'वाजपेयी के बहाने वीसी के गुंडों ने बनाया निशाना'

संजय कुमार को भीड़ ने पीट-पीटकर उनके कपड़े भी फ़ाड़ दिए थे

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    • Author, नवीन नेगी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

'आज अगर हमारे दामाद को कुछ हो जाता, अगर थोड़ी देर हो जाती...तो, हमारी बेटी का क्या होता...यह ख़बर सुनने के बाद दो दिन तक वो अचेत रही'

सफ़ेद कुर्ता पहने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) परिसर की सीढ़ियों पर बैठे अमरेंद्र यादव अपने रुंधे गले से जब यह बोल रहे थे, तो उनके आसपास अचानक भीड़ इकट्ठा होने लगी.

अमरेंद्र के दामाद बिहार के मोतीहारी ज़िले में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. उनका नाम संजय कुमार है. घर में उनकी पत्नी, पांच माह की एक बेटी, छोटा भाई, उनकी पत्नी और बूढ़ी मां है.

जिस वक़्त देश की मीडिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम दर्शन लाइव दिखा रही थी, उसी वक़्त एक भीड़ संजय कुमार की जान लेने पर उतारू थी.

एक तरफ जहां 'एक जान' के चले जाने पर ग़म जताया जा रहा था, तो दूसरी तरफ 'एक जान' लेने की कोशिश हो रही थी.

आक्रोशित भीड़ का आरोप था कि संजय कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी के संबंध में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए फ़ेसबुक पोस्ट की थी.

अमरेंद्र यादव (संजय कुमार के ससुर)
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एम्स में भर्ती

रविवार देर रात संजय को पटना से दिल्ली लाया गया और सोमवार सुबह उन्हें एम्स में भर्ती करवा दिया गया.

संजय इस समय एम्स के आपातकालीन विभाग की पहली मंजिल पर बने 'आइसोलेशन रूम' में भर्ती हैं.

10 बाई 12 साइज़ के इस कमरे में संजय एक बेड पर लेटे हुए थे. उनकी दाईं आंख के आस-पास हल्का नीला निशान दिख जाता है.

मैं जब बात करने के लिए संजय के क़रीब पहुंचा, तो उनके ससुर ने मुझे ऐसा करने से मना कर दिया. संजय ने धीमी आवाज़ में कहा कि 'अब थोड़ा ठीक हूं'

वो पांव पर पड़ी चादर हटाते हुए अपने जख़्म दिखाने लगे. उन्होंने कहा कि उनके सिर के आस-पास बहुत ज़्यादा मारा गया.

दाईं आंख से थोड़ा कम दिख रहा है और जब हवा चलती है, तो उन्हें एक अजीब सी सिहरन महसूस होती है.

संजय इससे ज़्यादा बोल नहीं पाए साथ ही उनकी हालत और कमरे की संवेदनशीलता को देखते हुए इससे ज़्यादा पूछना जायज़ भी नहीं लगा.

एम्स का आपातकालीन विभाग
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क्या हुआ था उस दिन

संजय को पटना से दिल्ली लाने वाले उनके साथी मृत्युंजय कुमार मोतीहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव हैं.

जिस दिन संजय पर हमला हुआ वे उस वक्त मौक़े पर ही मौजूद थे.

उन्होंने बीबीसी को इस संबंध में बताया, ''शुक्रवार का दिन था, मैं और कुछ स्टूडेंट संजय सर के कमरे में उनके साथ बैठे हुए थे. उनका कमरा दूसरी मंजिल पर है. दोपहर के 1 या 1.30 बजे का समय होगा, अचानक 15-20 लड़के कमरे का दरवाज़ा तोड़ते हुए कमरे में दाखिल हुए.''

''उनके हाथों में स्टील की रॉड, झाड़ू, डंडे और जूते-चप्पल थे. वो संजय सर को पीटने लगे. इसके बाद वह भीड़ संजय सर को दूसरी मंजिल से घसीटते हुए नीचे ले गई. उन्होंने उनके कपड़े फ़ाड़ दिए. जब हम उन्हें बचाने के लिए आए तो हमें भी मारा-पीटा गया.''

