँगा सोणिए’
- Author, राजेश जोशी
- पदनाम, रेडियो एडिटर, बीबीसी हिंदी
कुछ समय पहले गाँव से पुराना रेडियो ले आया हूँ. सुबह-सुबह रेडियो सुनते हुए दफ़्तर के लिए तैयार होते हुए वो दिन याद आते हैं जब हम स्कूल के लिए तैयार होते थे और घर के एक कोने में रेडियो बजता रहता था.
हर महीने की पहली तारीख़ को किशोर कुमार का गाना बजता था - ख़ुश है ज़माना आज पहली तारीख़ है…. पहली को तनख़्वाह मिलने का दिन होता था. ये गाना सुनकर सभी ख़ुश दिखते थे.
रात को सोने से पहले पौने नौ बजे तराई की अँधेरी बस्तियों में रेडियो पर तक़रीबन रोज़ाना एक बुलंद आवाज़ गूँजती थी - ये आकाशवाणी है. अब आप देवकीनंदन पांडेय से समाचार सुनिए.
जैसे इन दिनों लगभग हर समाचार बुलेटिन की शुरुआत 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है' से होती है, तब देवकीनंदन पांडेय का पहला वाक्य होता था - प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने कहा है...
पौने नौ की ख़बरें सुनते सुनते हमें नींद आ जाती थी.
उन दिनों किशोर कुमार का एक पुराना गाना काफ़ी पॉपुलर था- लड़की चले जब सड़कों पे, आई क़यामत लड़कों पे. हम इतने बड़े तो थे कि ख़ुद के लड़का होने का एहसास हो, मगर इतना समझने लायक़ बड़े नहीं हुए थे कि लड़की के सड़कों पर चलने से लड़कों पर क़यामत कैसे आ जाएगी. वो अपने रस्ते जा रही है, हम अपने रस्ते!
क़यामत का गहरा अर्थ न भी मालूम हो फिर भी ये ज़रूर समझ में आता था कि क़यामत आने का मतलब कुछ गड़बड़ होना होता है. मसलन, अगर होमवर्क किए बिना स्कूल चले गए तो क़यामत आ सकती है.
ग़ुस्सा हसीन है तो प्यार...
हमें फ़िल्में देखने की मनाही का सवाल ही नहीं था क्योंकि गाँव के आसपास मीलों तक कोई सिनेमा हॉल ही नहीं था. पर रेडियो के ज़रिए किशोर कुमार से हम सीख रहे थे कि जब लड़कियाँ सड़कों पर चलती हैं तो लड़कों पर क़यामत आने का ख़तरा बना रहता है.
रविवार, 14 अक्तूबर, 2018. लौटते हैं वर्तमान में.
छुट्टी का दिन. बाहर फैली धूप सर्द दिनों के आने के संकेत दे रही है. सुबह सुबह गाँव से लाए रेडियो पर फिर से किशोर कुमार के गाने आ रहे हैं:
ग़-ग़-ग़ ग़ुस्सा इतना हसीन है तो प्यार कैसा होगा,
ऐसा जब इनकार है, इक़रार कैसा होगा...
मैं अंदाज़ा लगाता हूँ कि हिरोइन ग़ुस्से में होगी और हीरो उसे ये गाना गाकर और चिढ़ा रहा है. हिरोइन तुनक कर आगे बढ़ना चाहती होगी पर हीरो उसका रास्ता रोक रहा है. हिरोइन जितना ग़ुस्सा दिखाए, जितना इनकार करे, हीरो को लगता है वो हसीन दिख रही है. अगर प्यार जताए तो प्यार कैसा होगा.
कॉमर्शियल ब्रेक के बाद एक और गाना शुरू होता है. एक बार फिर से किशोर कुमार की आवाज़ में:
तेरा पीछा ना छोड़ूँगा सोणिए, भेज दे चाहे जेल में… दो दिलों के मेल में.
