जब अटल बिहारी वाजपेयी ने माना था, मोदी को न हटाकर हुई बड़ी भूल

इमेज स्रोत, Facebook/Narendra Modi
गुजरात दंगों के दो साल बाद भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने माना था कि उस समय नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री पद से न हटाना बड़ी ग़लती थी.
जून, 2004 में मनाली में एक निजी टेलीविज़न चैनल के इंटरव्यू में वाजपेयी ने ये बातें कही थीं.
वाजपेयी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि गुजरात दंगे साल 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार की एक वजह थे.
ज़ी न्यूज़ चैनल से बातचीत में वाजपेयी ने कहा था, "गुजरात दंगों का असर पूरे देश में महसूस किया गया. यह अप्रत्याशित था और इसने हमें बुरी तरह प्रभावित किया. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटा दिया जाना चाहिए था."
तब वाजपेयी ने उसी महीने मुंबई में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस पर फ़ैसला लिए जाने की बात भी कही थी. हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं.

लोकसभा चुनावों में हार
साल 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी ने समय से पहले लोकसभा भंग करके चुनाव कराने की सिफ़ारिश की थी, लेकिन नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए और भाजपा सत्ता से बाहर हो गई.
तब लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए वाजपेयी ने कहा था, "लोकसभा चुनाव मेरे नेतृत्व में लड़े गए थे और मुझे हार की ज़िम्मेदारी भी लेनी होगी."
हालांकि उन्होंने चुनाव नतीजों को आश्चर्यजनक बताया था.
जल्दी चुनाव कराने के फ़ैसले के बारे में वाजपेयी ने कहा था कि 'पार्टी में इस संबंध में दो विचारधाराएँ थीं, लेकिन बहुमत यही था कि चुनावों की तारीख़ घोषित कर दी जाए.'
उन्होंने स्वीकार किया था कि इस फ़ैसले से भी पार्टी को फ़ायदा नहीं हुआ.

इमेज स्रोत, Getty Images
गुजरात दंगों की वजह से...
कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर वाजपेयी ने बाद में ये कबूला था कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर व्यक्तिगत हमलों की नीति ने भी भाजपा को कोई फ़ायदा नहीं पहुँचाया.
उन्होंने कहा था, "भारत का मतदाता सबकुछ समझता है. इस तरह के व्यक्तिगत हमलों को वह कुछ देर के लिए पसंद कर सकता है, लेकिन दिल से वह इस तरह के हमलों की नीतियों के बिल्कुल ख़िलाफ़ है."
वाजपेयी ने ये भी माना था कि गुजरात दंगे लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार का एक मुख्य कारण बने. वाजपेयी ने कहा था कि दंगे शर्मनाक थे और कभी उनकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए.
"यह कहना मुश्किल है कि चुनावों में भाजपा की हार के सभी कारण क्या थे, लेकिन गुजरात हिंसा का एक नतीजा यह भी था कि हम चुनाव हार गए."
उन्होंने कहा था कि गुजरात दंगों के समय लोगों की भावनाओं का विपक्ष ने फ़ायदा उठाया.
"विपक्ष ने उससे राजनीतिक फ़ायदा उठाना चाहा, लेकिन मैं उन्हें दोष नहीं देता. यह राजनीति है और यहाँ ऐसी बातें होती रहती हैं."
वाजपेयी ने कहा था कि गुजरात में जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण था और उसकी निंदा की गई है. उन्होंने कहा कि ऐसे क़दम उठाना ज़रूरी है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हो सकें.

इमेज स्रोत, Getty Images
'सत्ता की राजनीति' से संन्यास
साल भर बाद (साल 2005) वाजपेयी ने पार्टी की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर मुंबई में रजत जयंती समारोह में 'सत्ता की राजनीति' से संन्यास लेने की घोषणा कर दी.
वाजपेयी ने अपने संक्षिप्त भाषण में संन्यास की घोषणा करते हुए कहा था कि वे अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्टी के लिए काम करते रहेंगे.
वाजपेयी ने ये घोषणा ठीक उसी तारीख को थी जिस तारीख यानी 29 दिसंबर 1980 को 25 साल पहले भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की घोषणा हुई थी और वाजपेयी उस वक्त पार्टी के अध्यक्ष बने थे.
संन्यास की इस घोषणा के कुछ महीने पहले ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख केएस सुदर्शन ने सलाह दी थी कि अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी दोनों की उम्र अधिक हो गई है और अब उन्हें सेवानिवृत हो जाना चाहिए. और केएस सुदर्शन की राय का समर्थन करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि अधिक उम्र के नेताओं को सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












