60 पार की वो महिला खिलाड़ी जो खेलेंगी एशियन गेम्स

ब्रिज़ खेल

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इमेज कैप्शन, ब्रिज़ खेल की उस्ताद हेमा देओरा
    • Author, वंदना
    • पदनाम, बीबीसी टीवी एडिटर (भारतीय भाषाएं)

67 साल की हेमा देवड़ा, 67 साल की ही किरन नादर और 79 साल की रीता चोकसी- ये उन महिला खिला़ड़ियों के नाम हैं, जो एशियाई खेलों में भारत के लिए खेलेंगी.

आप सोच रहे होंगे कि रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुकी ये महिलाएँ एशियन गेम्स में कैसे? ये सारी महिला खिलाड़ी ब्रिज यानी पत्तों के खेल में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

60 पार की इन खिलाड़ियों के बारे में और जानने की जिज्ञासा मुझे दिल्ली में मेरी पहली ब्रिज गेम और खिलाड़ी हेमा देवड़ा तक ले गई.

समय पास करने का ज़रिया था ब्रिज

करीब 50 साल की उम्र तक हेमा देवड़ा मुंबई में या तो घर पर बच्चों के साथ थीं या पति और राजनेता मुरली देवड़ा के साथ दौरे पर रहती थीं, जो बाद में पेट्रोलियम मंत्री भी बने. ब्रिज का उन्हें क, ख, ग भी नहीं पता था.

ब्रिज़ खेल

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बीबीसी से पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए हेमा ने बताया कि अक्सर पति मुरली देवड़ा के दोस्त हर शनिवार को ठीक शाम चार बजे आते थे- चाहे बारिश हो, तूफ़ान हो या कुछ भी हो और घंटों ब्रिज खेलते रहते थे.

हेमा बताती हैं कि वे इतने मगन हो जाते थे कि उन्हें किसी बात का ध्यान ही नहीं रहता था और वो अकसर सोचती थीं कि आख़िर ऐसा क्या नशा है इन पत्तों में. उनके माँ-बाप के घर में पत्ते खेलना बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता था.

जब हेमा के बच्चे बड़े हो गए और मुरली देवड़ा भी राजनीति में मसरूफ़ रहने लगे तो 1998 के आसपास एक नौसिखए की तरह हेमा ने ब्रिज में हाथ आज़माना शुरू किया, एक पार्टनर चुना और धीरे-धीरे टू्र्नामेंट जीतने लगीं और विदेशों में जाने लगी.

बिल गेट्स के साथ खेला ब्रिज

एक बार हेमा दिल्ली में ब्रिज में एक टूर्नामेंट में खेल रही थीं और तब पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा वहाँ बतौर चीफ़ गेस्ट आए हुए थे.

हेमा ने उस टूर्नामेंट में खिताब जीता था तो मुरली देवड़ा ने उन्हें ट्राफ़ी दी, जिसे वो अपनी सबसे मीठी और प्यारी यादों में से एक मानती हैं.

पेशे से आर्किटेक्ट रहीं हेमा ब्रिज में बिल गेट्स और वारेन बफ़ेट के साथ भी खेल चुकी हैं.

हेमा के मुताबिक़ ब्रिज दिमाग़ का खेल है, अगर आपकी याद्दाशत तेज़ है और आप अनुभवी हैं तो उम्र का कोई ख़ास मायने नहीं रखती.

ब्रिज़ खेल

वहीं 79 साल की रीता चोकसी की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. वे शायद भारत के सबसे उम्रदराज़ खिलाड़ियों में से हैं.

70 के दशक से ही रीता ब्रिज खेल रही हैं और कई ख़िताब जीते. हालांकि उन्होंने नहीं सोचा था कि 79 की उम्र में एशियाई खेलों में जाने का मौका मिलेगा.

ब्रिज खेलने को दौरान ही उनकी मुलाक़ात अपने दूसरे पति डॉक्टर चोकसी से हुई.

इसी दौरान रीता के पहले पति की मौत हो गई. ब्रिज के टेबल पर साथ खेलने वाले रीता और डॉक्टर चोकसी असल ज़िंदगी में भी साथी बन गए.

ब्रिज खेलते खेलते हुए जीवनसाथी से मुलाक़ात

लेकिन ज़िंदगी में उनका साथ लंबा नहीं रहा. 1990 में दूसरे पति की भी मौत हो गई, दोनों बेटे एक-एक कर लंदन में ही पढ़ने लगे और रहने लगे.

रीता एकदम अकेली हो गई लेकिन उनके पत्ते उनके साथ थे.

ब्रिज़ खेल

रीता अपने पत्ते चलती रहीं और आज एशियन गेम्स तक पहुँच चुकी हैं.

एशियन गेम्स में खिलाड़ियों के हर तरह के मेडिकल और डोप टेस्ट होते हैं. और अगर आपकी उम्र 60 और 70 पार हो तो ज़ाहिर है बहुत से ब्रिज खिलाड़ी कई तरह की दवाइयाँ भी खाते हैं.

ऐसे में इन खिलाड़ियों और ब्रिज एसोसिएशन ने पहले से ही नेशनल डोपिंग एजेंसी से संपर्क किया है ताकि इसे लेकर कोई दिक्कत न हो.

हेमा देवड़ा की तरह रीता चोकसी भी मानती हैं कि ब्रिज माइंड गेम है.

दिमाग़ को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए वो ऑनलाइन ब्रिज खेलती हैं.

शिव नादर की पत्नी भी खेलती हैं ब्रिज़

ब्रिज खिलाड़ी 67 साल की किरन नादर की टीम ने इस साल कॉमनवेल्थ नेशंस ब्रिज चैंपियनशिप जीती हैं और एशियन गेम्स में तैयारी में लगी हैं.

किरन नादर घर में माँ-बाप के साथ ब्रिज खेलती थीं और फिर पति के साथ खेलते खेलते ब्रिज में माहिर हो गईं.

उनके पति शिव नादर आईटी कंपनी एचसीएल के संस्थापक हैं. किरन कला में भी ख़ास दिलचस्पी रखती हैं और किरन नादर म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट की चेयरपर्सन भी हैं.

लेकिन साथ ही वो ब्रिज चैंपियन भी हैं.

ब्रिज़ खेल

दिल्ली ब्रिज एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद सामंत के मुताबिक बहुत सारे देशों में ब्रिज स्कूलों और यूनिवर्सिटी में सिखाया जाता है जबकि भारत में पत्तों के खेल को आज भी अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता और न ही ब्रिज को स्पॉन्सरशिप मिलती है.

पर एक बात जो तमाम ब्रिज खिलाड़ियों ने सांझा की वो ये कि उम्र कोई बाधा नहीं है.

फ़ोन पर हेमा देवड़ा ने कहा कि ब्रिज जैसा कोई पैशन ढलती उम्र में किसी बेहतर निवेश से कम नहीं है और ये भी कि भले ही उम्र के एक पड़ाव में बच्चे, परिवार न हो और भले ही आपकी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा परिवार और बच्चों की देखरेख में गुज़र गया हो, तो भी ये खेल आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने देगा, और दिमाग़ को चुस्त दुरुस्त जो बनाए रखता है वो अलग.

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