#MeToo जिन सज्जन का नाम आया वो बयान दें: स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बिना विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का नाम लिए कहा है कि जिन सज्जन का नाम लिया जा रहा है उन्हें बयान जारी करना चहिए'.

पत्रकारों के सवालों के उत्तर में उन्होंने कहा, "मैं इतना ही कह सकती हूं इस मामले में जिन पर आरोप लगे हैं इसका उत्तर वही दे सकते हैं."

जाने-माने संपादक और मौजूदा सरकार में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर 'प्रीडेटरी बिहेवियर' के आरोप हैं, जिसमें युवा महिलाओं को मीटिंग के नाम पर होटल के कमरे में बुलाना शामिल है.

औरतों का अपने उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने वाला #MeToo अभियान इस वक्त भारत में अपने चरम पर है. सोशल मीडिया पर हर तबके की औरतें अपने साथ हुए उत्पीड़न की कहानियां साझा कर रही हैं.

पिछले कुछ दिनों में भारत में इस अभियान के तहत जितने अभिनेताओं, पत्रकारों, लेखकों और फिल्मकारों पर आरोप लगे हैं उनमें एमजे अकबर सबसे बड़े रुतबे वाले व्यक्ति हैं.

एमजे अकबर

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क्या कहा स्मृति ईरानी से?

समृति ईरानी ने कहा है, "मुझी खुशी है कि मीडिया उनके साथ काम करने वाली महिला कर्मचारियों से इस बारे में सवाल कर रहे हैं लेकिन मुझे लगता है जिन पर आरोप लगे हैं उन्हें बयान जारी कर इस मामले में सफाई देनी चाहिए. मैं इसका उत्तर देने के लिए सही व्यक्ति नहीं हूं क्योंकि मैं वहां मौजूद नहीं थी."

#MeToo अभियान पर उन्होंने कहा, "मैंने बार-बार कहा है कि जो महिलाएं अपनी बातों को लेकर सामने आ रही हैं उन्हें इस कारण शर्म करने की कोई ज़रूरत नहीं है."

"ऐसी महिलाओं पर न तो टिप्पणी की जानी चाहिए न ही उन पर तंज कसे जाने चाहिए. मेरी अपील है कि लोग महिलाओं की भावनाओं को सोशल मीडिया पर देख रहे हैं वो उनका सम्मान करें."

इससे पहले मीडिया ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी एमजे अकबर पर लगे आरोपों के बारे में सवाल किए थे. लेकिन वो इन सवालों का उत्तर दिए बग़ैर ही चली गईं.

निर्मला सीतारमण और सुषमा स्वराज

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एक टीवी चैनल से बात करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने #MeToo अभियान का समर्थन किया. हालांकि उन्होंने एमजे अकबर पर कोई टिप्पणी नहीं दी.

उन्होंने कहा, "मैं उन महिलाओं का समर्थन करती हूं जो अपने अनुभव साझा कर रही हैं. ये महिलाएं बुरे दौर से गुज़री होंगी और सामने आने के लिए काफी हिम्मत चाहिए."

इस मामले पर अब तक न तो एमजे अकबर और न ही विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है.

हालांकि इसी सप्ताह केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि राजनेताओं पर लगे आरोपों समेत, सभी इल्ज़ामों की जांच होनी चाहिए.

मी टू

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एमजे अकबर पर लगे आरोप

देश के सबसे प्रभावशाली संपादकों में से एक रहे एमजे अकबर, द टेलीग्राफ़, द एशियन एज के संपादक और इंडिया टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर रहे हैं.

सबसे पहले उनका नाम सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी ने लिया था. उन्होंने एक साल पहले वोग इंडिया के लिए 'टू द हार्वे वाइंस्टींस ऑफ़ द वर्ल्ड' नाम से लिखे अपने लेख को रीट्वीट करते हुए ऑफिस में हुए उत्पीड़न के पहले अनुभव को साझा किया.

रमानी ने अपने मूल लेख में एमजे अकबर का कहीं नाम नहीं लिया था, लेकिन सोमवार को उन्होंने ट्वीट किया कि वो लेख एमजे अकबर के बारे में था.

उसके बाद से पांच अन्य महिलाओं ने भी एमजे अकबर से जुड़े अपने अनुभव साझा किए.

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