केरल में बाढ़ से भारी तबाही: 350 की मौत, तीन लाख लोग बेघर

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इमेज कैप्शन, केरल के 14 में से 13 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हैं

भारत के दक्षिणी राज्य केरल में बाढ़ की वजह से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 350 हो गई है.

सूबे के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के शब्दों में कहें तो 'बीते 100 वर्षों में केरल ने ऐसी तबाही नहीं देखी.' बाढ़ का पानी कम हो रहा है, लेकिन मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है.

जून के पहले सप्ताह में भारत में मॉनसून की शुरुआत हुई थी. केरल में भारी बारिश और बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बीते 72 घंटों में तेज़ी से बढ़ी है.

एक सरकारी अनुमान के मुताबिक़, बाढ़ के कारण क़रीब सवा तीन लाख लोगों को बेघर होना पड़ा है और ये लोग राज्य में बनाये गए 2000 से अधिक अस्थाई राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार देर रात केरल पहुँचे थे. शनिवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ केरल के बाढ़ प्रभावित ज़िलों का हवाई दौरा किया.

पीएम मोदी ने 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष' से बाढ़ के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 50,000 रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है.

पिनराई विजयन ने पीएम मोदी के साथ हुई बैठक में ये कहा कि केरल राज्य को बाढ़ की वजह से 19,512 करोड़ रुपये के जान-माल के नुकसान की आशंका है.

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल को 500 करोड़ रुपये की 'सहायता राशि' तत्काल रूप से देने की घोषणा की है. हालांकि पिनराई विजयन ने केंद्र सरकार से 2000 करोड़ रुपये की सहायता राशि माँगी थी.

बाढ़ की स्थिति कितनी ख़राब?

मौसम विभाग ये चेतावनी दे चुका है कि अगले कुछ दिनों में केरल में मूसलाधार बारिश होने के कारण बाढ़ प्रभावित 13 ज़िलों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

केरल में बाढ़ की वजह से जो इलाक़े सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं वो पश्चिमी घाट के 'इकोलॉजिकल सेंसिटिव ज़ोन' के अंतर्गत आते हैं.

सरकार ने राज्य के प्रमुख, कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को 26 अगस्त तक के लिए बंद कर दिया है.

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इमेज कैप्शन, सरकार ने बाढ़ के कारण कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को 26 अगस्त तक के लिए बंद कर दिया है.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, इडुक्की, वायनाड, त्रिवेंद्रम और पलक्कड ज़िले में हालात सबसे ज़्यादा ख़राब हैं.

राज्य के विभिन्न हिस्सों में बिजली आपूर्ति, संचार प्रणाली और पेयजल आपूर्ति बाधित है. यहाँ ट्रेन सेवाएं बाधित हैं और सड़क परिवहन सेवाएं भी अस्त-व्यस्त हैं.

अधिकारियों के अनुसार, कासरगोड़ को छोड़कर बाकी सभी ज़िलों में स्कूल और कॉलेजों में छुट्टी की घोषणा कर दी गई है.

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केरल सरकार ने कहा है कि मारे गए लोगों में से बहुत सारे लोग भूस्खलन के कारण मलबे के नीचे दब गए हैं.

एरनाकुलम के विधायक हिबी एडन केरल की कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री हैं. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "हमारे पास बताने के लिए कोई संख्या नहीं है. यहाँ सभी पीड़ित हैं. हज़ारों लोग राहत शिविरों में हैं. ये पहली बार है जब मेरे निर्वाचन क्षेत्र में इस तरह की तबाही हुई है. लोग अपने लापता परिजनों के बारे में हम से पूछ रहे हैं. ये बहुत परेशान करने वाली स्थिति है."

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इमेज कैप्शन, कोज़ीकोड ज़िले के एक राहत शिविर में लोगों को राहत सामग्री देते स्वयंसेवक

हिबी एडन ने बताया कि उनके इलाक़े के ज़्यादातर शिविर पूरी तरह से भर चुके हैं और एरनाकुलम एक के कई हिस्से द्वीपों की तरह दिख रहे हैं.

इस बीच भारत के गृह मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस साल मानसून शुरू होने के बाद से लेकर अब तक भारत के विभिन्न हिस्सों में 930 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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सरकार क्या कर रही है?

भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन के अनुसार, केरल में शनिवार से 'ऑपरेशन मदद' के तहत भारतीय नौसेना और भारतीय कोस्ट गार्ड की क़रीब 400 नावें बचाव कार्य में लगाई जायेंगी.

