अमृता जैसी है कौशल्या की कहानी, जहां जाति ने ले ली पति की जान

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तेलंगाना के नालगोंडा ज़िले में हॉरर किलिंग का मामला सामने आया है. ज़िले के मिरयालागुडा शहर में एक अस्पताल के बाहर 24 वर्षीय पेरुमाल्ला प्रणय की उसकी गर्भवती पत्नी अमृता के सामने बेरहमी से हत्या कर दी गई.
ऐसे ही एक मामले में मार्च 2016 में 22 साल के शंकर नाम के एक शख्स को ऊंची जाति की एक लड़की कौशल्या से शादी करने के कारण तमिलनाडु में दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया गया था.
प्रणय की हत्या की ख़बर से कौशल्या के जेहन में एक बार फिर उनके पति की हुई निर्मम हत्या की यादें ताज़ा हो गई हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा...
"जितनी बार टीवी पर प्रणय के ऑनर कीलिंग की ख़बर देख रही हूं, उतनी बार मेरे दिमाग में मेरे शंकर की यादें ताज़ा हो जा रही हैं. क्योंकि उसे भी इसी तरह गर्दन पर तेज़ धारदार हथियार से वार कर मार डाला गया था जैसे प्रणय के साथ किया गया है."
"जितनी बार प्रणय की मौत की ख़बर कान में पड़ रही है मेरी आंखों के सामने उस दिन का एक-एक पल ताज़ा हो उठ रहा है."
कौशल्या बेहद शांत भाव से ये सारी बातें कहती हैं.

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तमिलनाडु के उदुमलपत्तई में रहने वाली कौशल्या ने भी अपने पति को एक ऐसे ही हादसे में खो दिया था. कौशल्या के पति शंकर भी दलित थे और उनका क़त्ल भी किसी अनजान ने नहीं बल्कि कौशल्या के घरवालों ने किया था.
उस ख़ौफ़नाक मामले में कौशल्या ने गवाही देकर खुद अपने परिवार को सज़ा दिलाई.
पिछले साल कोर्ट ने इस हत्या में शामिल छह लोगों के ख़िलाफ़ सज़ा सुनाई. जिन छह लोगों को सज़ा सुनाई गई उनमें से एक कौशल्या के पिता भी थे.

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कौशल्या के पति की हत्या की तरह ही ये मामला है जहां जाति की वजह से तेलंगाना के प्रणय को उनकी पत्नी और मां के सामने बेरहमी से मार डाला गया.
जिस वक़्त ये हादसा हुआ प्रणय अपनी गर्भवती पत्नी को मेडिकल चेकअप के लिए क्लिनिक लेकर आए हुए थे.
उनके साथ उनकी मां भी थीं लेकिन जैसे ही उन्होंने क्लिनिक का मेन गेट पार किया पीछे से आकर एक शख़्स ने प्रणय पर हमला कर दिया. अमृता और प्रणय की मां मदद के लिए भीतर भागीं लेकिन तब तक प्रणय की जान जा चुकी थी.

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मैं अमृता के साथ खड़ी हूं
कौशल्या कहती हैं कि ये एक ऐसा दर्द है जो कभी नहीं भर सकता. वो कहती हैं, "हम चाहे जितना भी समझाने की कोशिश कर लें लेकिन उनके लिए ये बहुत मुश्किल समय है. लेकिन मैं ये भरोसे के साथ कह सकती हूं कि वो बहुत जल्दी इन सारे दुखों से बाहर आ जाएंगी."
"मुझे प्रणय के लिए अमृता के प्यार पर पूरा भरोसा है और यही उसे ताक़त भी देगा."
वो कहती हैं, "अमृता जाति के ख़िलाफ़ लड़ेंगी और अपने प्यार यानी प्रणय के लिए इंसाफ़ लेंगी. उनकी इस कोशिश में हम सभी अमृता के साथ खड़े हैं."
"मैं अमृता से सिर्फ़ इतना कहना चाहूंगी कि वो पेरियार और आंबेडकर के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ें. इससे उसे हिम्मत और ताक़त मिलेगी."
'वो सिर्फ़ और सिर्फ़ हमें तक़लीफ़ देना चाहते हैं'

अपने एक इंटरव्यू में अमृता ने कहा है कि उनके माता-पिता ने प्रणय को जान से इसलिए भी मार डाला क्योंकि वो प्रेग्नेंट थीं.
"अमृता की इस बात से पूरी तरह साफ़ हो जाता है कि उनके घरवालों में जाति को लेकर किस क़दर नफ़रत भरी हुई है. उनके घरवालों को लगता है कि अगर बच्चा पैदा हो जाएगा तो उनकी जाति का सम्मान कम हो जाएगा. यही कारण है कि उन्होंने इतनी बेरहमी से प्रणय को मार डाला."
अमृता ने कहा कि वे (घरवाले) हमें दर्द देना चाहते हैं क्योंकि हमनें उनकी बात नहीं सुनी.
हमारे सामाजिक ढांचें में उनकी जाति एक-दूसरे से आंतरिक तौर पर जुड़ी हुई है.

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कोई और अमृता-कौशल्या न बने
कौशल्या कहती हैं, "सवाल ये है कि क्या जब मैं या अमृता सड़क पर उतर जाएंगे, प्रदर्शन करेंगे तो इन सबका अंत हो जाएगा? हमें अपने लिए न्याय चाहिए. इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है."
"हम जानते हैं कि जिससे आप सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं उसे खोने का दर्द क्या होता है. हम सिर्फ़ इतना ही चाहते हैं कि अब कोई और न तो कौशल्या बने और न ही अमृता."

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ऑनर कीलिंग के खिलाफ़ सख्त क़ानून की ज़रूरत
कौशल्या कहती हैं, "इस तरह की घटनाओं के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि भारत में ऑनर कीलिंग के ख़िलाफ़ कोई सख़्त क़ानून नहीं है. अगर आप इसे रोकना चाहते हैं तो भारत में इसके लिए बक़ायदा एक क़ानून बनना चाहिए."
वो कहती हैं, "जो अमृता के साथ हुआ, वही मेरे साथ भी हुआ था. जिन लोगों ने मेरे शंकर को मारा, उन्हें मौत की सज़ा दी गई है. अमृता के दोषियों ने पेपर में इसके बारे में पढ़ा होगा, बावजूद इसके प्रणय मारा गया."
क्या प्रणय, अगला शंकर है?

कौशल्या कहती हैं, "प्रणय और अमृता ने साथ-साथ ज़िंदगी गुज़ारने के सपने देखे थे. अमृता गर्भवती हैं. सोचकर देखिए, पहला बच्चा आने वाला था... कितने सारे सपने देखे होंगे दोनों ने... बच्चे के पैदा होने से लेकर उसके बड़े होने तक सपने."
"इन सबसे ज़्यादा अमृता ने प्रणय को अपनी ज़िंदगी मान लिया था और सिर्फ़ उसी पर भरोसा करके वो अपना सबकुछ छोड़कर आ गई थी. लेकिन अब वो शख़्स ही उसकी ज़िंदगी में नहीं है."
"इस बात में कोई संदेह नहीं है कि एक न एक दिन अमृता इन सारी परिस्थितियों से बाहर निकल आएगी. जाति के ख़िलाफ़ खड़ा होने के लिए बहुत हिम्मत की ज़रूरत पड़ती है."
"मुझे भरोसा है कि उसका प्यार ही उसे इन सारी बातों से उबरकर आगे बढ़ने में मदद करेगा."
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