''संजय सर को घसीटते हुए मेन सड़क तक ले गए, उनके सिर पर लगातार वार किया जा रहा था, उनका गला दबाने की कोशिश की गई. यह सब दिन दहाड़े चल रहा था. इतना ही नहीं उन लोगों की हिम्मत का अंदाज़ा इस बात से लगा लीजिए कि वो इसका वीडियो भी बना रहे थे.''

मृत्युंजय ने बताया कि उस भीड़ ने संजय पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने तक की कोशिश की थी. यह बात जब संजय से मैंने पूछी, तो उन्होंने भी अपना सिर हिलाते हुए अपनी सहमति दर्ज़ करवाई.

घायल अवस्था में संजय कुमार

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'वाजपेयी तो बस बहाना'

ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि संजय कुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से संबंधित कुछ विवादित पोस्ट फ़ेसबुक पर लिखी थी, जिसके बाद उन पर हमला किया गया.

हालांकि उनके साथ दिल्ली आए उनके तमाम प्रोफ़ेसर साथी इसे महज़ एक बहाना बताते हैं. एम्स में मौजूद संजय की सहयोगी श्वेता ने बीबीसी से कहा कि वाजपेयी पर पोस्ट को महज़ बहाना बनाकर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने अपने गुंडे भेजे और संजय को मारा-पीटा गया.

श्वेता बताती हैं, ''हमारी यूनिवर्सिटी के वीसी अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, हम लोग पिछले दो महीने से उनके ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं, जिसे खत्म करने के लिए यह हमला किया गया. हमारे वीसी ने हम पर झूठे आरोप लगाए, हमारे ही साथी प्रोफ़ेसर पर सेक्शुअल हरैसमेंट के चार्ज लगाए गए हैं.''

श्वेता ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, ''पूरे शहर भर में मेरा नाम इस बात से बदनाम किया गया कि मैं वीसी के साथ सो चुकी हूँ. इस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं और अब उस भीड़ के ज़रिए संजय कुमार पर हमला इसी कड़ी का हिस्सा है.''

दरअसल संजय कुमार और उनके कुछ साथी प्रोफेसर विभिन्न मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन के ख़िलाफ़ 29 मई से शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे थे. धरना देने वाले प्रोफ़ेसर यूनिवर्सिटी के वीसी डॉक्टर अरविंद अग्रवाल पर यूनिवर्सिटी में भेदभाव करने और कई अन्य वित्तीय अनिमितताओं के आरोप लगाते हैं. वे सभी कैग की रिपोर्ट का हवाला भी देते हैं जिसमें इन अनियमितताओं का ज़िक्र है.

संजय कुमार ने पुलिस के पास दर्ज अपनी शिकायत में ये कहा भी है कि उनके साथ मारपीट करने वाले लोग उन्हें इस्तीफ़ा देने और यहां से भागने की बात कह रहे थे.

संजय कुमार की फ़ेसबुक पोस्ट

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वीसी का पक्ष

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर अरविंद अग्रवाल ने ख़ुद पर लगे आरोपों का जवाब देते हुए पटना में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार नीरज प्रियदर्शी को बताया, "वो कह रहे हैं कि मैंने इंसान मार दिया और मैं मान जाऊं! सदर अस्पताल के डॉक्टर ने कहा है कि गंभीर चोट नहीं थी. अब वाइस चांसलर के नाम पर कोई पीट देगा तो आप कहेंगे वाइस‌ चांसलर ने पिटवाया है."

विश्वविद्यालय के कामकाज में कथित अनियमितताओं के सवाल पर उन्होंने कहा, "कैग की रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी. वित्तीय अनियमितताओं के बारे में पूछने वाले वो कौन होते हैं. हम मंत्रालय‌ को जवाब देने के लिए ज़िम्मेदार हैं."

इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी के रोस्टर और रिज़र्वेशन पॉलिसी को लेकर भी सवाल उठे हैं.

वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल कहते हैं, "जहां तक बात रोस्टर और रिज़र्वेशन पॉलिसी को फ़ॉलो नहीं करने की है तो विश्वविद्यालय प्रबंधन केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 और भारतीय संविधान में निर्धारित‌ आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन करता है."

संजय कुमार पर हुए हमले की घटना पर उन्होंने कहा, "मैं संजय कुमार पर हुए हमले की भर्त्सना करता हूं, साथ ही उनके सोशल मीडिया के कमेंट की भी कड़ी निंदा करता हूं. ऐसा नहीं होना चाहिए था."

महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ बिहार के वाइस चांसलर डॉक्टर अरविंद अग्रवाल

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बिहार अस्पताल में था ख़तरा

संजय कुमार पर जब हमला हुआ, तो उन्हें सबसे पहले सदर अस्पताल ले जाया गया. संजय के साथी आरोप लगाते हैं अस्पताल ने यह कहते हुए मामले को हल्का बना दिया कि 'इस तरह की मारपीट में तो आदमी बेहोश होगा ही'

जब संजय बार-बार बेहोश होते रहे, तो उन्हें पटना के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) रेफ़र कर दिया गया. यहां के इमरजेंसी वार्ड में वे भर्ती हुए, जहां उनका सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि हुआ.

संजय के साथी प्रोफ़ेसर मृत्युंजय बताते हैं, ''बिहार में हमें लगातार धमकियां मिल रही थीं कि संजय को अस्पताल में जाकर मार देंगे. हमें वहां सुरक्षा का ख़तरा था. पुलिस भी सहयोग नहीं कर रही थी. उन्होंने तो हत्या करने की धारा के तहत एफ़आईआर तक दर्ज नहीं की. यही सब देखते हुए हम संजय को दिल्ली ले आए.''

हालांकि मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक इस संबंध में बीबीसी को बता चुके हैं कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. उन्होंने धारा 307 के तहत मामला इसलिए दर्ज नहीं किया क्योंकि संजय कुमार के शरीर पर बहुत अधिक चोटे दिखी नहीं.

संजय के साथी प्रोफ़ेसर मृत्युंजय कुमार
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देशद्रोह के आरोप

अस्पताल में मौजूद संजय के साथी और उनके ससुर ने कहा कि उन्हें ऐसी खबरें मिल रही हैं कि संजय को देशद्रोही बताया जा रहा है.

मृत्युंजय ने बीबीसी से कहा कि जो लोग संजय को पीट रहे थे वो यह भी बोल रहे थे कि तुम कन्हैया कुमार (जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष) के साथी हो, कन्हैया कुमार बनना चाहते हो.

संजय जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र रह चुके हैं. मृत्युंजय उन्हीं दिनों से उनके साथी हैं. जेएनयू के दिनों को याद करते हुए वे बताते हैं, ''जेएनयू के दिनों में भी संजय डिबेट में हिस्सा लेते रहते थे. उनका रुझान समाज के दबे-कुचले वर्ग की आवाज़ बनने की तरफ था हालांकि वे कभी किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े थे.''

जिस वक़्त संजय के बारे में मृत्युंजय बता रहे थे, उसी समय संजय से मिलने उनके दो रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे. वो दोनों फ़ोन पर उनकी ख़बर सुनने के बाद अस्पताल आए थे. दोनों ही रिश्तेदार फ़ौजी थे.

संजय के ससुर रिश्तेदारों से मिलते हुए कहते हैं, ''बताइए, जिसके रिश्तेदार फ़ौज में हों उनपर देशद्रोह के आरोप लग रहे हैं.''

हाथों में एम्स की फ़ाइल थामे, वो कहने लगे, ''जिस दिन गुंडे इस तरह फ़ैसला करने लगेंगे, सबकुछ अपने हाथों में उठा लेंगे, फिर क्या हमारा बिहार बचेगा और क्या देश.''

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