बिहार प्रोफ़ेसर लिंचिंग मामला: सेंट्रल यूनिवर्सिटी अनिश्चितकाल के लिए बंद

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- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार के मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के सोशियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर संजय कुमार की मॉब लिंचिंग के प्रयास की घटना ने नया रुख अख्तियार कर लिया है.
एक तरफ घायल संजय की लगातार बिगड़ती हालत देख कर रविवार को उन्हें नई दिल्ली के एम्स में रेफर कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है.
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रविवार को जारी एक आदेश में विश्वविद्यालय को 20 अगस्त से अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की बात कही गई है. आदेश में ये कहा गया है कि विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं, शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए ये कदम उठाया गया है.

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यूनिवर्सिटी का माहौल
मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ओएसडी आनंद प्रकाश के दस्तख़त से जारी किए गए इसी आदेश में कहा गया है कि अख़बारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चल रही ख़बरों से विश्वविद्यालय में परिस्थितियां प्रतिकूल हो गई हैं.
केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 के अनुसार विश्वविद्यालय का कुलपति सुरक्षा, सौहार्द्र और अनुशासन का माहौल कायम रखने के लिए ऐसे फ़ैसले ले सकता है. विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वालों छात्रों को 20 अगस्त दोपहर दो बजे से पहले हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए गए हैं.
देश में पिछले कुछ समय से भीड़ के उग्र होने के कई मामले सामने आ चुके हैं. प्रोफेसर संजय कुमार पर शुक्रवार पर भी भीड़ ने कथित रूप से हमला बोल दिया था, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
संजय ने पुलिस को लिखी शिकायत में यह आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उन्हें घर से खींच कर जान से मारने की कोशिश की. वे उनके फ़ेसबुक पोस्ट का विरोध कर रहे थे और उन्हें 'चरमपंथी' बता रहे थे.
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती संजय कुमार की स्थिति ऐसी है कि वो ठीक से बोल नहीं पा रहे हैं. उनका दाहिनी आंख जख़्मी है. परिजनों को आशंका है कि कहीं उनकी आंख की रोशनी न चली जाए.

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'अस्पताल का रवैया असंवेदनशील'
संजय के साथी प्रोफेसर और मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव मृत्युंजय ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है.
बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "अस्पताल के डॉक्टरों का रवैया असंवेदनशील था. कोई पूछने और देखने तक नहीं आ रहा था. सुबह 10 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं आया. हमनें बार-बार शिकायत भी की पर सुनने को कोई तैयार नहीं था."
हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से इंकार किया है और कहा है कि संजय कुमार का इलाज हर संभव बेहतर किया जा रहा था. परिजनों और दोस्तों के दबाव में उन्हें दिल्ली रेफर किया गया है.
संजय को पटना से दिल्ली लेकर पहुंचे मृत्युंजय को उम्मीद है कि एम्स में उन्हें बेहतर इलाज मिल पाएगा.
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आरोप-प्रत्यारोप
मृत्युंजय विश्वविद्यालय को बंद करने के कुलपति के फ़ैसले को गलत ठहराते हैं. उन्होंने कहा, "कुलपति ने जो फ़ैसला किया है वो ठीक नहीं है. वो छात्रों की पढ़ाई बाधित करना चाहते हैं और मामले को रफा-दफा करना चाहते हैं."
"विश्वविद्यालय अब एक यातना गृह बन चुका है, जहां शिक्षकों को न पढ़ाने दिया जाता है, न उन्हें किसी दूसरे कार्यक्रम में भाग लेने दिया जाता है."
इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से पक्ष रखते हुए ओएसडी आनंद प्रकाश ने बीबीसी से कहा कि प्रोफेसर संजय कुमार के साथ मारपीट की घटना की पुलिस प्राथमिकी दर्ज की गई है. अब ये जांच का विषय है.
उन्होंने कहा, "जहां तक बात विश्वविद्यालय के अनिश्चितकाल तक बंद करने की है तो वो फैसला भी कुलपति ने केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम में निहित अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लिया है."
"ये फ़ैसला सुरक्षा कारणों के मद्देनजर लिया गया है. विश्वविद्यालय प्रबंधन वापस शांति बहाली की कोशिश कर रहा है. संजय कुमार के जैसा हादसा किसी और के साथ न हो जाए और फिलहाल जो स्थिति बनी है, उसको देखते हुए विश्वविद्यालय को बंद किया गया है."
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में प्रबंधन के ख़िलाफ वहां के शिक्षक आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलन में संजय कुमार और मृत्युंजय कुमार, दोनों शामिल रहे हैं.

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वाइस चांसलर ने दिया जवाब
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर अरविंद अग्रवाल ने ख़ुद पर लगे आरोपों का जवाब देते हुए बीबीसी को बताया, "वो कह रहे हैं कि मैंने इंसान मार दिया और मैं मान जाऊं! सदर अस्पताल के डॉक्टर ने कहा है कि गंभीर चोट नहीं थी. अब वाइस चांसलर के नाम पर कोई पीट देगा तो आप कहेंगे वाइस चांसलर ने पिटवाया है."
विश्वविद्यालय के कामकाज में कथित अनियमितताओं के सवाल पर उन्होंने कहा, "कैग की रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी. वित्तिय अनियमितताओं के बारे में पूछने वाले वो कौन होते हैं. हम मंत्रालय को जवाब देने के लिए ज़िम्मेदार हैं."
इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी के रोस्टर और रिज़र्वेशन पॉलिसी को लेकर भी सवाल उठे हैं.
वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल कहते हैं, "जहां तक बात रोस्टर और रिज़र्वेशन पॉलिसी को फ़ॉलो नहीं करने की है तो विश्वविद्यालय प्रबंधन केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 और भारतीय संविधान में निर्धारित आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन करता है."
संजय कुमार पर हुए हमले की घटना पर उन्होंने कहा, "मैं संजय कुमार पर हुए हमले की भर्त्सना करता हूं, साथ उनके सोशल मीडिया के कमेंट की भी कड़ी निंदा करता हूं. ऐसा नहीं होना चाहिए था."
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