नज़रिया: अपने हर भाषण में 2022 का ज़िक्र क्यों करते हैं नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी

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    • Author, किंशुक नाग
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

साल 2018, 2013 जैसा नहीं है. और 2019, 2014 जैसा नहीं होगा. बहुत से लोगों को अब यह महसूस होने लगा है और शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऐसा ही सोचते हैं.

2014 में भाजपा को सत्ताधारी कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों पर साफ़ बढ़त मिली थी, लेकिन 2019 में बहुत कुछ बदल सकता है.

इस बार भाजपा सत्ता में है, अकेले दम पर बहुमत वाली सरकार अपने पांच साल पूरे करने के बाद चुनाव में उतर रही है तो जनता उसे इस बार 2014 की तरह नहीं देखने वाली.

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जबकि विपक्षी पार्टियां पूरी तैयारी के साथ (जैसा कि भाजपा ने 2014 में किया था) सत्ताधारी दल की हवा निकालने की कोशिश में लगी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मुकम्मल राजनेता हैं और वो ये सब बहुत अच्छे से जानते हैं इसलिए वो 2019 के चुनावों में अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति में बदलाव कर रहे हैं.

किसी भी चुनाव में सरकार अपने कामकाज के आधार पर आंकी जाती है जबकि विपक्षी पार्टियां सरकार के काम की आलोचना और अपना स्टैंड बताकर चुनाव लड़ती हैं.

इन सबके बीच सबसे अस्वाभाविक बात यह है कि इस बार नरेंद्र मोदी खुद भी अपनी कार्य योजनाओं को बता रहे हैं और यह जता रहे हैं कि 2022 में भी सत्ता उन्हीं के पास रहेगी.

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2022 में आज़ाद भारत 75 साल को हो जाएगा

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में मोदी ने भारतीयों को 2022 में अंतरिक्ष में उतारने की घोषणा की थी. लाल किले की प्राचीर से उन्होंने कहा था, "जब भारत 2022 में आज़ादी की 75वीं सालगिरह मना रहा होगा, देश का एक बेटा या बेटी गगनयान पर राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रस्थान करेंगे."

आपको बता दें कि गगनयान को अंतरिक्ष में भेजने का यह प्रोजेक्ट 2004 से ही चल रहा है. यूपीए सरकार इसे अंजाम तक पहुँचाने से पहले सत्ता से बाहर हो गई.

अब मोदी ने 2022 का जिक्र करते हुए ये जता दिया है कि वो इस योजना को लेकर कितने गंभीर हैं.

इसी तरह मोदी ने एक बार फिर से 2022 को ही वह साल बताया जब हर भारतीय के पास अपना घर होगा.

गुजरात के वलसाड ज़िले में एक जन सम्मेलन में उन्होंने कहा कि 'अभी तक हम ये सुनते आए हैं कि राजनेताओं को अपना घर मिला. अब हम यह सुन रहे हैं कि गरीबों को अपना घर मिल रहा है.'

यह घोषणा भी केवल उन्हीं मतदाताओं को खुश करने के लिए थी जो अपेक्षाकृत रूप से कम सामर्थ्य वाले हैं. यही नहीं, नरेंद्र मोदी ने सबके लिए 24 घंटे लगातार बिजली देने का लक्ष्य भी 2022 ही रखा है. हालांकि, अब ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि वो जल्दी ही इस लक्ष्य को 2019 में पूरा कर लेंगे.

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'आशाओं और आकांक्षाओं का साल'

लेकिन ऐसा लग रहा है कि मोदी ने 2022 का लक्ष्य इस तरह तय किया है कि उनकी पार्टी को इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचे.

जब 2017 की शुरुआत में ही भाजपा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव जीते थे और जीत के कुछ ही दिनों बाद नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, "चुनाव के परिणामों ने नए भारत की आधारशिला रखी है."

