फासीवादी शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ाई साज़िश नहीं: वरवर राव

वरवर राव

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माओवादियों से संबंध और भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार पांच कार्यकर्ताओं में से एक वरवर राव को उनके घर हैदराबाद ले आया गया है.

हैदराबाद के हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए राव ने अपने और चार दूसरे कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामले को झूठा करार दिया.

वामपंथी कवि और लेखक वरवर राव ने ज़ोर देकर कहा कि "फासीवादी नीतियां" के खिलाफ उनकी लड़ाई को साज़िश नहीं कहा जा सकता.

राव ने कहा कि भीमा-कोरेगांव में दलितों और ऊंची जाति वाले मराठाओं के बीच हुई झड़पों के मामले में महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए, ना कि कार्यकर्ताओं के खिलाफ.

वरवर राव

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मंगलवार को हुई थी गिरफ्तारी

पांचों कार्यकर्ताओं को मंगलवार को देश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया था. इन गिरफ्तारियों को लेकर कई लोगों ने नाराज़गी जताई थी.

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इन गिरफ्तारियों को चुनौती देते हुए अर्ज़ी लगाई गई थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारियों को लेकर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की और कहा कि इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में नहीं रखा जा सकता. कोर्ट ने 6 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक इन सभी को घर में नज़रबंद रखने के आदेश दिए हैं.

जिसके बाद पुणे पुलिस गुरुवार सुबह वरवर राव को हैदराबाद लेकर आई.

पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल ज़ोन) विश्व प्रसाद ने कहा कि नज़रबंदी के दौरान उन्हें ना किसी बाहर वाले से मिलने की इजाज़त होगी और ना ही कहीं बाहर जाने की.

उन्होंने कहा, "राव से सिर्फ उनकी पत्नी और बच्चे मिल सकेंगे, वो भी सिर्फ तब, जब वो उनके साथ एक ही घर में रह रहे हों."

वरवर राव की बेटी

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राव के घर के आस-पास स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए हुए हैं.

राव के अलावा मानवाधिकार कार्यकर्ता वरनॉन गोंज़ाल्विस, अरुण फ़रेरा, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को भी माओवादियों से संबंधों के आरोप में गुरुवार को देश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया था.

भीमा-कोरेगांव घटना के नौ महीने बाद की गई महाराष्ट्र पुलिस की इस कार्रवाई पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया.

भीमा-कोरेगाव हिंसा

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पुलिस का दावा था कि पिछले साल 31 दिसंबर को हुए "यलगार परिषद" - दलितों के सम्मेलन के बाद हिंसा भड़की थी.

पुलिस ने सम्मेलन में दिए गए कथित भड़ाऊ भाषणों को हिंसा की वजह बताया. पुलिस के मुताबिक भीमा-कोरेगांव से शुरू होकर ये हिंसा महाराष्ट्र के कई ज़िलों तक फैल गई, जिसकी वजह से जान-माल का नुकसान हुआ.

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