'बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया, दो तिरपाल ही मिल जाते'

असम, बाढ़

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    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए

"पिछले तीन-चार दिनों से न कुछ खाया है और न ही ठीक से सो पाए हैं. जान बचाकर बड़ी मुश्किल से इस ऊंची जगह पर पहुंचे हैं. मवेशियों के साथ रहना पड़ रहा है. बाढ़ ने हमारा सबकुछ तबाह कर दिया."

यह कहते हुए 35 साल की ज्योति साहू की आवाज़ धीमी पड़ जाती है. कुछ देर रुकने के बाद वो कहती हैं, "घर-बार तो पानी में डूबे हुए हैं अगर कोई हमें दो-तीन तिरपाल दे देते तो हम तंबू बनाकर कुछ दिन यहां गुज़ारा कर लेते."

दरअसल, इस समय असम के छह ज़िले बाढ़ के पानी में डूबे हुए है. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ़ से शनिवार की शाम को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार छह ज़िलों के 337 गांव बाढ़ के पानी में डूबे हैं.

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यहां एक लाख 38 हज़ार से भी अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में हैं. ज़िला प्रशासन की तरफ़ से खोले गए राहत शिविरों में अब भी सैकड़ों बेघर हुए लोग रह रहे हैं.

बाढ़ से सबसे ज़्यादा धेमाजी ज़िले में तबाही हुई है. धेमाजी ज़िले के 221 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. जहां तकरीबन 78 हज़ार से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. ज्योति साहू का परिवार धेमाजी ज़िले के काबू चापोरी में दशकों से रह रहा है.

बाढ़ के बारे में बीबीसी से बातचीत में ज्योति ने कहा, "12 सितंबर की शाम को मैं कभी नहीं भूल सकती. पहले पानी के आने की आवाज़ सुनी. फिर देखा अचानक गांव में इतनी तेज़ी से पानी भरने लगा की हम सब डर गए. उस दिन मेरे पति काम से शहर गए हुए थे. किसी ने बताया कि पास की नदी में बना बांध टूट गया है. इसके बाद गांव वालों की मदद से मैं अपने बच्चों के साथ वहां से निकल आई."

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'पता नहीं हम कब वापस जाएंगे'

एक सवाल का जवाब देते हुए ज्योति कहती हैं, "अपने साथ सामान कुछ भी नहीं ला सके. केवल कुछ ज़रूरी क़ाग़ज़ात लेकर हम वहां से निकल गए. घर पर आदमी कोई नहीं था इसलिए कुछ नहीं ला सके. पता नहीं कब हम वापस जा पाएंगे. हालत बहुत ख़राब है."

असम और अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश के बाद ब्रह्मपुत्र और इसकी सहायक नदियों में पानी अपने ख़तरे के निशान से ऊपर बह रहा है.

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धेमाजी ज़िले में रेलवे पुल का एक बड़ा हिस्सा जियाधाल नदी के पानी में बह गया जिससे इस मार्ग पर रेलवे यातायात पूरी तरह से ठप पड़ गया है. इस रेल मार्ग पर चलने वाली क़रीब आठ ट्रेनों को फ़िलहाल रद्द कर दिया गया है.

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धेमाजी ज़िला उपायुक्त रोशनी कोराइती ने बीबीसी से कहा, "कल के मुक़ाबले आज स्थिति में काफ़ी सुधार हुआ है. कई जगह पानी भी कम हुआ है. रेल की पटरी का जो क़रीब 30 मीटर हिस्सा बाढ़ के कारण टूट गया था उसकी मरम्मत का काम चल रहा है. अगले कुछ दिन के भीतर इसे ठीक कर लिया जाएगा."

उन्होंने बताया, "जोनाई सब-डिविज़न में दो राहत शिविर हैं लेकिन अब पानी कम हो रहा है क्योंकि बारिश भी रुक गई है. ऐसे में जल्द ही लोग अपने घर वापस जा सकेंगे."

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बांध का पानी छोड़ने की वजह से तबाही!

ज़िला उपायुक्त रोशनी के अनुसार धेमाजी ज़िले में पिछले 72 घंटों के दौरान बाढ़ के पानी में डूबने से 22 साल के विजय तांती नामक एक युवक की मौत हुई है. जबकि असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक़, इस साल असम में बाढ़ और भूस्खलन में 52 लोग मारे गए हैं.

धेमाजी ज़िले में बाढ़ की ख़बर को कवर करने वाले स्थानीय पत्रकार विनोद सिंह कहते हैं, "मैं कोबो चापोरी, मेसाकी चापोरी जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों में गया हूं, वहां लोग बहुत तक़लीफ में हैं और अपने बच्चों के साथ सुरक्षित स्थान में शरण लिए हुए है. बाढ़ की स्थिति में सुधार होने में अभी थोड़ा समय लगेगा. हालांकि, पिछले कुछ दिन के मुक़ाबले आज मौसम थोड़ा ठीक हुआ है. लेकिन लोग काफ़ी चिंता में हैं."

इस बीच बाढ़ प्रभावित लखिमपुर ज़िले के लोगों ने शनिवार को नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिकल पावर कॉर्पोरेशन (निपको) के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया. बाढ़ प्रभावित लोगों का आरोप है कि निपको के रंगा नदी पर बने बांध का पानी छोड़ने की वजह से तबाही ज़्यादा हुई है.

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