वहीं त्रिवेंद्रम स्थित भारतीय वायुसेना के दक्षिणी एयर कमांड ने बाढ़ में फंसे लोगों को एयरलिफ़्ट करने के लिए 22 हेलीकॉप्टर और 6 छोटे विमान बचाव कार्य में लगाये हैं.

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इमेज कैप्शन, वृद्ध लोगों, महिलाओं और बच्चों को एयरलिफ़्ट किये जाने के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई हैं

शनिवार को भारतीय फ़ौज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फ़ौज के कुछ इंजीनियरों के साथ 700 से ज़्यादा जवान बीते नौ दिनों से बचाव कार्य में लगे हुए हैं.

नेशनल डिज़ास्टर रेस्पॉन्स फ़ोर्स (एनडीआरएफ़) ने भी शनिवार को छह टीमें दिल्ली और छह टीमें अहमदाबाद से केरल भेजी हैं. एनडीआरएफ़ की 18 टीमें केरल के 7 ज़िलों में पहले से तैनात हैं.

केरल की स्वास्थ्य आपदा विंग के प्रमुख अनिल वासुदेवन ने कहा है कि उनकी टीमें पीड़ितों की हर संभव मदद के लिए तैयार हैं. उन्होंने बताया कि वो बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली संभावित बीमारियों से निपटने की तैयारियाँ भी कर रहे हैं.

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सीएम की अपील

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों से आग्रह किया है कि वो पानी में फंसे न रहें और बचावकर्मियों की मदद से बाहर निकलें. बचावकर्मी लोगों को ऊंचे इलाक़ों में ले जा रहे हैं जहाँ बनाये गए अस्थाई शिविरों में उन्हें खाना और दवाइयाँ मिल सकती हैं.

सीएम विजयन की इस अपील को पिछले एक हफ़्ते में आईं उन तमाम ख़बरों से जोड़कर देखा जा रहा है जिनमें ये दावा किया गया था कि बाढ़ में फंसे हुए लोग अपनी संपत्ति को छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं.

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शुक्रवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों से बाढ़ राहत कोष में मदद भेजने का आग्रह किया था. उन्होंने ट्विटर पर एक बयान जारी कर लोगों से मदद मांगी थी.

आंध्र प्रदेश, दिल्ली और पंजाब सहित भारत की कुछ अन्य राज्य सरकारों ने भी केरल को राहत राशि देने का वादा किया है.

संयुक्त अरब अमीरात के उप-राष्ट्रपति और दुबई के अमीर शेख़ मोहम्मद बिन रशीद अल-मख़्तूम ने ट्वीट किया है, "संयुक्त अरब अमीरात की सफलता की कहानी में केरल के लोगों का बड़ा योगदान रहा है. उनके प्रति हमारी विशेष ज़िम्मेदारी बनती है. केरल राज्य को आर्थिक मदद देने के लिए हमने एक कमेटी का गठन किया है. मैं लोगों से अपील करता हूँ कि वो मदद के लिए आगे आएं."

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बाढ़: स्थिति इतनी बिगड़ी कैसे?

केरल में मानसून के दौरान अन्य राज्यों की तुलना में अधिक बारिश होना एक सामान्य बात है. लेकिन भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल केरल में कम दबाव के कारण सामान्य से 37 फ़ीसदी अधिक बारिश हुई है.

अगले दो दिनों में भारी बारिश होने का अनुमान है. इसे लेकर लोगों में चिंता है कि कहीं हालात और ज़्यादा न बिगड़ जायें.

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पर्यावरण वैज्ञानिक तेज़ी से हुई वनों की कटाई को केरल की इस आपदा का दोषी ठहरा रहे हैं.

वहीं स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि पारिस्थितिक रूप से नाज़ुक पर्वत श्रृंखलाओं की रक्षा करने में सरकार की विफलता भी बाढ़ का एक बड़ा कारण है.

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि केरल की स्थिति इतनी ज़्यादा ख़राब होने के लिए पड़ोसी राज्यों की सरकारें भी ज़िम्मेदार हैं.

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इसी सप्ताह की शुरुआत में पिनराई विजयन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी के बीच बांध से पानी छोड़े जाने को लेकर सार्वजनिक कहासुनी हुई थी.

केरल में 41 छोटी-बड़ी नदियाँ हैं जो जाकर अरब सागर में मिलती हैं. इन नदियों पर 80 बांध हैं जिन्हें खोल दिया गया है.

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है, "नदियों में उफान के कारण केरल के सभी बांध खोल दिये गए हैं. केरल के अधिकांश जल उपचार संयंत्र डूब चुके हैं और पानी के सभी बड़े मोटर क्षतिग्रस्त हो गये हैं."

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