क्या भारत में फिर फैल सकता है पोलियो?

पोलियो, भारत

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    • Author, कमलेश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पोलियो वैक्सीन में पोलियो वायरस मिलने का मामला सामने आया है. सरकार के लिए यह काफी चिंताजनक बात है क्योंकि भारत को पोलियोमुक्त राष्ट्र घोषित किया जा चुका है.

सरकार ने वैक्सीन जांच के नियम कड़े कर दिये हैं. कई जगह पर वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक तक लगा दी गई है.

बच्चों को पोलियो न हो, इसके लिए दी जाने वाली वैक्सीन में पी-2 वायरस पाया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर इसकी पुष्टि की है.

पहले जिस वायरस की वैक्सीन होती थी, सिर्फ उसी वायरस की मौजूदगी की जांच की जाती थी. लेकिन अब सरकार ने वैक्सीन से संबंधित वायरस के अलावा भी सभी वायरस की जांच को अनिवार्य कर दिया है.

ये पोलियो वायरस एक निर्माणकर्ता के द्वारा आपूर्ति की जा रही वैक्सीन में पाया गया है. ये हाल ही में सीवर से निकली गंदगी और मल के नमूनों में मिला था.

क्या है टाइप 2 पोलियो वायरस

पोलियो के वायरस तीन प्रकार के होते हैं.

टाइप 1, टाइप 2 और टाइप 3.

टाइप 2 वायरस, पोलियो वायरस का ही एक प्रकार है जिसके लक्षण टाइप 1 और 3 से मिलते-जुलते हैं.

पीडियाट्रिक्स डॉक्टर अनुपम सचदेवा बताते हैं, ''इसमें दूसरे पोलियो वायरस जैसे ही लक्षण होते हैं. इसके कारण लकवा हो सकता है. पोलिया वायरस शरीर में होने के शुरुआती लक्षण हैं बुखार, सिरदर्द, उल्टी और मांस-पेशियों में दर्द.''

''ये मामला बाहर से पोलिया वायरस फैलने का नहीं है. दरअसल, पोलियो वैक्सीन में पोलियो वायरस मौजूद होता है ताकि उसे लेकर शरीर में प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) पैदा की जा सके. पर लंबे समय से टाइप 2 वैक्सीन वायरस नहीं दिया जा रहा था, तो अब मामला ये है कि अभी इस वायरस की वैक्सीन क्यों दी गई. सरकार इसकी जांच कर रही है. साथ ही इसके संक्रमण का भी पता लगा रही है.''

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डॉक्टर अनुपम कहते हैं कि अभी जिस वैक्सीन वायरस की बात की जा रही है वो इतना ख़तरनाक नहीं है. लेकिन, अगर वो कोई नया रूप ले लेता है तो उससे ख़तरा हो सकता है. पर फिलहाल जो पोलियो की दवाई दी जा रही है उससे डरने की जरूरत नहीं है.

सरकार का भी कहना है कि ये वायरस कमजोर है और इससे लकवे का ख़तरा नहीं है.

पोलिया का वायरस मल के जरिए पानी और खाने में फैल सकता है. इसके लिए सफाई रखने की जरूरत होती है.

टाइप 2 पोलियो भारत में पूरी तरह ख़त्म हो चुका था. इसका आखिरी मामला वर्ष 1999 में आया था.

इसके बाद सिर्फ टाइप 1 और 3 वायरस के लिए ही वैक्सीन दी जा रही थी.

ट्राइवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन (टीओपीवी) तीनों तरह के वायरस से सुरक्षा के लिए दी जाती थी. जिसे बदलकर इनएक्टिवेटेड पोलियोवायरस वैक्सीन (आईपीवी) और बाइवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन (पीओपीवी) को अपनाया गया था.

बीओपीवी में दो तरह की पोलियोवायरस वैक्सीन (पी1 और पी3) होती है जो टाइप 1 और टाइप 3 वाइल्ड पोलियो वायरस से सुरक्षा देती है.

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पोलिया अभियान के तहत भारत में शिशुओं को आईपीवी और बीओपीवी दी जाती है.

अब जांच में बीओपीवी के दूषित पाये जाने पर स्वास्थ्य मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है.

जांच पूरी होने तक निर्माणकर्ता से वैक्सीन की आपूर्ति रोक दी गई है. साथ ही दूसरे नमूने भी भेजे गए हैं. कसौली में सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी में इनकी जांच हो रही है. पहले नमूने भी इसी लेबोरेटरी में भेजे गए थे.

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करा दी है और कंपनी के प्रबंध निदेशक को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

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भारत सरकार की मुश्किल

भारत को मार्च 2014 में पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया था. पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 में मिला था. इसके बाद लगातार तीनों तरह के पोलियो वायरस पर नजर रखी जा रही थी.

लेकिन, अगर पोलियो का मामला सामने आता है तो पोलियो मुक्त होने के स्टेटस को बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है.

अब कुछ खास इलाकों में बच्चों में टाइप 2 वायरस के प्रति प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए आईपीवी दी जा रही है ताकि वो बच्चे भी इसमें शामिल हो सकें जो पहली बार में छूट गए हों.

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि पोलियो अभियान जारी रखने के लिए दूसरे स्रोतों से पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन मंगाई जा रही है.

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