उन्होंने लोगों से संकल्प भी कराया था कि 2022 तक नया भारत बनाना है जो कि उनकी सरकार के कार्यकाल के पूरा होने के तीन साल बाद आएगा.

मोदी ने लोगों को संकल्प कराते हुए कहा था कि यदि हम इसमें सफल हो जाते हैं तो भारत को सुपर पावर बनने से कोई नहीं रोक सकता.

इसी तरह जुलाई 2017 में नीति आयोग की एक मीटिंग में देश के सभी मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि "2022 का नया भारत जनता का संकल्प" है.

"यह भारत की आशाओं और आकांक्षाओं को प्रदर्शित करता है और इसको पूरा करने की ज़िम्मेदारी उनकी है जो सत्ता में हैं."

एक महीने बाद मोदी ने फिर से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुखों के साथ एक मीटिंग में 2022 का नया भारत बनाने का रोड मैप तैयार करने के निर्देश दिए थे.

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मोदी ने चतुराई से बदला लक्ष्य

हैदराबाद में काम कर रहे कार्तिक सुब्रमण्यम कहते हैं, "भारत की आज़ादी के 75वें साल यानी 2022 तक नेतृत्व करने के लिए मोदी को कोई दोष नहीं दे सकता है."

"लेकिन 2022 के लिए अपने लक्ष्य तय करके मोदी ने सरकार की डेडलाइन ही बदल दी है. कहने का मतलब है कि वो ये सब 2019 में अपनी पार्टी को वोट दिलाने के लिए कर रहे हैं.

मुंबई के एक कॉर्पोरेट कंपनी में काम करने वाले आर चावला कहते हैं, "मोदी ने पहले अच्छे दिन की बात कही. मगर कई लोगों को लगता है कि अभी अच्छे दिन नहीं आए हैं. और इस तरह मोदी बहुत चतुराई के साथ सरकार के लक्ष्यों को 2022 में लेकर चले गए हैं."

"वो कहते हैं कि मेरे काम का लेखा-जोखा 2022 में किया जाए. इसका मतलब कि वो 2019 के चुनाव में अपने लिए पांच साल और मांग रहे हैं."

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75वें साल में बड़े जश्न की तैयारी?

मोदी के 2022 के लक्ष्य पर सोशल मीडिया साइट कोरा पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं.

इस लक्ष्य से जुड़े सवालों के जवाब में स्वतंत्र सलाहकार मिहिर जोशी कहते हैं, "यह बहुत ही सुरक्षित तरीका है यह बताने का कि बदलाव के लिए 2019 काफी नहीं है. जनता अगर बदलाव चाहती है तो उसे एक बार मौका और देना होगा."

हालांकि वो यह भी कहते हैं कि एक लक्ष्य को साधने के लिए एक निश्चित समय और लगातार प्रयास की ज़रूरत होती है.

कोरा के एक और यूजर निरंजन नानावटी कहते हैं, "2022 में आज़ाद भारत 75 साल का हो जाएगा. वो इसका जश्न बड़े पैमाने पर मनाना चाहते हैं इसलिए ये सारे लक्ष्य उसे ध्यान रखकर तय किए जा रहे हैं ताकि वो साल यादगार बने."

यह कहना व्यर्थ नहीं होगा कि मोदी ने 2022 का लक्ष्य अगले चुनाव को ध्यान में रख कर तय किया है. बहुत सारी योजनाएं लोगों के सामने आ चुकी हैं, तो बहुत से अगले पांच महीने में पर्दा उठाया जाएगा.

ये सभी योजनाएं खास लोग, खास क्षेत्र को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं.

आश्चर्य की बात यह है कि भाजपा ने इसकी घोषणा नहीं की है कि आखिर न्यू इंडिया में होगा क्या?

(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. इसमें शामिल तथ्य और विचार बीबीसी के नहीं हैं और बीबीसी इसकी कोई ज़िम्मेदारी या जवाबदेही नहीं लेती है)

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