इसमें भी हिरोइन ख़ामोश है - अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हीरो उसका पीछा कर रहा है और वो इससे ख़ुश नहीं है. पर किशोर कुमार की आवाज़ से साफ़ समझ में आता है कि हिरोइन के ग़ुस्से से हीरो को कुछ फ़र्क नहीं पड़ता. वो ऐलानिया कहता है - पीछा नहीं छोड़ूंगा, चाहे जेल भेज दे.
अगले कॉमर्शियल ब्रेक से पहले रेडियो के आरजे की शरारत भरी, चुलबुली आवाज़ गूंजती है - शराफ़त मेरे जिस्म से टपकती है… टपक, टपक, टपक. फिर एक 'कूल' सी शहरी हँसी. और फिर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी किसी सरकारी योजना का विज्ञापन शुरू हो जाता है.
मैंने वो तीनों फ़िल्में नहीं देखीं थीं जिनके गाने मैं सुन रहा था. पर यू-ट्यूब में सब कुछ उपलब्ध है.
सड़क पर जा रही सिमी ग्रेवाल के पीछे पीछे मयूर-नृत्य करते हुए राकेश रोशन दिखे. यानी सिमी ग्रेवाल वो लड़की है जो सड़कों पर चल रही है और राकेश रोशन वो लड़के हैं जिनपर क़यामत आन पड़ी है.
पर इस गाने को देखिए तो लगता है क़यामत राकेश रोशन पर नहीं सिमी ग्रेवाल पर टूट पड़ी है. लड़की अपने रस्ते जा रही है लेकिन एक शोहदा उसे सरे राह रोक रहा है और उलटे गाना गा रहा है - आई क़यामत लड़कों पर. सिमी ग्रेवाल लाख ग़ुस्सा दिखाए, हीरो बार बार स्क्रीन पर कभी यहाँ तो कभी वहाँ से टपक पड़ता है और कभी हीरोइन के गाल छूता है तो कभी उसके हाथ पकड़ कर उमेठता है.
क़यामत तो लड़की पर आ रही है.
दूसरे गाने में राजेश खन्ना उसी तरह खुली सड़क पर साड़ी में लिपटी हुई एक शरीफ़ महिला (माला सिन्हा हैं) के आगे-पीछे नाचते-गाते घूम रहे हैं और अचरज जता रहे हैं कि:
ऐसा जब इनकार है, इक़रार कैसा होगा...
हिरोइन के चेहरे पर लोकलाज है मगर हीरो के चेहरे पर 'एनटाइटिलमेंट' का भाव है. यानी हीरो कह रहा है कि हिरोइन का रास्ता रोकना उसका हक़ है. हिरोइन लोकलाज से पानी-पानी हुए जा रही है. हीरो लगातार गा रहा है - ग़ुस्सा ऐसा हसीन है तो…
अब बारी है हमारे ही-मैन धर्मेंद्र की जो हवाई जहाज़ उड़ाते हुए हेमा मालिनी को धमकी दे रहे हैं - तेरा पीछा ना छोड़ूंगा सोणिए, भेज दे चाहे जेल में.
ग़ुस्से में तमतमाई हुई हिरोइन हेमा मालिनी अपने वायरलैस सेट पर सिर्फ़ शटअप और इडियट ही कह पाती है. पर हीरो क्यों मानेगा? वो ऐलान करता है - जहाँ भी तू जाएगी मैं वहाँ चला आऊँगा… फिर धमकी देता है कि दिन में अगर तू नहीं मिली तो सपने में आकर सारी रात जगाऊँगा.
क़यामत उस पर क्यों नहीं
रविवार की पूरी सुबह इसी उधेड़-बुन में बीत गई कि क़यामत उस पर क्यों नहीं गिरी जो क़यामत का डर जता रहा था.
दोपहर ढलते ढलते ख़बर मिली कि नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने #MeToo अभियान के तहत उनपर तोहमत लगाने वाली महिलाओं के ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई करने की धमकी दी है.
पर #MeToo की ख़बरें उस रेडियो स्टेशन ने नहीं दी जिसपर हीरो गा रहा था - तेरा पीछा ना छोड़ूंगा सोणिए, भेज दे चाहे जेल में.
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